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| On 3 years ago

Future of India: Delhi is far away.

दिल्ली अभी दूर है।

तिरंगा फहरा रहा है शान से

मुल्क़ की आज़ादी के जश्न के जेरेसाया हम आज खुश बहुत है क्योंकि जब देश आज़ाद हुआ था तब कुछ ताकतों को हमारी काबलियत पर भरोसा बहुत कम था । उनको लगता था कि इतना बड़ा निजाम हम बामुश्किल सम्भाल पाएंगे लेकिन आज तिरंगा पूरी आन-बान-शान से विश्व परिमण्डल पर अपना वजूद रखता है।

भारत विश्व आकर्षण का केंद्र

व्यापार, वाणिज्य, शक्ति, लोकतंत्र, विश्वसनीयता एवम उद्यम के बल पर हमनें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर अपनी पहचान कायम की है। देशज विषयों पर भी हमारी साख बढ़ रही है। हमारी सनातन संस्कृति, योग, आयुर्वेद, शिक्षा, विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य इत्यादि सम्पूर्ण विश्व हेतु आकर्षण का केंद्र है।

सुनिश्चित भविष्य

इतिहास, पर्यटन, सामाजिक ताना-बाना, कृषि, दुग्ध उत्पादन, कौशल, प्रवर्तन क्षमता, वीरता, विश्वसनीयता, सहिष्णुता, अनेकता में एकता, विराट कलेवर, जीवंतता, धार्मिकता, प्रबन्धन, वाणिज्यिक पहल, हेरिटेज, गंगा जमुनी तहजीब, कला, नेतृत्व क्षमता, गतिशीलता, समायोजन क्षमता, पांडुलिपि भंडार, ज्ञान परम्परा, त्याग,आत्मशक्ति, आत्मसम्मान इत्यादि हमारी गहरी बुनियाद है एवम भविष्य में इसी ठोस बुनियाद पर भव्य विकास आधारित है।

मजबूत आधार

आज हम विश्व की सबसे महत्वपूर्ण व बढ़ती अर्थव्यवस्था, युवा जनशक्ति, सम्भावना पूर्ण जनसँख्या, प्राकृतिक संसाधनों, उत्तम जलवायु, बुद्धिमान मानस, मानवीय व्यवहार, क्षेत्रीय सन्तुलन, स्थिरता, मानसिकता, ठहराव, शक्ति केंद्र, वीर जवानों, मेहनतकश किसानों, तीव्रबुद्धि विद्यार्थियों, चिंतक लेखकों, पहल करने वाले उद्योगपतियों के कारण अपने पड़ोसियों पर बढ़त रखते है एवम सुदूर देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जल, जमीन, जंगल व जानवर

अब हमें भौतिक सफलताओं के साथ ही मानवीय मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि सम्पूर्ण राष्ट्रवासियों द्वारा कठोर मेहनत से प्राप्त हुए एकीकृत कर-कोष का ईमानदाराना अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित हो सके। जल-जमीन-जंगल-जानवर का पर्यावरणीय सन्तुलन बना रहे। पडौसी राष्ट्रों से सन्तुलन व सुदूर राष्ट्रों से मित्रता निरन्तर विकसित हो।

विकास के घटक

देशी उद्योगों का विकास ,मानव अनुकूल औद्योगीकरण, सदमूल्य आधारित व्यापार, विश्वासी सामाजिक ढांचा, सामुहिक जिम्मेदारी व त्यागभावयुक्त समाज, प्रगतिशील राजनीतिक विचार, स्वदेशी तकनीकी विकास, रक्षा आत्मनिर्भरता, उपयोगी शिक्षा इत्यादि हमारे योजनाबद्ध विकास के प्रमुख घटक हो।

अनमोल विरासत

आदिकाल से हम भौतिक सफलता पर जीवन की पूर्णता को अधिमान प्रदान

करते आये है। त्याग, वीरता, सतीत्व, स्वाध्याय, तप, दर्शन, जीवनशैली, लेखन, सृजन, रचनात्मकता, सकारात्मक विचार, धर्म,आचार, व्यवहार, मूल्याधारित राज्यव्यवस्था, सत्ता अनुकूलन, सौन्दर्य बोध के कारणों से हमारी विराट संस्कृति व सभ्यता का निर्माण हुआ है। हम इस अनमोल विरासत को मात्र भौतिक कारणों से नजरअंदाज नही कर सकते है।

कुछ बाधा भी है राह में

आतंकवाद, व्यापारिक असन्तुलन, क्षेत्रीय समस्याओं, राजनीतिक विचार संघर्ष, भृष्टाचार, भौतिकवाद, संकुचित सामाजिक सोच, स्वार्थी विकास भाव इत्यादि कुछ क्षेत्रों में हमे अभी बहुत कार्य करना है। वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिनः, गुरु देवो भवः जैसे श्रेष्ठतम सिद्धान्तों से सिंचित समाज हेतु इन समस्याओं पर विजय प्राप्त करना मुश्किल भी नही है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः

व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज व समाज से राष्ट्र

निर्माण की प्रक्रिया है एवम हमे अब एक सुखी व्यक्ति निर्माण प्रक्रिया को महत्व देना होगा। सुखी व सन्तुष्ट व्यक्ति ही समाज को सर्वश्रेष्ठ दे सकता है। एक सुखी व्यक्ति के निर्माण हेतु उसे अपनापन युक्त स्वतन्त्रता, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार व सम्मान पूर्ण समान व्यवहारी व्यवस्था उपलब्ध करवानी होगी।

दिल्ली अभी दूर है।

हैप्पीनेस सर्वेक्षणों, सामाजिक अनुसन्धानों, मीडिया रिपोर्ट्स, अखबारी कतरनों, मीडिया हेडलाइन्स इत्यादि के आधार पर कहा जा सकता है कि हम सभी को व्यक्तिगत व सामुहिक रूप से बहुत प्रयास करने होंगे ताकि हम "सोने की चिड़िया" मधुर कलरव सुन सके व अंतिम व्यक्ति के मुखमण्डल पर संतोषमय मुस्कुराहट का दर्शन कर सके लेकिन
"दिल्ली अभी दूर है"।