Film Romio Akbar Walter: Complete movie review in Hindi, Rating {4/5}, Story, Dialogue and Recommendation.

फ़िल्म रोमियो अकबर वाल्टर: रेटिंग (4/5), पूर्ण कहानी, समीक्षा, सम्वाद व अनुशंसा।

कुछ मुट्ठी भर लोग जानते है कि उनकी मौत के बाद उनको ना नाम मिलेगा, ना सम्मान मिलेगा और ना ही अपने वतन में दो गज जमीन। फिर भी वे अपनी जान अपने वतन के नाम कुर्बान कर देते है। ऐसे लोगो के लिए बनी है फ़िल्म “रोमियों अकबर वाल्टर”।

फ़िल्म का टाइटल “अमर अकबर एंथोनी” की याद दिला देता है लेकिन दोनों फ़िल्म का सब्जेक्ट अलग-अलग है। कायता प्रोडक्शन की फ़िल्म “रोमियो अकबर वाल्टर” थ्रिलर -जासूसी फ़िल्म 1971 के दौर पर आधारित है। जब हिंदुस्तान व पाकिस्तान दोनों राष्ट्र जंग की कगार पर थे। पाकिस्तान तब विभाजन के कगार पर भी था।
“राँ” निदेशक को एक स्पेशल अंडर एजेंट की जरूरत थी जो सीमा के उसपार काम कर सके। यह तलाश पूरी होती है रोमियो उर्फ रहमतुल्लाह अली को ढूंढ कर। रोमियो अपने पिता की तरह देश के लिए कुछ करना चाहता था। अपनी बुढी माँ को छोड़कर वह सीमा के उस पार जाने के लिए तैयार हो जाता है। एक रोज रोमियो पाक ऑक्युपाइड कश्मीर के कोटली एरिया से अकबर मलिक नाम की नई एनटीटी(पहचान) के साथ पाकिस्तान में प्रवेश करता है।
वह अकबर के नाम से पाकिस्तान के एक होटल में असिस्टेंट की नोकरी शुरू कर देता हैं। अकबर पाकिस्तान की सियासत के जनरल हेड अफरीदी की जान बचाकर उसकी गुड बुक में जगह बना लेता है। अकबर को ईस्ट पाकिस्तान को होने वाली बड़ी आर्म सप्लाई की जानकारियां मिलती है। ईस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तानी आर्मी की बढ़ती सरगर्मियों की सूचना रोमियो लगातार भारत को भेजने में सफल होता है।
रोमियों राँ हेड से मिलने के लिए एक मीटिंग फिक्स करता है। मीटिंग में वह राँ हेड को महत्वपूर्ण टेप सौपता है एवम अपनी अम्मी की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपता है। इसी दौरान ईस्ट पाकिस्तान में हजारों-लाखों लोग आजादी हेतु पाकिस्तानी सरकार के विरुद्ध बगावत का बिजुल बजा देते हैं। राँ को रोमियों द्वारा भेजी जानकारी से सुराग मिलता है कि दीपावली के दौरान पाकिस्तान इंडिया पर एयर स्ट्राइक करेगा। इस स्ट्राइक में हजारों बेगुनाह नागरिकों की जान जाने के खतरे से भारत आगाह हो जाता हैं।
भारत इस सूचना के आधार पर पाकिस्तान की योजना के विरुद्ध प्लान क्रिएट कर पाता है। भारत पाकिस्तान को कन्फ्यूज करने हेतु दीपावली से पहले मीडिया को यूज करने का प्लान बनाता हैं। पाकिस्तान में हालात मुश्किल होते जाते है लेकिन रोमियों अपना काम बाखूबी जारी रखता है इसी बीच उसकी प्रेमिका भी इसी प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान एम्बेसी सेकेट्री श्रद्धा शर्मा के नाम से पहुँच जाती है। अब दोनों का टारगेट पाकिस्तान के भारत के विरुद्ध “ऑपरेशन बदलीपुर” को नेस्तानाबूद करना होता हैं।
आईसीआई हेडक्वार्टर की सर्विलांस टीम श्रद्धा शर्मा को सर्विलांस पर लेती है। आईसीआई रोमियों यानी अकबर की जल्द पदोन्नति व सक्रियता को गम्भीरता से लेती है व उसे भी अपनी सर्विलांस पर ले लेती है। इसी बीच पाकिस्तान हिंदुस्तान के विरुद्ध होने वाली कार्यवाही दो दिन पहले करना डिसाइड करता है। जब यह बात हिंदुस्तान की रॉ चीफ को पता पड़ती है तो वह जान जाते है कि पाकिस्तान को भारत की गतिविधियों की पूर्ण जानकारी हैं।
भारतीय राँ भी अपनी प्लानिंग को कम्प्लीट चेंज करता है।
इधर पाकिस्तान की सर्विलांस टीम रोमियों द्वारा हिंदुस्तान भेजे गए मेसेज को पकड़ लेती है। पाकिस्तानी आईएसआई लगातार रोमियों को फॉलो करती हैं। पाकिस्तानी पुलिस अकबर बने रोमियों के घर तक पहुँच जाती है। पुलिस रोमियों को पकड़कर आईएसआई हेडक्वार्टर ले जाती है। उसका पॉलीग्राफ टेस्ट ऑर्गनाइज किया जाता हैं। रोमियों को ब्रूटली हैंडल करके उसकी सच्चाई जानने का प्रयास किया जाता है। आखिरकार रोमियों आईएसआई से रिलीज होता हैं। आईएसआई अकबर का पीछा जारी रखती हैं। अकबर अपने इर्द-गिर्द हुए परिवर्तन को भांप लेता है। इसी बीच पाकिस्तान की फ़ौज में परिवर्तन के कारण रोमियों का अब पाकिस्तान में कोई खैर ख्वाह नही रहता। रोमियों का एकमात्र उद्देश्य पाकिस्तान के प्रोजेक्ट बदलीपुर को रोकना व अपने वतन अपनी प्रेमिका सहित सुरक्षित पहुँचना हो जाता है।
इधर पाकिस्तान की आईएसआई पाकिस्तान मे बिखरे हिंदुस्तानी इंटेलिजेंस टीम को मार देती है। कोई ओर चारा नही देखकर रोमियों पाकिस्तानी सीक्रेसी चीफ से मिलकर डबल क्रॉस करके अपना नया लेकिन लास्ट गेम खेलता है वह श्रद्धा शर्मा को भी गिरफ्तार करवा देता है व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को अपने विश्वास में ले लेता है तथा “ऑपरेशन बदलीपुर” को खुद हिंदुस्तान के विरुद्ध सफलतापूर्वक हैंडल करके पाकिस्तान की सेना का पूरा विश्वास जीत लेता है।
3 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर अटैक किया लेकिन भारतीय सेनायें तैयार थी। आखिरकार पाकिस्तान की आर्म्ड फोर्सेस ने 16 दिसम्बर 1971 को सरेंडर किया व बंग्लादेश का जन्म हुआ। फ़िल्म के अंत मे दर्शक समझ जाते है कि राँ के हेड व रोमियो किस प्रकार भारत को “ऑपरेशन बदलीपुर” से सेव करते है एवम किस प्रकार रोमियो 1971 के बाद भी सेवाएं जारी रखता है।

अभिनय- जॉन अब्राहम की की फेक्टर हैं।

जॉन अब्राहम एक डेडिकेटेड कलाकार है रोमियो के किरदार में उन्होंने जान डाल दी है। जैकी श्राफ की पर्सनल्टी किसी भी उच्च स्तर के कैरियर हेतु सूटेबल है, वे राँ एंड ऐडब्लू के हेड के रूप में जंचते हैं। रघुबीर यादव को लंबे अरसे बाद पर्दे पर देखना सुखद है। मोनी राय ने रोमियों की प्रेमिका के रूप में अच्छा अभिनय किया है।
जॉन अब्राहम वैसे भी चुनिदा फिल्म्स करते है केवम यह फ़िल्म उनकी बेहतर अभिनय के कारण देखने योग्य बन गई है।

म्यूजिक

फ़िल्म का म्यूजिक 1971 कालखंड व सिचुएशन के मुताबिक बेहतर है। फ़िल्म के म्यूजिक पर उर्दू, पंजाबी व परिवेश का असर है। म्यूजिक कहानी के अनुसार व संजीदा है।

सम्वाद-

1. इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपकी और सिर्फ आपकी होगी।
2. तुम्हें कभी सीधी बात नही कही जाएगी, तुम्हे हर बात का मतलब खुद ढूंढना होगा।
3. ईमान बेचकर दौलत कमाना मेरी फितरत में नही।
4. You are under my servilance.
5. अकबर तुम मे मैं अपनी वो झलक देखता हूँ जो मैं अपनी औलाद में देखना चाहता था।
6. कुछ लोगों से रूबरू होने का अहसास ही अलग होता हैं।
7. मेरे लिए वो सिर्फ हिंदुस्तानी है, हिंदू या मुस्लिम नही है।
8. पाकिस्तान आकर मुझे देश मे छूट चुके रिश्तों की अहमियत की समझ आ चुकी हैं।
9. पॉलीग्राफ टेस्ट को झेलने का एक तरीका है- दर्द सहन करना।
10. अपनी पोजिशन से रिटायर होना आसान है लेकिन अपनी सोच से नही।

रिकमंडेशन-

इस सप्ताह (5 फरवरी 2019 को रिलिज) का यह एक अच्छी फिल्म है। फ़िल्म की स्पीड कुछ जगह टूटती है, ज्यादा मनोरंजन नही हैं। इन सबके बावजूद यह एक बेहतरीन फ़िल्म है एवम आप इसे देख सकते है। हम फ़िल्म को 5 में से 3 स्टार इसकी क्वालिटी पर देते है व 1 अतिरिक्त स्टार इसके सब्जेक्ट हेतु देकर रिकमेंड करते है।

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