Categories: Astrology
| On 2 weeks ago

तीसरे भाव में बृहस्पति (गुरु) का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

तीसरे भाव में गुरु होने से जातिका तेजस्वी-काम करने में विचारशील ,चतुर, धनी सुख से संपन्न, धार्मिक, आस्तिक होती है l गुरु के तृतीय भाव में जातिका को सगे इसे भाई-बहनों और कुटुंब का सुख मिलता है l तीसरे भाव में भृस्पति के होने से जातक सफल व्यापारी बन काफी धन एकत्रित करता है।

गुरु जहां भी बैठे होते है वो उस भाव को और विस्तार कर देते है। तीसरे भाव में गुरु (Tisre Bhav me Brihaspati) होने से व्यक्ति सेल्स, मार्केटिंग और बिज़नेस में व्यक्ति विशेष रूप से धन एकत्रित करता है। ज्योतिष में तीसरे घर में बृहस्पति भाई-बहनों के साथ एक अच्छा रिश्ता देता है। इस व्यक्ति को भाई-बहनों से भी बहुत मदद मिल सकती है। तृतीय भाव में बृहस्पति व्यक्ति में धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों को प्रोत्साहित करता है।

तीसरे भाव में बृहस्पति (गुरु) का फल

तीसरे भाव में बृहस्पति (गुरु) का शुभ फल (Positive Results of Jupiter in 3rd House in Hindi)

  • तीसरे स्थान में स्थित बृहस्पति (Jupiter in 3rd House) के कारण जातिका साहस संपन्न, बलवान् होती है। गुरु धार्मिक और आध्यात्मिक वृत्ति का पोषक है, जातिका विचारशील और बुद्धिमान् होती है। जितेन्द्रिय, आस्तिक, शास्त्रज्ञ, अनेक प्रकार के धार्मिक कृत्य सम्पादित करने वाली होती है।
  • तीसरे भाव में गुरु होने से जातिका तेजस्वी-काम करने में चतुर होती है, जिस काम का संकल्प करती है उसमें सफलता मिलती है। प्रवासी, पर्यटनशील एवं तीर्थ यात्राएँ करने वाली होती है।
  • गुरु के तृतीय भाव में जातिका को सगे इसे भाई-बहनों और कुटुंब का सुख मिलता है। तीन या पांच भाई बहन होते हैं। सर्वदा अपने भाइयों का उत्तमसुख और कल्याण करने वाली होती है।
  • तृतीय स्थान में जातिका का भाई प्रतिष्ठित व्यक्ति होता है। मित्र तथा आप्तजनों के सुख से संपन्न होती है। पति के साथ प्रेम होता है। राजा द्वारा सम्मानित होती है। सैकड़ों लोगों की स्वामी होती है।
  • तीसरे भाव में बृहस्पति होने पर जातिका की बुद्धि अच्छी होती है। लेखन से लाभ होता है। आप्तों से इसे धन लाभ होता है। गुरु अग्नितत्व की राशियों में होने से संसार में विजय मिलती है।  
  • धनु या मीन में गुरु होने से भ्रातृसुख विशेष मिलता है। तृतीयेश बलवान् होने से भाई दीर्घायु होता है। तृतीय स्थान
    का गुरु पुरुष राशि में होने से तीन भाई तक संभव हैं। 'सैंकड़ों लोगों का स्वामी होता है" ऐसा यवनमत है, ऐसे फल का अनुभव पुरुष राशियों में संभव है।

तीसरे भाव में बृहस्पति (गुरु) का अशुभ फल ( Negative Results of Jupiter in 3rd House in Hindi)

  • तीसरे स्थान में बृहस्पति (Jupiter in 3rd House) होने से बहुत क्षुद्र होती है। नीच प्रकृति की होती है।
  • तीसरे भाव में गुरु होने के कारण जातिका कृतघ्न होती है, किसी के उपकार को मानने वाली नहीं होती। जातिका सज्जन नहीं होता- उदासीन, और आलसी होती है।
  • तृतीय भावस्थ गुरु की जातिका कृपण अर्थात् अदाता और कंजूस होती है। लोक में अपमानित, पापी और दुष्ट बुद्धि होती है।
  • तीसरे स्थान पर बैठा बृहस्पति जातिका को धनहीन, विलासी, परदाराप्रिय बनाता है। मित्रों के साथ मित्रों जैसा व्यवहार नहीं करती, अर्थात् यह विश्वसनीय मित्र नहीं होती। भाग्योदय होने पर भी संतोषजनक द्रव्योपलब्धि नहीं होती है। परन्तु राजा के घर में प्रसिद्धि पाकर भी स्वयं सुख भोगने वाली नहीं होती। पुरूष से पराजित होती है। पति तथा पुत्रों और मित्रों से प्रेम नहीं होता है। भूख नहीं लगती है और यह दुर्बल होती है। अग्निमन्दता या मन्दाग्नि रहती है।
  • तीसरे भाव में गुरु होने से जातिका के शत्रु बढ़ते हैं, धन का क्षय होता है। तृतीय भावगत गुरु भाइयों की एकसाथ प्रगति में रुकावट डालता
    है-सभी एकसाथ प्रगतिशील नहीं होंगे। कोई एक निठल्ला अवश्य ही बैठेगा और कुछ उपयोगी न होगा। इस परिस्थिति में पृथकत्व अच्छा रहेगा। युक्तिवाद करती है और मत बदलती रहती है। कू्ररग्रह की दृष्टि होने से भाइयों पर विपत्ति आती है। क्रूर और शत्रुग्रहों की दृष्टि होने से भाइयों का सुख कम मिलता है।    
  • तृतीय स्थान का गुरु पुरुष राशि में होने से बड़े भाई होते हैं परन्तु बड़ी बहिनें नहीं होतीं है l पुरुष राशि में तृतीय स्थान का गुरु शिक्षा के लिये अशुभ है, शिक्षा पूरी नहीं होती है।  तृतीय स्थान का गुरु पुरुष राशि में होने से उपजीविका नौकरी द्वारा होती है पहिला चला हुआ स्वतंत्र व्यवसाय भी बंद करना होता है और नौकरी करनी होती है।
Tags: GuruJupiter