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| On 2 years ago

Film Jabriya Jodi : Complete Review and Dialogue.

जबरिया जोड़ी : विकल्प के अभाव में जबरिया ही देखनी पड़ रही है।

एकता कपूर की इस फ़िल्म का निर्देशन प्रशांत सिंह ने किया है। फ़िल्म में परिणीति चोपड़ा व सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टार वेल्यू है और इसका टोटल बजट 30 करोड़ बताया जा रहा है। इसके अलावा अपारशक्ति खुराना, जावेद जाफरी व संजय मिश्रा लीड रोल में है। फ़िल्म टाइम बाउंड व बजट लिमिट प्रोडक्शन बताई जा रही है।

फ़िल्म की कहानी

शादी के तीन प्रकार है बिहार में- एरेंज, लव और जबरिया। इस फ़िल्म में जबरिया विवाह को मुद्दा बनाया है। जब

विवाह इतना खर्चीला और गरीबों की पहुँच से बाहर होने लगे तो कम बजट में लोग "जबरिया शादी" का विकल्प चुनते है।
फ़िल्म में बचपन के साथी बबली और अभय जवानी में पटना में एक बार फिर मिल जाते है। अभय का फूल टाइम काम जबरिया शादी करवाना और टारगेट एमएलए का चुनाव जीतना है जबकि फुल टाइम अपने लिए दूल्हा ढूंढ रही है और अभय से मिलने के बाद उसकी तलाश कम्पलीट हो जाती है।
कहानी में कुछ ट्विस्ट के बाद बबली डिसाइड करती है कि वो अभय से जबरिया शादी करेगी। बबली अभय को उठाने के प्लान पर काम करती हैं। अभय बबली से प्यार तो करता है लेकिन उसे लगता है कि वो इस शादी को निभा नही सकेगा।
खैर। अंत में फ़िल्म अन्य फिल्मों की तरह आखिरकार समाप्त हो ही जाती है।

म्यूजिक

फ़िल्म का म्युजिक बस बजता

है, ठीकठाक है लेकिन सिनेमाघर से निकलकर दर्शक के साथ बाहर नही निकलता है। फ़िल्म के गानों को जबरिया बिहारी टोन देने का प्रयास किया गया है। तनिष्क बागची ने कोशिश की है लेकिन बात बनी नही।

सम्वाद

1. रुकावट के लिए खेद है, तुम्हारा किडनैप प्रीपेड है।
2. दुनिया टिका है प्रिंसिपल्स पर चलता सेटलमेंट से है।
3. पब्लिक को दबंग पसंद है मुरदार नहीं।
4. हम जबरिया शादी जरूर कराते है लेकिन रीति रिवाज पूरे करते है।
5. बचपन से जानते है पर जान नही पाए है। जिस दिन जान लोगे उस दिन जान लेलोगे।
6. बचपन मे सिखाया था कि अजनबी से बात मत करो अब अजनबी से शादी करवा रहे हैं।
7. ऊपरवाला दिमाग सबको दिए लेकिन अक्ल सबको नही दिए है।
8. देखे इनके दिमाग मे क्या है? क्योंकि दिल तो इनके पास है नही।
9. फैसला दिमाग से लो लेकिन उसको निभाओ दिल से।

रिकमंडेशन

हम फ़िल्म को 2.5 /5 रेटिंग देते है । फ़िल्म साधारण स्तर की साबित हो रही है। परिणिति स्लिम जरूर हुई है लेकिन चार्म कम हो रहा है। सिद्धार्थ ठीक-ठाक रहे। जावेद जाफरी ने ध्यानाकर्षण किया है व संजय मिश्रा हमेशा की तरह रेगुलर हैं।
फ़िल्म टाइम पास केटेगरी में शामिल है। एकता फिल्म्स को सपने की तरह नही बल्कि उत्पाद के रूप में बनाती है।

नोट- देश के बहुत हिस्सो में पकड़वा या जबरिया शादी आज भी होती है।