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Guidelines for Headmasters : Store Purchase Rules

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संस्थाप्रधान मार्गदर्शिका : भण्डार क्रय नियम

पार्ट-7

भण्डार

भण्डार शब्द का आशय उन सभी वस्तुओं एवं सामग्री से है जो सरकारी उपयोग के लिए खरीदी जाती है या
अर्जित की जाती है। इसमें उपभोग योग्य (कन्ज्यूमेबल) सामग्री, संयत्र, मशीनरी, उपकरण, फर्नीचर, औजार आदि शामिल है, लेकिन इसमें पुस्तकें पत्रिकाएँ आदि शामिल नहीं है। (नियम-1)

क्रय की सामान्य शर्ते

1. खरीद अत्याधिक मितव्ययी ढंग से सार्वजनिक सेवा की निश्चित् आवश्यकता के लिए कीजिए।
2. न तो टुकड़ों में सामान खरीदे न ही उच्च अधिकारियों की स्वीकृति से बचने के लिए क्रय आदेश को विभाजित करें।।
3. यदि खरीद लाभप्रद सिद्ध न हो तो वास्तविक आवश्यकता से अधिक सामग्री न खरीदें, ऐसा करने से पूँजी अवरूद्ध होती है।
4. जहाँ उपयोग हेतु भण्डार की सीमा या मापदण्ड निर्धारित है वहाँ अधिक क्रय न करें।
5. जहाँ क्रय के लिए छूट मिलती है वहाँ क्रय उस अवधि में करे जब यह छूट मिले।
6. क्रय हेतु बजट प्रावधान होना आवश्यक है।
7. यदि किसी फर्म की निविदा किसी विभाग द्वारा स्वीकृत कर ली गई हो तो अन्य विभाग को क्रय आदेश उस निविदा के आधार पर नहीं देना चाहिए। लेकिन एक ही विभाग की अनुमोदित दर पर ऐसा आदेश दिया जा सकता है। (नियम-64)
8. अपवाद-चिकित्सा विभाग द्वारा स्वीकृत मदों पर पुलिस विभाग क्रय कर सकता है।
9. सामान्य तौर पर न्यूनतम दरों पर ही क्रय किया जाना चाहिए।
10. निविदा के अन्तर्गत उन्हीं फर्म से क्रय किया जाएगा जो बिक्री विभाग से पंजीकृत है। (नियम-64)
11. सामग्री क्रय हेतु उसकी वास्तविक माँग होनी चाहिए।
12. न्यूनतम दर से अधिक दर पर भी क्रय करने का प्रावधान है परन्तु इसके कारण अभिलिखित किए जाने चाहिए एवं दर न्यायोचित होनी चाहिए।

निविदा सूचना

खुली निविदा सूचना में दी जाने वाली बातें
1. कार्यालय का नाम एवं निविदा संख्या।
2. सामान का स्पेशिफिकेशन, आकार, पेटेन्ट, गुणवत्ता, आई एस आई संख्या, एगमार्क,
प्रमाणन संख्या। जी.एस.एम., वजन, किस्म आदि।
3. वस्तुओं की आपूर्ति अवधि।
4. अनुमानित मात्रा में राशि।
5. निविदा-पत्र की लागत, चुकारे का तरीका तथा कार्यालय जहाँ से निविदा प्राप्त होगी।
6. निविदा की अवधि।
7. खोलने की तारीख, समय तथा स्थान जहाँ निविदाएँ जमा होगी तथा कारण बताये बिना रदद
करने का प्रावधान।
8. धरोहर (ई.एम.डी.) राशि (2 प्रतिशत) इसके बिना निविदा स्वीकृत नहीं होगी, लघु उद्योग इकाइयों को छूट। एस.एस.आई. यूनिट्स के लिए 0.5 प्रतिशत प्रभावी है।
9. सुपुर्दगी की अवधि तथा स्थान एवं भुगतान की शर्त।
10. मूल्य अधिमान यदि कोई हो।
11. केवल लघु व कुटीर उद्योग से क्रय का आरक्षण का तथ्य, यदि वस्तुएँ आरक्षित है।

निविदा के प्रकार

1. खुली निविदा - यदि निविदा की राशि 1,00,000/- रु. से अधिक हो।
2. सीमित निविदा - यदि निविदा की राशि 3000/-रु. से अधिक तथा 1,00,000/- रु. तक हो।
3. छोटा आदेश - यदि क्रय मूल्य 3000/- रु. तक का हो। निविदा लेना आवश्यक नहीं। (नियम-39)

खुली निविदा के लिए समय सीमा

1. 1,50,000 से अधिक किन्तु रु. 5,00,000 तक- 10 दिन
2. 5,00,000 से अधिक किन्तु रु. 10,00,000 तक- 15 दिन
3. 10,00,000 से ऊपर 30 दिन

अवधि अखबार में छपने की तिथि से गिनी जाएगी। तिथि आगे बढ़ाने पर भी सूचना प्रकाशित की जाएगी।
(नियम-40)
विभागाध्यक्ष को उक्त अवधि आधी करने की शक्तियाँ प्रदत्त है। अल्पकालिन निविदा के लिए।

अल्प अवधि निविदा

अत्यावश्यक परिस्थितियों में (लिखित में) विभागीय क्रय समिति अथवा विभागाध्यक्ष के स्तर की क्रय समिति खुली विज्ञापन की अवधि निम्न प्रकार से होती है। देरी से प्राप्त होने वाली निविदाओं पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
30 दिन की अवधि को घटाकर 20 दिन
15 दिन की अवधि को घटाकर 10 दिन

निविदा का प्रकाशन

राजस्थान में निर्मित वस्तुओं की खरीद के लिए निविदा का प्रकाशन राज्य के स्थानीय समाचार पत्रों में करवाया जाएगा। यदि निविदा का मूल्य 5 लाख रूपये से अधिक हो तो निविदा महानिदेशक (वाणिज्यिक एवं अधिसूचना), भारत सरकार द्वारा प्रकाशित भारतीय व्यापार पत्रिका में प्रकाशित कराई जाएगी। (नियम-4)।
निविदा राशि रू. 50,000 से अधिक होने पर भी खुली निविदा के स्थान पर सीमित निविदा निम्न परिस्थितियों में संभव है-
1. जब पर्याप्त कारणों से यह न्यायोचित प्रतीत होता है कि विज्ञापन द्वारा निविदाएं आमन्त्रित करना जन हित में नही है।
2. जब सामान की खरीद की मांग उतनी आवश्यक हो कि कोई अतिरिक्त व्यय करना उचित नहीं है।
3. जब आपूर्ति के स्त्रोत निश्चित तौर पर मालूम है तथा अन्य स्त्रोत का पता लगाने की आशा क्षीण हो।
4. जब निविदा दो बार मांगने पर भी प्राप्त नहीं होती हो। कारण, परिस्थिति अंकित करते हुए सक्षम अधिकारी की। स्वीकृति लेनी आवश्यक है। (नियम 38)

निविदा पत्र की लागत।

रुपये 50,000/- तक। कोई कीमत नही।

रुपये 50,001/- से तथा 10 लाख रुपये तक -रु.200/-

रुपये 10 लाख से अधिक। रु .400/-

अगर निविदा प्रपत्र की तैयारी में उक्त सीमा से अधिक व्यय आता है तो वास्तविक व्यय की राशि निविदा प्रपत्र का शुल्क रखा जाएगा।
राजस्थान को एस एस. आई इकाइयों को प्रमाण पत्र के आधार पर निःशुल्क निविदा प्रपत्र दिया जाएगा।

प्रतिभूति निक्षेप

1. लघु औद्योगिक इकाइयों यदि वे मूल्य अधिमानता नियम के अन्तर्गत जारी किए गए सक्षमता प्रमाण पत्र
जिन सामानों के लिए वे पंजीकृत है, उनके संबंध में निदेशक, उद्योग विभाग द्वारा जारी पंजीयन की
प्रति प्रस्तुत करें।
2. सरकारी उपक्रम निगम एवं कम्पनियां।
(i) धरोहर राशि 5 प्रतिशत
(ii) बिन्दु संख्या एक की संस्थाओं से धरोहर राशि 1 प्रतिशत ली जाएगी।

प्रतिभूति निक्षेप का स्वरूप

प्रतिभूति निक्षेप केवल नकद या डिमाण्ड ड्राफ्ट या बेंकर्स चैक या चालान की रसीद प्राप्ति के रूप में स्वीकारी जाएगी।

धरोहर राशि/प्रतिभूति निक्षेप का प्रदाय

1. असफल निविदा दाताओं की ई.एम.डी. राशि निविदा स्वीकृति के तुरन्त पश्चात लौटा दी जाएगी।
2. प्रतिभूति राशि की वापसी एक मुश्त क्रय में आपूर्ति के पूरा हो जाने के एक माह के भीतर तथा आपूर्ति विभाजित है तो अन्तिम आपूर्ति दो माह के भीतर कर दी जाएगी। गारन्टी/वारन्टी की शर्त होने पर उस निर्धारित अवधि के समाप्ति के बाद लौटाई जाएगी।

घरोहर राशि जब्त करना

1. निविदाकार द्वारा प्रस्ताव को निविदा स्वीकार करने से पहले वापस/संशोधित करना।
2 अनुबन्ध को निर्धारित समय में क्रियान्विति नहीं करना।
3. आपूर्ति आरम्भ नही करना।
4. आदेश के पश्चात् प्रतिभूति राशि जमा नहीं करवाने पर।

प्रतिभूति निक्षेप जमा करना

1. अनुबन्ध की किसी शर्त का उल्लंघन करने पर।
2. संतोषजनक आपूर्ति नहीं करने पर।
जब्त करने से पूर्व आपूर्तिकर्ता को नोटिस देना होगा। आपूर्ति नहीं करने पर केवल ई.एम.डी. राशि को ही
जब्त किया जाएगा। (नियम-57)

सीमित निविदा
(क) सीमित निविदा निम्न से ली जाएगी- लघु कुटीर उद्योग की इकाइयों से थोक विक्रेता -उत्पादक -निर्माता-सोल वितरक/सोल विक्रय/ विपणन
एजेन्ट-उप वितरक-अधिकृत डीलर-निर्माताओं की रिटेल दुकान, अधिकृत स्टाकिस्ट-विश्वसनीय रिटेल विक्रेता।
(ख) प्रतिस्पर्धी दरों की प्राप्ति के लिए पर्याप्त फर्मों को निविदा सूचना दी जाएगी।
(ग) निदेशक, उद्योग विभाग, राजस्थान की लघु औद्योगिक इकाइयों की सूची उपलब्ध कराएंगे।
(घ) मोटर गाडियों मशीनों एवं रुपये 5000/- से अधिक मूल्य के उपकरणों की खरीद के मामलों में सीमित निविदाएँ प्राधिकृत डीलरों एवं मूल उपकरण प्रदानकर्ताओं से आमंत्रित की जाएगी।
(ड) निविदा के लिए न्यूनतम अवधि तीन दिन की होगी जो कि आवश्यकता पड़ने पर कम भी की जा सकती है। (नियम-42)

बिना निविदा के क्रय

निम्न मामलों में बिना निविदा के क्रय किया जा सकता है -
1. केन्द्रीय स्टोर क्रय संगठन, वित्त विभाग द्वारा चुनी गई वस्तुओं के दर अनुबन्ध क्रय अनिवार्य।
2. महानिदेशक, आपूर्ति तथा निबटान, भारत सरकार द्वारा दर अनुबन्धन पर उपलब्ध वस्तुओं का क्रय।।
(क) उपर्यक्त दोनो संगठन की केन्द्रीयकत सूची डी.जी.एस. एण्ड डी. का आईटम खरीदने पर दर अनुबन्ध नहीं होने पर संगठन से अनुपलब्धता प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होगा। (नियम-34)
(ख) डी.जी.एस. एण्ड डी. की उसी चीज का यदि दर अनुबन्ध राजस्थान में तथा राजस्थान से बाहर होने पर प्राथमिकता राजस्थान निर्माता/फर्म को दी जाएगी। (नियम-35)
3. राजस्थान लघु उद्योग नियम से निम्न चीजें पीतल के बर्तन, हाथ के छपे या हाथ बुने, सज्जा के वस्त्र, नेपकिन, पर्द, टेपेस्ट्री जो वर्ष भर में रुपये 25,000/- से अधिक का ना हो तथा एक बार रुपये 5,000/- से अधिक ना हो।
4. टायर/ट्यूब, मोटर गेरेज के समकक्ष कीमत पर यदि मोटर गेरेज पर उपलब्ध नहीं है या उस जगह पर मोटर गेरेज की कोई इकाई नहीं है। तब भी या तो डी.जी.एस.एण्ड डी. दर संविदा पर अथवा खुली निविदा से क्रय किया जाएगा।
5. राष्ट्रीय कपडा निगम, नेशनल हेण्डलूम निगम एवं राजस्थान बुनकर संघ से कपड़ा, डस्टर, बस्ता, मेजपोस, तोलिये, नेपकिन्स, चादरें आदि।
6. खादी भण्डार से कपडे, दरी, पर्दे का कपडा, कम्बल, टेपेस्ट्री, डस्टर बस्ता नेपकीन, मेजपोस, साफा, गरम कोट, चादरें तथा राष्ट्रीय झंडा।
7. भारत सरकार तथा अन्य राज्यों के हेण्डलूम की दुकानों से रु. 5000/- प्रति वर्ष तक की साज-सज्जा की वस्तुएँ।
8. जेल विभाग द्वारा निर्मित वस्तुएँ।
9. सहकारी उपभोक्ता भंडार से स्टेशनरी आइटम एक बार में 10 हजार रुपये तक एवं एक वर्ष में 50 हजार रुपये तक क्रय कर सकेंगे।
10. सहकारी उपभोक्ता भंडार से संस्था के उपयोग की अन्य सामग्री भी उपयुक्त सीमा तक क्रय कर सकेंगे।

क्रय समितियाँ

1. रुपये 10 लाख से अधिक क्रय हेतु क्रय समिति का गठन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा, जिसमें कम से कम तीन सदस्य होंगे। लेखा सेवा का वरिष्ठतम सदस्य अनिवार्य रूप से उक्त समिति का अध्यक्ष होगा तथा अन्य तकनीकी अधिकारी होगा। तकनीकी प्रकरणों में विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाएगा।
2. रुपये 10 लाख की खरीद तक के लिए विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय कार्यालय एवं कार्यालयाध्यक्ष के स्तर पर क्रय समितियाँ होगी। जिसमें न्यूनतम संख्या तीन होगी। इन तीन सदस्यों में से एक विभागाध्यक्ष/क्षेत्रीय अधिकारी/कार्यालयाध्यक्ष होगा जो पीठासीन अधिकारी होगा। दूसरा सदस्य विभाग/क्षेत्रीय कार्यालय/ अधीनस्थ कार्यालय की लेखा सेवा का वरिष्ठतम अधिकारी होगा। तीसरा सदस्य पीठासीन अधिकारी मनोनीत किया जाएगा। क्रय समिति की बैठक तब तक आयोजित नहीं की जाएगी जब तक कि लेखा का सदस्य उपस्थित न हो। (नियम-50)

क्रय समिति की शक्तियाँ

1. क्रय समिति निविदाओं का अनुमोदन करेगी। लेखा सदस्य की असहमति पर अगली उच्चतर क्रय समिति द्वारा विचार किया जायेगा। वहाँ भी असहमति होने पर वित्त विभाग द्वारा विचार किया जाएगा।
2. विभागीय क्रय समिति जहाँ भी आवश्यकता हो न्यूनतम दरों पर एक से अधिक फर्म से क्रय की स्वीकृति दे सकेगी।
3. विभागीय क्रय समिति तथा विभागाध्यक्ष के स्तर की क्रय समिति कारण अंकित करके न्यूनतम दर के अतिरिक्त दर भी स्वीकृत कर सकेगी।
4. प्रादेशिक स्तर की क्रय समिति न्यूनतम दरों के क्रय को अगली उच्च समिति को प्रस्तुत करेगी।
5. एक ही निविदा प्राप्त होने पर अगली उच्च क्रय समिति कारण लिखने के पश्चात् स्वीकृति देगी अथवा पुनः निविदा माँगने का आदेश देगी। विभागीय क्रय समिति स्वयं निर्णयकर सकेगी।
6. यदि समिति समुचित दरों के बारे में आश्वस्त है तो विस्तृत प्रकाशन के पश्चात् भी तीन से कम निविदाएँ प्राप्त होने पर यह आवश्यक नहीं की निविदा पुनः माँगी जाए। (नियम-55)
7. राज्य सरकार द्वारा गठित विभागीय समिति किसी विशेष में या ब्राण्ड का क्रय कारण अंकित करते हुए कर सकती है। (नियम-30)

पुनः आदेश

पूर्व में क्रय की तादाद के आदेश को 5 प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है आपूर्ति दर घटी न हो। (नियम-60)

पुनः निविदा मांगना

निविदाएँ काफी विचार करके ही पुनः मांगी जानी चाहिए, जहाँ आवश्यक हो कारण अंकित करें। हानि होने पर नियम-20 के अन्तर्गत उच्चधिकारियों को रिपोर्ट करें। (नियम-61)

बातचीत (नेगोसिएशन)

बातचीत अपवादनात्मक विशेष परिस्थितियों में की जाएगी। बातचीत का उद्देश्य सभी निविदा दाताओं को या दरें कम करने के लिए या शर्तों के बारे में स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए अवसर प्रदान करना है। (नियम-59)

निविदाओं से पहले बातचीत-जब भण्डार की वस्तुएँ

1. स्वामित्व प्रकृति की हों,
2. वस्तुओं की आपूर्ति कम होने पर,
3. छोटे आदेश के अन्तर्गत क्रय,
4. बिना निविदा के क्रय (नियम-59क)।

निविदा के पश्चात् बातचीत

निविदाएँ खोलने के पश्चात् निम्न मामलो में बातचीत की जा सकती है ।

1. जहाँ रिंग प्राइसेज उद्धत की गई हों।
2. जहाँ एक निर्मिता के उत्पादों/ब्राण्डों को सभी
निविदादाताओं द्वारा प्रस्तावित किया गया हो।
3. जहाँ दरे बाजार दरों के अनुपात में भिन्न हों।
4. जहाँ स्वीकार्य प्रस्ताव की संख्या 3 से कम हो तथा उस चीज का क्रय पूर्व में नहीं किया गया हो।
5. राजस्थान एस.एस.आई. की ईकाईयों से बाहर के फर्म/इकाइयों की दरों की तुलना में न्यूनतम दर पर
आपूर्ति कने की स्वीकृति देने हेतु। रुपये 5000/- से अधिक के मूल्य के पुर्जे अभिकृत डीलर से क्रय किए
जाने पर (नियम 59-2 "ख")

बातचीत की शक्ति

क्रय समिति को बातचीत करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त होगी, कार्यवाही विवरण में बातचीत के कारणों तथा
परिणामों का अभिलिखित किया जाएगा। (नियम 59-2 (ग)

बातचीत की प्रक्रिया

समस्त निविदाकारों के साथ बातचीत करनी चाहिए। बाहर के निविदाकारों को न्यूनतम 7 दिन का समय देते हुए पंजीकृत पत्र द्वारा तथा स्थानीय निविदाकारों को 3 दिन के समय के साथ सूचना दीजिए। क्रय समिति इस अवधि को कम कर सकती है। यदि सूचना सबको मिल जाए। (नियम 59-3)

Note- संस्था-प्रधान मार्गदर्शिका (मा.वि. / उ.मा.वि. हेतु) 2014 राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवम प्रशिक्षण संस्थान , उदयपुर (राजस्थान) -313001 द्वारा प्रकाशित।

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