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दसवे भाव में बृहस्पति (गुरु) का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

दसवें भाव मे मंगल होने से जातक दाता, होश्यिार, किफायती, लोक पूजित होगा। दसवे भाव में बृहस्पति के जातक क्रियाशील, अजेय, संयमी, महान पुरुषों की सेवा करने वाली तथा बहुत प्रतापी होगा। दसवें भाव मे जातक जन्मभूमि से दूर रहने वाली होगा। विशेष भाग्यवान् होगा। जातक श्रेष्ठपुत्रों वाली, पुत्र सुख युक्त होगा। वह व्यापार में प्रवीण होगा। 18 वें वर्ष में व्यापार में या राजा की कृपा से या साहस से धन प्राप्त करेगी।

दसवे भाव में बृहस्पति (गुरु) का फल

दसवे भाव में बृहस्पति का शुभ फल (Positive Results of Guru in 10th House in Astrology)

  • दशम भाव में बृहस्पति (Guru in 10th House) अत्यन्त शुभ माना जाता है। दसवें स्थान में मंगल बलवान् माना जाता है क्योंकि दसवां स्थान दक्षिण है और मंगल दक्षिण दिशा का स्वामी होता है।
  • दसवें भाव मे मंगल होने से जातक कुलदीपक होगा- "दशमेंऽगारको यस्य सजात: कुलदीपक:" दशम भावस्थ मंगल के प्रभाव में उत्पन्न होने से जातक अपने पराक्रम से, अपने भुजवलार्जित धन से तथा अन्य स्थावर जंगम संपत्ति से, अपने कुल को उजागर अर्थात् प्रसिद्ध कर देगी। कुल की उद्धारक होगा।
  • जातक तेजस्वी, नीरोग, मजबूत शरीर की होगा। जातक अपने प्रताप से सिंह के समान पूर्ण पराक्रमी तथा शूर होगा।
  • दशम भाव में बृहस्पति के जातक संतुष्ट-परोपकारी, उत्साह युक्त तथा राजा के समान पराक्रमी होगा।
  • जातक शुभकर्म कर्ता-कल्याण युक्त, साहसी तथा स्वाभिमानी होगा। दशम में मंगल होने से जातक दाता, होश्यिार, किफायती, लोक पूजित होगा।
  • दसवे भाव में बृहस्पति के जातक क्रियाशील, अजेय, संयमी, महान पुरुषों की सेवा करने वाली तथा बहुत प्रतापी होगा। ध्यान-धारणा करेगी तथा शीलवान्, गुरु की भक्त होगा। सर्वथा सामर्थ्यवान् होगा। ब्राह्मणों की तथा बड़े बूढ़ों की भक्त होगा। मंगल कार्यकारी मंगल दशमभाव में होने से जातक के कुल में विवाह आदि मंगलकार्य होते रहेंगे।
  • जातक के काम स्वत: सिद्ध अर्थात् बहुत प्रयास के बिना भी-अपने थोड़े से उद्यमद्वारा सिद्ध हो जायेंगे। निरंतर सब कार्यों में सफलता प्राप्त होगा।
  • दशमस्थ मंगल के
    शुभ प्रभाव में जन्म होने से जातक स्वयं स्वपराक्रम से, स्वभुजबल से, उन्नत होगा जिन्हें अंगरेजी में 'सैल्फमेड' कहा जाता है। मंगल के प्रभाव से समाज में यश और सम्मान प्राप्त होगा। बड़े मुख्य आदमी भी जातक की प्रशंसा करेंगे। लोकप्रिय होगा। प्रचुर धन लाभ करेगी, सुख के साधनों की कमी नहीं रहेगी, विलासितापूर्ण जीवन जीया करेगी। भूमि-भृत्य-ग्राम और राजकुल से धन प्राप्त होगा। ऐश्वर्य तथा प्रताप में राजा के समान, सुन्दर भूषण-मणि आदि विधि रत्नों को प्राप्त करने वाली होगा। उत्तम-वाहनों से सुखी, वाहन का सुख प्राप्त होगा।
  • दसवे भाव में बृहस्पति के जातक के पास नौकर चाकर बहुत होंगे। जन्मभूमि से दूर रहने वाली होगा। विशेष भाग्यवान् होगा। जातक श्रेष्ठपुत्रों वाली, पुत्र सुख युक्त होगा। वह व्यापार में प्रवीण होगा। 18 वें वर्ष में व्यापार में या राजा की कृपा से या साहस से धन प्राप्त करेगी। किसी बैंक अथवा संस्था की चालक हो सकती है। जमीन पर उपजीविका करने वाली होगा। अग्नि संबन्धी कार्यों से
    या शस्त्रों के काम से धन कमायेगी। 26 वें वर्ष से कुछ भाग्योदय होगा। 36 वें वर्ष में स्थिरता प्राप्त होगा। वकीलों के लिए भी यह योग अच्छा है। फौजदारी मुकदमों में अच्छा यश मिलेगा। नौकरी में बड़े अफसरों से झगड़ें होते हैं।
  • दसवे भाव में बृहस्पति को नास्ति सजात: कि करिष्यति" जन्मकाल में मंगल दशमस्थान में यदि नहीं होता है तो मनुष्य का जीवन अत्यन्त साधारण बीतता है। हीनकुल में उत्पन्न होकर भी जातक दशमभावस्थ मंगल के शुभ प्रभाव से लोगों में अग्रणी तथा उनकी नेता हो जायेगी। शुभफलों का अनुभव मेष, सिंह, धनु, कर्क, वृश्चिक तथा मीन में संभव है। मंगल शुभ संबन्ध में होने से धैर्यशाली और बहादुर होगा। शुभग्रह के साथ या उसकी राशि में होने से काम सफल होते हैं, कीर्ति तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।      
  • दशमस्थान का स्वामी बलवान् हो तो भाई दीर्घायु होता है। भाग्य और कर्मस्थान के अधिपति भी मंगल के साथ दशम में ही हों तो राजयोग होता
    है। फलत: राजकुमारी-पट्टाभिषिक्त महारानी हो सकती है। पुरुषराशि लग्न में हो तो विनायत्न भी उन्नति होती है और कीर्ति मिलती है।

दसवे भाव में बृहस्पति का अशुभ फल (Negative Results of Guru in 10th House in Astrology)

  • दसवे भाव में बृहस्पति (Guru in 10th House) के जातक क्रूर, दुष्ट, कुकर्मी, दुराचारी नीचसंगी होगा। जातक अभिमानी, उतावला स्वभाव, लोभी होगा। वृत्ति पाशवी होगा। बुद्धि चोर जैसी और आचरण बुरा होगा। धन होकर खर्च हो जायेगा। कभी फायदा कभी नुकसान होगा। सुख और दु: दोनों मिलेंगे-स्थिरता नहीं होगा। सन्तानों की ओर से विशेष सुख नहीं मिलेगा।
  • दशम भाव में बृहस्पति होने से जातक के पुत्र अच्छे नहीं होंगे।
  • दशम में मंगल होने से मामा का तत्काल नाश होगा।
  • दसवे भाव में बृहस्पति के जातक किसी की दत्तक पुत्र हो सकती है। पुत्र मृत्यु हो सकती है। समाज में कीर्ति नहीं प्राप्त होगा।