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Sanstha Pradhan Margdarshika - Guide Book for Headmasters and Principals

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1 संस्था-प्रधान मार्गदर्शिका। (मा.वि./ उ.मा.वि. स्तर)
1.4 1. विद्यालय प्रबन्धन

संस्था-प्रधान मार्गदर्शिका। (मा.वि./ उ.मा.वि. स्तर)

(पार्ट -1)

खण्ड-प्रथम

शैक्षिक

विद्यालय प्रबन्धन।

1. विद्यालय प्रबन्धन

1.1 विद्यालय समय एवं पारी व्यवस्था

यथा संभव प्रत्येक विद्यालय एक पारी में ही संचालित होगा अपरिहार्य स्थिति में संस्था प्रधान दो पारियों में विद्यालय संचालन के प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक को प्रस्तुत करेंगें। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक औचित्य की जाँच एवं समीक्षा कर मंडल अधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव को निदेशालय मा. शिक्षा राजस्थान, बीकानेर को भिजवाएँगे। निदेशालय से स्वीकृति मिलने पर विद्यालय को दो पारियों में संचालित कर सकेंगे।

एकल पारी एवं दो पारी में विद्यालय संचालन की समय अवधि शिविरा पंचांग के निर्देशानुसार लागू होगी।

वर्तमान में यह व्यवस्था निम्नानुसार हैं।

एकल पारी विद्यालय

(1) प्रातः 7.30 से दोपहर 12.30 तक 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक एवं 16 मार्च से ग्रीष्मावकाश प्रारंभ तक।
(2) प्रातः 10.30 से सायं 4.30 तक 01 अक्टूबर से 15 मार्च तक ।

दो पारी विद्यालय

(1) प्रातः 7.00 से सांय 6.00 बजे तक 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक एवं 1 मार्च से ग्रीष्मावकाश प्रारंभ तक।
(प्रत्येक पारी 5 1/2 घण्टे)

(2) प्रातः 7.30 से सायं 5.30 बजे तक 01 अक्टूबर से 28 फरवरी तक । (प्रत्येक पारी 5 घण्टे)

समय विभाजन

एकल पारी विद्यालयः

प्रार्थना सभा 20 मिनिट
मध्यान्तर 30 मिनिट
शेष समय में 08 कालांश

दो पारी विद्यालयों में कक्षा व्यवस्था निम्नानुसार रहेगी।

* एक ही भवन में माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय कक्षाएं संचालित होती है वहाँ प्रथम पारी में कक्षा 6 से 10 तथा द्वितीय पारी में कक्षा 1 से 5 तक संचालित होगी।
* संस्था प्रधान स्थानीय अपरिहार्य परिस्थितियों के अनुसार जि.शि.अ. के माध्यम से निदेशक महोदय से स्वीकृति लेकर विद्यालय समय में परिवर्तन कर सकते हैं किन्त विद्यालय के प्रति दिवस कुल समय में कमी नहीं की सकेगी । (प.19 (25) शिक्षा 2171 दिनांक 7.12.1997)
* सभी कर्मचारी विद्यालय समय में विद्यालय में ही रहेंगे उ.मा.वि. जो दो पारी में संचालित है, प्रधानाचार्य प्रातः 10.30 से 4.30 बजे तक रहेंगे।
* प्रत्येक विद्यालय में सामान्यतः वरिष्ठतम कर्मचारी प्रथम सहायक एवं सम्बन्धित पारी का वरिष्ठतम कर्मचारी पारी प्रभारी होगा लेकिन संस्था प्रधान दक्षता, विश्वसनीयता एवं जवाबदेही की दृष्टि से कनिष्ठ कर्मचारी को प्रथम सहायक/पारी प्रभारी का दायित्व सौंप सकेगा।

1.1 विद्यालय गणवेश

प्रत्येक सरकारी विद्यालय में आदेश अप्रैल, 97 के अनुसार विद्यार्थियों का गणवेश निर्धारित है छात्रों के लिए खाकी पेन्ट /हाफ पेन्ट व हल्का नीला (आसमानी) शर्ट, छात्राओं के लिए सफेद सलवार व हल्का नीला कर्ता व सफेद चुन्नी अथवा गहरा नीला स्कर्ट व सफेद शर्ट।
(अब यह परिवर्तित है)

वर्तमान में विद्यालय गणवेश छात्रों के लिए कत्थई कलर की पेंट/निकर एवं हल्के भूरे रंग की शर्ट तथा छात्राओं के लिए इसी रंग के कपड़े होंगे।

गैर सरकारी विद्यालय के विद्यार्थियों का गणवेश अलग से निर्धारित कर सकेंगे। राजकीय विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक गणवेश की अनिवार्यता नही होगी। कक्षा 6 से उच्च कक्षाओं में गुरुवार के दिन गणवेश में छूट दी जा सकेगी।

1.2 नामांकन व प्रवेश

1. कक्षा 1 से 8 तक प्रवेश प्रक्रिया आर. टी. ई. अधिनियम 2009 के अनुसार पूर्ण की जाए।
2. कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश शिक्षा विभाग एवं मा. शि. बोर्ड राजस्थान के मानदण्डानुसार दिये जाए।

1.4 प्रवेश आवेदन पत्र

प्रवेशार्थी शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित प्रवेश आवेदन पत्र सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र संलग्न कर स्वयं के एव अभिभावक/संरक्षक के हस्ताक्षर सहित प्रस्तुत करेगा । प्रमाण-पत्र के रूप में प्रवेश अर्हता प्रमाण-पत्र (कक्षा 9 से 12 हेतु ) जाति प्रमाण-पत्र, विकलांगता प्रमाण-पत्र (जहाँ लागू हो ) नत्थी करेगा। समस्त पूर्तियों के जाँच के पश्चात संस्था प्रधान प्रवेशाज्ञा अंकित करेंगे।

1.5 प्रवेश हेतु अर्हताएँ

1. राजकीय/मान्यता प्राप्त विद्यालय द्वारा प्रदत्त कक्षोन्नति प्रमाण-पत्र एवं स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र (टी.सी.) के आधार पर प्रवेश दिया जा सकेगा।
2. स्वयंपाठी छात्रों को अंकतालिका के आधार पर प्रवेश दिया जा सकेगा।
3. राजस्थान से बाहर के विद्यालयों की टी.सी. पर संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के प्रति आवश्यक है।
4. यदि प्रमाण-पत्र में जन्म तिथि का उल्लेख न हो तो जन्म तिथि प्रमाण पत्र / शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।
5. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बाहर के अन्य बोर्ड से उत्तीर्ण छात्र को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर से प्राप्त पात्रता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।

6. स्वयंपाठी छात्रों को कक्षा 9,10,11 व 12 तक प्रवेश के समय आयु का कोई प्रतिबन्ध नहीं है।
7. दो वर्ष से लगातार नियमित रूप से एक ही कक्षा में अनुत्तीर्ण रहे छात्रों को शाला में पुनः प्रवेश देने में बोर्ड को कोई एतराज नहीं है।
8. बोर्ड कक्षाओं में प्रवेश बोर्ड के निर्देशों के अनुसार ही दिये जाएँगे।
9. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अथवा शिक्षा विभाग से निष्कासित /बहिष्कृत छात्र विद्यालय में प्रवेश के पात्र नहीं होंगे।
10. कक्षा X में स्वयंपाठी छात्र के रूप में अनुत्तीर्ण रहे छात्र को पुनः कक्षा X मे नियमित छात्र के रूप में प्रवेश दिया जा सकता है।

1.6 प्रभार आवंटन

नया शिक्षण सत्र प्रारम्भ होने से पूर्व संस्था प्रधान द्वारा उपलब्ध कर्मचारियों, उनकी दक्षता, विश्वसनीयता एवं जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए प्रथम सहायक, पारी प्रभारी, परीक्षा, समय विभाग चक्र, प्रवेश, स्काउटिंग, एन. सी. सी., एन.एस.एस., प्रार्थना सभा, उत्सव-जयन्ती, निर्देशन व परामर्श, कक्षाध्यापक एवं अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यो का आवंटन करना चाहिये । प्रभारी संबंधित कार्यों के सम्पादन के लिए संस्था प्रधान से विचार-विमर्श कर योजना बनाएंगे, संस्था प्रधान को सहयोग करेंगे एवं अभिलेख संधारित करेंगे।

1.7 विभिन्न छात्रवृति हेतु पूर्व तैयारी

छात्रों के नए प्रवेश लेने के उपरांत विभिन्न छात्रवृत्तियों से संबंधित आवश्यक प्रमाण-पत्र यथा आय प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड नं. एवं बैंक खाता नं. आवश्यक रूप से ले लिए जाएँ।

1.8 प्रवेश अवधि

(आंशिक संशोधन) शिविरा पंचांग वर्ष (2011-2012)
(प्रतिवर्ष इन तिथियों में निदेशालय के द्वारा परिवर्तन किया जा सकता है।)
1. प्रवेश प्रक्रिया 01 मई से प्रारंभ होगी।
2. कक्षा 9 से 12 तक के प्रवेश की अन्तिम तिथि 15 जुलाई होगी । कक्षा 10 एवं 12 में अनुत्तीर्ण छात्रों को (परीक्षा परिणाम घोषणा के 7 दिन बाद अथवा 15 जुलाई जो भी बाद में हों) पुनः प्रवेश दिया जा सकेगा।
3. कक्षा 6 से 8 के लिए प्रवेश की अन्तिम तिथि आर.टी.ई. अधिनियम 2009 के अनुसार सत्रारम्भ से 6 मास तक होगी। इसके उपरान्त भी प्रवेश शिक्षकों की समिति की अनुशंसा पर दिये जा सकते हैं।
4. कक्षा 9 एवं 11 का पूरक परीक्षा परिणाम 14 मई को घोषित करने के उपरान्त उत्तीर्ण छात्रों को प्रवेश दिया जा सकेगा।
5. मा.शि. बोर्ड की मुख्य परीक्षा अथवा पूरक परीक्षा में उत्तीर्ण/ अनुत्तीर्ण छात्रों को परिणाम घोषित होने के 7 दिन तक प्रवेश दिए जाएं।
6. छात्र के माता-पिता संरक्षक के स्थानान्तरण अथवा उसके परिवार के स्थानान्तरण से प्रभावित छात्र को चालू सत्र में किसी समय प्रवेश की अनुमति जिला शिक्षा अधिकारी दे सकेंगे (बोर्ड पत्रिका अक्टू-दिस.93) यदि छात्र ने बोर्ड परीक्षा का आवेदन-पत्र पूर्व विद्यालय से अग्रेषित कराया है तो बोर्ड से परीक्षा केन्द्र परिवर्तन करवाने का उत्तरदायित्व छात्र का ही होगा।
(प्रत्येक वर्ष का शिविरा पञ्चांग देख कर तदनुसार निर्णय लेवे)

प्रत्येक छात्र-छात्रा से नियमानुसार प्रति वर्ष राजकीय, छात्रनिधि एवं विद्यालय विकास शुल्क वसूल किया जाएगा।

नोट:- कक्षा 6-8 तक किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नही लिया जाएगा।

1.10 छात्र निधि शुल्क में छूट

1. अनु. जाति/जनजाति/अ.पि.व./विशेष पिछड़ा वर्ग छात्र-छात्राओं को छात्रनिधि शुल्क में 50 प्रति. की छूट होगी।

2. छात्रनिधि शुल्क की वसूली अधिकतम 3 किश्तों में की जा सकती है।

1.11 कम्प्यूटर शिक्षा शुल्क

कक्षा 9 एवं 10 में कम्प्यूटर शिक्षण हेतु कोई शुल्क नही लिया जाएगा।

1.12 विद्यालय विकास कोष शुल्क

राजकीय माध्य./उ.मा. विद्यालय में विद्यालय विकास समिति पंजीकृत करवाना अनिवार्य है। विद्यालय विकास समिति की बैठक में पारित किया गया विकास शुल्क वसूल किया जा सकता है।

1.13 प्रवेश फाइल संधारण

- प्रवेश आवेदन-पत्रों की फाइल प्रवेश क्रमानुसार/वर्षवार/कक्षावार किया जाए। यथा संभव व कम्प्यूटर में संधारित किया जाए।
-प्रत्येक प्रवेश आवेदन पत्र पर प्रवेशांक अंकित किए जाए।
- पुनः प्रवेश के आवेदन पत्र पृथक से फाइल करें । इनके प्रवेशांक पूर्ववत् ही रहेंगे।
- प्रवेश आवेदन पत्रों पर शुल्क, रसीद संख्या,दिनांक व राशि अंकित की जाए।
-प्रवेश फाइल स्थायी अभिलेख हैं।

1.14 छात्र प्रवेश पंजीयन रजिस्टर (स्कॉलर रजिस्टर संधारण)

सभी राजकीय/मान्यता प्राप्त माध्यमिक/उ.मा.वि. निर्धारित प्रारूप में स्कॉलर रजिस्टर का संधारण करेंगे। यह एक स्थाई रजिस्टर है। यथा सम्भव निम्नलिखित सूचनाएं कम्प्यूटर में भी संधारित की जाए।

1. नव क्रमोन्नत माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 6 से 9 तक अध्ययनरत सभी छात्रों का प्रवेश रजिस्टर उ.प्रा.वि. से स्कॉलर रजिस्टर में स्थानान्तरित करें एवं नये प्रवेशांक आवंटित करें।
2. प्रत्येक प्रवेशार्थी को प्रवेश के क्रमानुसार प्रवेशांक आवंटित करें प्रवेश आवेदन पत्र एवं पूर्व विद्यालय की स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टी.सी.) के आधार पर समस्त पूर्तिया अंकित की जाए।
3 जब तक विद्यार्थी विद्यालय त्याग नहीं करता, प्रवेशांक वही रहेगा।
4. विद्यार्थी की जन्म तिथि (अंकों एवं शब्दों में ) अंकित हो एवं संस्था प्रधान द्वारा प्रमाणित की जाए।
5. स्कॉलर रजिस्टर के प्रत्येक पृष्ठ की सभी प्रविष्ठियाँ की जाए।
6. विद्यार्थी का नाम पृथक किए जाने के पश्चात् पुनः प्रवेश लेने पर प्रवेशांक पूर्ववत् ही रहेंगे, लेकिन टी.सी. लेने के पश्चात् पुनः प्रवेश किया जाए तो नये प्रवेशांक आंवटित किए जाए।
7. प्रत्येक वर्ष परीक्षा परिणाम की घोषणा के साथ ही उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, कक्षोन्नति की प्रविष्टि की जाए। चरित्र व आचरण सम्बन्धी स्तम्भ स्वयं संस्थाप्रधान द्वारा भरा जाकर प्रमाणित किया जाए।
8. स्कालर रजिस्टर में प्रविष्टियाँ बिना काँट-छाँट व उपरिलेखन के की जाए।
9. जन्म तिथि/नाम/उपनाम परिवर्तन पृष्ठ में चिपकाए व नियमानुसार संशोधन किए जाने के सम्बंधित आदेश क्रमांक व तिथि अंकित कर संस्था प्रधान द्वारा हस्ताक्षर किए जाए।
10. रजिस्टर के आरम्भ में अनुक्रमणिका बनाई जाए।

1.15 छात्र उपस्थिति व अवकाश:-

1. छात्र की विद्यालय में उपस्थिति एक तथ्यात्मक प्रमाण है, अतः इसमें काँट-छाँट, उपरिलेखन न हो।
2. प्रत्येक कक्षा एवं वर्ग के लिए अलग-अलग छात्र उपस्थिति रजिस्टर होंगे। कक्षाध्यापक इन्हें संधारित करेंगे।
3. छात्र उपस्थिति 1 मई से ही संधारित होगी। कक्षा में गत सत्र में अनुत्तीर्ण रहे, पूरक परीक्षा योग्य छात्रों के नाम लिखने के पश्चात् पिछली कक्षा में उत्तीर्ण छात्रों के नाम लिखे जाए।
4. नये प्रवेश के नाम प्रवेश तिथि के क्रम में लिखते जाए।
5. उपस्थिति का अंकन दिन में दो बार 1,2,3,4,... अनुपस्थिति को लाल स्याही से एव अवकाश को ' एल' से अंकित किया जाए।
6. स्काउटिंग, एन.सी.सी, खेलकूद प्रतियोगिता में संस्था प्रधान की अनुज्ञा से बाहर गये छात्र-छात्रा की उपस्थिति "टी" से अंकित करें। इन्हें उपस्थित मानते हुए आगामी दिवस की उपस्थिति अंकित की जाए।
(यथा 21,22,23,24 टी.टी. 27, ए, 28, एल.एल,29,30)
7. प्रति मीटिंग कुल उपस्थिति, अनुपस्थिति, अवकाश का योग किया जाए।
8. प्रारंभिक पृष्ठों पर छात्र संबंधी सूचनाएँ, शुल्क-ब्यौरा मय रसीद सं. व दिनांक, शुल्क में छूट का आधार स्थाई पता/अभिभावक का फोन/मोबाइल न./आधार कार्ड/बैंक अकाउंट नंबर अंकित किया जाए।
9. प्रत्येक माह में छात्र के नाम के साथ प्रवेशांक लिखे जाएं।
10. माह के अन्त में कुल उपस्थिति, अनुपस्थिति, अवकाश का योग किया जाए। प्रति मीटिंग औसत उपस्थिति,माह के अन्त में छात्रों की जाति वर्ग /लिंगवार अनुसार /आयु अनुसार वास्तविक संख्या का गोश्वारा निकालकर जांचकर्ता व संस्था प्रधान के हस्ताक्षर कराए जाए।

11. सत्र के अन्तिम माह में गोश्वारे के साथ परीक्षा परिणाम भी लिखे जाए।
12. रविवार एवं अन्य अवकाशों को संबंधित तिथि के स्तम्भ में लिखे जाए।
13. राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त व 26 जनवरी को उपस्थिति का अंकन किया जाए।
14. माध्यमिक कक्षाओं में लगातार 20 मीटिंग अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के नाम पृथक किए जा सकते हैं।
15. छात्र के अभिभावक को प्रगति पत्रों के माध्यम से छात्र उपस्थिति की सूचना दी जाए।
16. अनियमित अथवा न्यून उपस्थिति वाले छात्र-छात्रा के अभिभावक को 2 माह में एक बार लिखित सूचना दी जाए एवं आवश्यक हो तो व्यक्तिगत सम्पर्क किया जाए।
17. उपस्थिति रजिस्टर में कॉलम रिक्त नही छोड़े जाए, न हीं (-)लगाया जाए।

1.16 दैनिक उपस्थिति पंजिका

छात्र उपस्थिति लेते समय ही मीटिंग की उपस्थिति का गोश्वारा कक्षाध्यापक द्वारा दैनिक उपस्थिति पंजिका में लिखेंगे। जिसके कुल योग से मीटिंग अनुसार विद्यालय में कुल उपस्थिति, अनुपस्थिति, अवकाश ज्ञात हो सकेंगे। विद्यालय में उपस्थिति पट्ट पर प्रतिदिन उपस्थिति, अनुपस्थिति अवकाश ज्ञात हो सकेंगे। विद्यालय में उपस्थिति पट्ट पर प्रतिदिन उपस्थिति लिखी जाए।

1.17 समेकित / संचयी उपस्थिति रजिस्टर

कक्षा के छात्रों की प्रत्येक माह की कुल उपस्थिति समेकित उपस्थिति रजिस्टर में प्रविष्ट की जाएगी। यह रजिस्टर कार्यालय द्वारा संधारित किया जाएगा।

1.18 विद्यालय के अवकाश

1. शिविरा पंचाग द्वारा घोषित अवकाश ।
2. संस्था प्रधान दो दिवस का अवकाश जिसमें एक मध्यावधि अवकाश के पूर्व एवं दूसरा मध्यावधि अवकाश के बाद की अवधि में घोषित कर सकते हैं। संस्था प्रधान 31 जुलाई के पूर्व अवकाश के प्रस्ताव नियंत्रण
अधिकारी को भेजेंगे।
3. जिला कलेक्टर द्वारा घोषित अवकाश संबंधित जिले में मान्य होंगे।
4. केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा समस्त राष्ट्र के लिए रेडियों व टी.वी.पर घोषित अवकाश।
5. जिला/प्रान्तीय शैक्षिक सम्मेलन हेतु शैक्षिक अवकाश शिक्षकों के लिए मान्य है। (राज्य सरकार द्वारा घोषित होने की स्थिति में)
6. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले छात्रों के लिए 14 दिन की तैयारी अवकाश रहेगा।
7. अर्द्धवार्षिक/वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए क्रमशः एक व दो दिन का छात्रों के लिए तैयारी अवकाश रहेगा।
8. मध्यावधि, शीतकालीन व ग्रीष्मावकाश में मंत्रालयिक कर्मचारी केवल राजपत्रित अवकाश का ही उपयोग कर सकेंगे।
9. 15 अगस्त व 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्वो पर पूर्ण अवकाश होते हुए भी शिक्षकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य है।
10. शिविरा पंचांग व राजस्थान सरकार के पंचांग में विसंगति हो तो राजस्थान सरकार के पंचांग को सही मानते हुए शिविरा पंचांग में संशोधन माना जाए।

1.19 स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया

स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र छात्र/छात्रा द्वारा विद्यालय त्यागने का प्रमाण है, अतः जारी करने से पूर्व-
1. छात्र-छात्रा अथवा संरक्षक का आवेदन पत्र प्राप्त कर संस्था प्रधान आज्ञा प्रदान करेगा।
2. निर्धारित शुल्क कक्षा 9 से 12 तक 5/-रुपये जमा करना तथा रसीद देना।
3. टी.सी. जारी करने की तिथि तक की प्रविष्टियाँ स्कॉलर रजिस्टर में पूर्ण करना यह सुनिश्चित करना कि छात्र के संबंधित सभी प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुके हैं। बोर्ड परीक्षा परिणाम का इन्द्राज समाचार पत्र में
प्रकाशित परिणामों के आधार पर नहीं करना चाहिए ।
4. यह सुनिश्चित करें कि छात्र ने शुल्क अथवा विद्यालय से प्राप्त सामग्री जमा करा दी है।
5. लिपिक छात्र के स्कॉलर पृष्ठ की प्रति बनाएंगे जिसे संस्था प्रधान प्रमाणित करेंगे।
6. टी.सी. की द्वितीय प्रति 10/- रुपये के स्टाम्प पर हलफनामे को प्रस्तुत करने पर दी जा सकती है। टी. सी. शुल्क 5/-रुपये है।
7. छात्र के स्कॉलर पृष्ठ पर छात्र/छात्रा अथवा संरक्षक से प्राप्ति रसीद लेकर टी. सी. दी जाए।
8. यदि छात्र दूसरे राज्य में अध्ययनार्थ टी.सी. ले रहा है तो जिला शिक्षा अधिकारी के प्रति हस्ताक्षर कराने का सुझाव दें।
9. टी.सी. जारी करने का रजिस्टर (टी.सी. इश्यु रजिस्टर ) में प्रविष्टि करे एवं छात्र उपस्थिति रजिस्टर से नाम पृथक करें।
10. यदि टी.सी. सत्र के मध्य दी जाती है तो उस सत्र में छात्र से वसूल किए गये शुल्क का ब्यौरा मय रसीद एवं शुल्क में छूट का आधार टी.सी. पर अंकित करें।

1.20 जन्म तिथि परिवर्तन

संस्था में प्रवेश के समय आवेदन पत्र में घोषित जन्म तिथि का उल्लेख स्कॉलर रजिस्टर में किया जायेगा। पूर्व विद्यालय से प्राप्त स्थानान्तरण प्रमाण से जन्म तिथि का सत्यापन किया जायेगा। जन्म तिथि में परिवर्तन निर्धारित प्रकिया हेतु छात्र के माता पिता आवेदन करे तो प्रकरण में सुधार किया जा सकेगा।

1.21 जन्म तिथि परिवर्तन के लिए बोर्ड परीक्षा हेतु आवेदन पत्र अग्रेषित किए जाने के पूर्व निम्न प्रक्रिया अपनाई जाए।

1. छात्र अध्यनरत हो ।
2. माता पिता /अभिभावक के आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण-पत्र संलग्न होने चाहिए।
1. प्रथम प्रवेश के आवेदन पत्र की प्रति ।
2. ग्राम पंचायत/नगर पालिका से प्राप्त जन्म प्रमाण-पत्र की प्रति ।
3.माता-पिता का शपथ पत्र जिसमें जीवित व मृत संतानो की जन्म तिथि का भी उल्लेख हो ।
4.दो पड़ोसियों/रिश्तेदारों के शपथ पत्र ।
5.जन्म तिथि, जन्म कुण्डली ।
6.अध्ययनरत विद्यालय के स्कॉलर रजिस्टर पृष्ठ की प्रति, पूर्व विद्यालय के टी.सी. की प्रति, प्रवेश आवेदन की प्रति।

3. अग्रेषित करने वाले संस्था प्रधान की टिप्पणी के साथ जिला शिक्षा अधिकारी (मा.) को भेजे जायेंगे।प्रकरण की जाँच कर वस्तु स्थिति से संतुष्ट होने पर जिला शिक्षा अधिकारी जन्म तिथि परिवर्तन के आदेश की प्रति स्कॉलर रजिस्टर के सम्बन्धित पष्ठ पर चिपकाई जाएंगी आदेश संख्या, दिनांक स्कॉलर पृष्ठ पर लिखकर संशोधन अंकित किया जाए एवं संस्था प्रधान द्वारा प्रमाणित किया जाए।

1.22 नाम/उपनाम परिवर्तन

1.छात्र के पिता के नाम में परिवर्तन के प्रकरण कार्यालय में प्रस्तुत नहीं होंगे।
2. केवल अध्ययनरत छात्र-छात्रा के प्रकरण ही प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
3.छात्र-छात्रा अथवा अभिभावक के आवेदन पत्र के साथ निम्न संलग्न हो-
1. अधिकृत न्यायालय का मूल प्रमाण-पत्र /शपथ पत्र जिसमें छात्र, पिता का नाम, वर्तमान शाला व कक्षा जिसमें अध्ययनरत हैं, प्रमाणित हो।
2. मान्यता प्राप्त दैनिक समाचार पत्र (राज्य स्तर के) में प्रकाशित विज्ञापन ।
3. अभिभावक से लिखित घोषणा की छात्र के नाम परिवर्तन से उत्पन्न किसी भी विवाद के लिए वह उत्तरदायी होगा।
4. प्रवेश आवेदन-पत्र की प्रति ।
5. पूर्व विधालय का टी.सी. ।
6. छात्र से सम्बन्धित स्कॉलर की प्रतिलिपि ।
7. संस्था प्रधान की टिप्पणी ।
8. जिला शिक्षा अधिकारी प्रकरण की जांच करेंगे व संतुष्ट होने पर आदेश जारी करेंगे।
9. संस्था प्रधान आदेश संख्या दिनांक अंकित कर नाम/उपनाम में संशोधन करेंगे एवं प्रमाणित करेंगे।

1.23 बोर्ड परीक्षा के आवेदन पत्रों को अग्रेषित करने के पश्चात जन्म तिथि नाम उपनाम में संशोधन की प्रक्रिया । (मा.शि.बो. के नियमानुसार)

1.साधारणतः बोर्ड कार्यालय के अभिलेखों में जन्म-तिथि, छात्र का नाम, पिता का नाम, उपनाम एक बार पंजीकृत हो जाने के पश्चात् संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
2.यदि छात्र के प्रवेश आवेदन पत्र से स्कॉलर रजिस्टर में अथवा स्कॉलर रजिस्टर से परीक्षा आवेदन पत्र में प्रविष्टियां करने में कोई अन्तर रह गया है तो अग्रेषण अधिकारी द्वारा सम्बन्धित विद्यालय का मूल
रिकॉर्ड जांच करने हेतु बोर्ड कार्यालय में भेजने पर ही संशोधन करने पर विचार किया जा सकेगा।
3.जन्म तिथि, छात्र का नाम, पिता का नाम, उपनाम प्रत्येक संशोधन हेतु बोर्ड नियमानुसार पृथक-पृथक संशोधन शुल्क प्रस्तुत करने पर कार्यवाही होगी।
4.वर्तनी अशुद्धि को संशोधन करवाने हेतु सम्बन्धित शाला द्वारा प्रमाणीकरण करा कर बोर्ड नियमानुसार शुल्क भेजने पर कार्यवाही की जा सकेगी।
5.उपर्युक्त संशोधन हेतु पाँच वर्ष के पूर्व के मामलों पर विचार नहीं किया जायेगा ।
6.बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् छात्र किसी सम्बन्धी के गोद जाता है तो उसके पिता के नाम के स्थान पर गोद गये सम्बन्धी का नाम किसी आधार पर नहीं बदला जायेगा।

7.द्वितीय प्रति अंकसूची प्रमाण-पत्र 60x2-120 रुपये
8. माइग्रेशन प्रमाण-पत्र 50x2:100 रुपये।

1.24 समय विभाग चक्र

विद्यालय उपलब्ध मानवीय संसाधनों की सुगठित व्यूहरचना की योजना समय विभाग चक्र है। कालांश निर्धारण कक्षा 6,7,8 2011-12 शिविरा /प्रारं./शै./ए.बी./3511/समान परीक्षा/11-12 15.6.11

1.25 विषय अध्यापकानुसार कार्यभार प्रतिसप्ताह

विशेष निर्देश

1. उ.मा.वि. कक्षाओं के जिन विषयों में सैद्धान्तिक व प्रायोगिक परीक्षाएं होती हैं, उन विषयों में 6 कालांश सैद्धान्तिक व 4 कालांश प्रायोगिक कार्य के लिए होंगे। कृषि वर्ग में 6 कालांशों में से 4 कालांश सैद्धान्तिक एवं 2 कालाश प्रायोगिक कार्य के होंगे।

2. जिन उ.मा.वि. में कक्षा 11 व 12 में विद्यार्थी कम्प्यूटर विज्ञान विषय का अध्ययन कर रहे हैं, उन विद्यार्थियों का स्वा. एवं शा. शिक्षा, नैतिक शिक्षा व पुस्तकालय में मुक्त रखा जाकर इन कालांशों में विद्यार्थी कम्प्यूटर विज्ञान विषय का अध्ययन करेंगे।
3. विषयाध्यापकानुसार - कार्य भार (प्रति सप्ताह)
संस्था प्रधान- 12 कालांश
प्राध्यापक- 33 कालांश
वरिष्ठ अध्यापक- 36 कालांश
अध्यापक- 42 कालांश

ध्यान देने योग्य बातें

1. यथा संभव विषयाध्यापकों से संबंधित विषय का अध्यापन करवाया जाए।
2. एक अध्यापक से दो से अधिक विषयों का अध्यापन नहीं करवाया जाए।
3. भाषा शिक्षकों को 3, प्रवृति प्रभारी को 3, परीक्षा प्रभारी को 12 व पारी प्रभारी के 12 कालांश भार में माना जाए।
4. उच्च कक्षाओं में कठिन विषय (अंग्रेजी ,गणित, विज्ञान ) यथा सम्भव मध्यान्तर से पूर्व हो ।
5. एक विषय अथवा एक ही शिक्षक के कालांश एक ही कक्षा/वर्ग में लगातार न हो ।
6. पारी प्रभारी प्रथम सहायक के प्रथम व पंचम कालांश विद्यालय व्यवस्था हेतु रिक्त रखे जाए।
7. लिपिक वर्ग से शिक्षण कार्य नहीं करवाया जाए।
8. प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कम्प्यूटर कक्ष में एक साथ एक से अधिक कक्षाओं के कालांश नही होने चाहिए
9. समय विभाग चक्र कक्षानुसार व अध्यापकानुसार बनाकर उसकी प्रतियाँ कार्यालय स्टाफ रूम व अन्य उपर्युक्त स्थान पर लगानी चाहिए ।
10. कक्षाध्यापक यथा संभव संबंधित कक्षा का विषयाध्यापक हो।

1.26 प्रभावी अधिगम की योजना

विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तरोन्नयन में जो कारक महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं, उनमें शिक्षण और गृहकार्य मुख्य है। शिक्षण एवं गृहकार्य की प्रभावशीलता ही विद्यार्थियों में अधिगम एवं लेखन कौशल के साथ साथ अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित कर सकती है। इन क्षमताओं के विकसित हो जाने पर विद्यार्थी किसी भी प्रकार के मूल्यांकन (मौखिक/लिखित) में अच्छी सफलता प्राप्त कर सकता है। इसीलिए शिक्षण व गृहकार्य योजना को विद्यालय में प्रभावी अधिगम व लेखन के साथ-साथ अभिव्यक्ति की क्षमता के विकास हेतु विद्यालय स्तर पर
शिक्षक और गृहकार्य की प्रभावी योजना निम्नानुसार तैयार की जा सकती है। शिक्षण सहायक सामग्री/आई.टी. का शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में प्रभावी उपयोग हो।

1.27 शिक्षण योजना

1. शिक्षण के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रत्येक अध्यापक अपने शिक्षण विषयों से संबंधित शिक्षण कार्य की एक वार्षिक योजना निर्मित करेंगे। इस योजना को मासिक योजना में (माह के कार्य दिवस एवं इकाई के स्तर के आधार पर) विभाजन करेंगे। पाठ्यक्रम विभाजन में ध्यातव्य है कि कक्षा 10 से 12 का दिसम्बर माह तक आवश्यक रूप से पूर्ण हो जाए। इसके बाद जनवरी से मार्च प्रथम सप्ताह तक बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए करणीय प्रयत्नों की योजना 31 जुलाई तक संस्था प्रधान से अनुमोदन करा योजनानुसार सत्र पर्यन्त शिक्षण कार्य करेंगे। संस्था प्रधान समय-समय पर योजनानुरूप शिक्षण कार्य तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का पता लगाएँगे एवं आवश्यकतानुसार सुझाव /मार्गदर्शन देंगे।
2.कार्य दिवस व कालांश वास्तविक उपलब्धता के अन्तर को ध्यान में रखा जाए।

1.28 गृहकार्य योजना

लेखन अभिव्यक्ति का कौशल/क्षमता विकसित करने के लिए प्रत्येक अध्यापक को अपने शिक्षण विषयों से संबंधित इकाईवार एक वार्षिक योजना निर्मित करेंगे। इस योजना को मासिक योजना में इकाईवार
(माह के कार्य दिवस एवं इकाई के स्तर के आधार पर) गृह कार्य का निर्धारण मात्रात्मक रूप में योजनानुसार कर 31 जुलाई तक संस्था प्रधान से अनुमोदन कराएँगे। कक्षा 10 एवं 12 के विषयाध्यापकों द्वारा माह जनवरी एवं फरवरी में प्री बोर्ड प्रश्न पत्र बोर्ड स्तर के स्वनिर्मित प्रश्न इकाईवार तैयार कर विद्यार्थियों से हल कराने का योजना में उल्लेख किया जाए। प्रत्येक अध्यापक अपने विषय की योजना अनुसार सत्र भर गृहकार्य जांच नियमित एवं व्यवस्थित प्रभावी रूप से सम्पादित करेंगे। संस्था प्रधान समय-समय पर योजनानुरूप गृहकार्य जांच स्तर एवं विद्यार्थियों के प्रयास स्तर का अवलोकन कर यथोचित सझाव/मार्गदर्शन देंगे।

1.29 अध्यापक दैनन्दिनी

शिक्षण अधिगम को प्रभावशील बोधगम्य एवं उद्देश्यनिष्ठ बनाने के लिए अध्यापक शिक्षण की वार्षिक एवं मासिक योजना के आधार पर दैनिक योजना शिक्षण दिवस के पूर्व तैयार करेंगे। अध्यापक यह योजना एक निर्धारित प्रारूप वाली अध्यापक दैनन्दिनी में संधारित करेंगे। दैनन्दिनी में प्रति दिन कराए जाने वाले शिक्षण से संबंधित उद्देश्य, शैक्षिक तकनीकी, पाठ्य वस्तु, लिखित/गृह कार्य एवं पाठ्येत्तर प्रवृत्तियों का उल्लेख अवश्य होगा। यह दैनन्दिनी अध्यापक के दैनिक क्रियाकलापों, उसके अध्यापन कौशल एवं कक्षा शिक्षण की पूर्व तैयारी की परिचय पुस्तिका है। संस्था प्रधान प्रतिदिन शिक्षण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व सभी अध्यापकों की दैनन्दिनी का अवलोकन करेंगे और तद्नुरूप शिक्षण कार्य का आंकलन कर यथोचित सुझाव/मार्गदर्शन देंगे।

1.30 शिक्षण अधिगम पर्यावरण

विद्यालय ज्ञान का अथाह सागर है, जिसकी अनन्त गहराइयों में बहुमूल्य रत्न ज्ञान रूप में निहित है। आवश्यकत्ता है शिक्षक-शिक्षार्थी मिल कर इस विद्यालय सागर मन्थन से ज्ञानरूपी अमृत को निकालने की। शिक्षार्थी को यह ज्ञानरूपी अमृत पान कराना ही संस्था प्रधान का सर्वोच्च दायित्व है। इस दायित्व का भलीभाँति निर्वहन करने के लिए आवश्यकता है कि संस्था प्रधान विद्यालय को एक ऐसा शैक्षिक पर्यावरण प्रदान कराए, जिसमें शिक्षक-शिक्षार्थी मिलकर आपसी सहयोग व अन्तः क्रिया द्वारा शिक्षण अधिगम की प्रभावी संस्थितियां
सहज रूप में निर्मित हो सकें। शिक्षक-शिक्षार्थी यह महसूस करने लगे कि विद्यालय पर्यावरण अधिक पूर्ण समय तक ठहराव उनकी सर्वोच्च वरियता हो। अतः विद्यालय में प्रभावी शिक्षण अधिगम पर्यावरण निर्मित करने की दिशा में संस्था प्रधान द्वारा निम्नांकित प्रयास यथा संभव किये जा सकते हैं।

1.विद्यालय परिसर सदैव स्वच्छ एवं आकर्षक ( रंगाई-पुताई युक्त) ।
2.पुष्प वाटिका युक्त हरियाली भरा पर्यावरण ।
3.पीने के स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था एवं स्वच्छता ।
4.यथा स्थान कचरा पात्रों की व्यवस्था ।
5. प्रसाधन व्यवस्था एवं उनकी नियमित स्वच्छता (छात्र-छात्राओं के लिए पृथक-पृथक) ।

6. बरामदों में प्रेरणास्पद व शैक्षिक सामग्री का प्रदर्शन यथा-मानचित्र, विज्ञान, सामान्य ज्ञान, दैनिक समाचार, शब्द ज्ञान वर्धन, उपस्थिति अंकन, मूल्य परक आदर्श वाक्य, आज का विचार, भित्ति पत्रिका,
संस्कारप्रद चित्र/सामग्री, प्रगतिशील विद्यार्थियों का विवरण, भामाशाह पट्ट, महापुरुषों के चित्र, राष्ट्रीय एवं विभागीय कार्यक्रम, शिविरा पंचाग एवं विद्यालय स्तर के कार्यक्रमों की प्रतिमाह रूप-रेखा, परीक्षा,
खेल, स्काउट/गाईड/विज्ञान मेला आदि प्रवृत्तियों में राज्य/राष्ट्र स्तर पर प्रतिनिधित्व का सम्मान पट्ट तथा विद्यालय की विशेषताएं प्रति वर्ष की उपलब्धियों एवं आवश्यकताओं का विवरण।

विद्यालय दर्पण का अद्यतन संधारण:-

1.शिक्षण अधिगम की प्रभावशीलता हेतु आवश्यक साधन सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
2. कक्षा कक्ष में वायु एवं प्रकाश की समुचित व्यवस्था ।
3.नियमित स्वच्छता।
4.छात्र संख्या के अनुसार बैठक व्यवस्था।
5.श्याम पट्ट अच्छे एवं उपयोगी स्थिति में (साईज एवं धरातल की दृष्टि से)
6.आवश्यक सूचनाएं यथा समय विभाग चक्र ,छात्र संख्या-जाति वार (छात्र-छात्राएं ) कक्षाध्यापक, कक्षा नायक, गृह कार्य समय विभाग चक्र, मानचित्र आदि।
7.संस्था प्रधान कक्ष में प्रकाश एवं वायु की समुचित व्यवस्था।
कक्ष स्वच्छ एवं आकर्षक (रंगाई-पुताई युक्त)
8.अच्छी एवं पर्याप्त बैठक व्यवस्था। (आगन्तुकों व अभिभावकों के लिए)
9.विद्यालय संबंधी समस्त शैक्षिक सूचनाओं का प्रदर्शन यथा-बोर्ड परीक्षा परिणाम सत्रवार विद्यालय योजना, विद्यार्थी विवरण, संस्थापन विवरण, विद्यालय का मानचित्र, संकुल विवरण, कक्षाध्यापक, कक्षा
नायक, संस्था प्रधान कार्यकाल पट्ट, विद्यालय के लक्ष्य, विशिष्ट समारोह के फोटो, अभिभावक समिति,छात्र कल्याण परिषद, पर्यवेक्षण योजना सहित शिविरा पंचाग, विद्यालय की आवश्यकताएँ उपलब्धियाँ
एवं सम्मान पट्ट आदि।
10.छात्र कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं प्रभावी क्रियान्वयन
11.सभी शैक्षिक सूचनाओं विद्यालय योजना को लघु रूप में तैयार कर अपनी टेबल पर लगाना।
12.विद्यालय के गेट (दरवाजे) पर विद्यालय नाम बोर्ड सुन्दर व आकर्षक बनवाकर लगवाना।
13. विद्यालय की सामने दीवार पर मध्य में विद्यालय का नाम सुन्दर व आकर्षक रूप से लिखना।
14. सर्व शिक्षा अभियान S.S.A. का रिकॉर्ड संधारण नियमानुसार ।
15. R.M.S.A.का रिकॉर्ड संधारण नियमानुसार ।
16. P.TA. का गठन व प्रभावी सहयोग प्रत्येक सत्रानुसार
17.विद्यालय विकास कोष का सहयोग प्रत्येक सत्रानुसार नवीनीकरण
18. S.M.C. का गठन व प्रभावी सहयोग ।

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा (जनवरी 2014 मे प्रकाशित)

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