हंबनटोटा पोर्ट | आपको इसका महत्व जान लेना चाहिए

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“चीनी जासूसी शिप युआन वांग-5, 13 जुलाई को जियानगिन पोर्ट से रवाना हुआ था और जल्द ही श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचेगा। हंबनटोटा में यह एक हफ्ते तक रहेगा।”

उपरोक्त समाचार अनेक दैनिक समाचार पत्रों व सोशल मीडिया में चर्चा पर है। इस पोर्ट अर्थात बन्दरगाह व इस पर एक सप्ताह तक रुकने वाले शिप युआन वांग-5 से हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है? यह समझने की बात है।

हमारी सेहत पर असर डालने वाले मुख्य बिंदु निम्नानुसार है-

  • यह हंबनटोटा पोर्ट श्रीलंका में है तथा श्रीलंका हमारा अतिनिकट पड़ोसी है।
  • युआन वांग-5 नामक शिप एक चीनी शिप है तथा इसको जासूसी में महारत हासिल है।
  • भारत ने श्रीलंका के सामने इस शिप को नही आने देनेके लिए कहा था तथा भारत के कहने से श्रीलंका मान भी गया था।
  • नए समाचार के अनुसार अब यह शिप भारत के विरोध के बावजूद 16 अगस्त 2022 को इस पोर्ट पर आएगा तथा 6 दिन तक डेरा डालेगा।
  • यह अत्याधुनिक शिप 750 किलोमीटर तक की जासूसी कर सकता है। भर्तनके कई प्रमुख नोसेनिक ठिकाने व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान इसके दायरे में रहेंगे।

अब आप समझ ही चुके है कि यह घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइये, अब हम इस घटनाक्रम से जुड़े हर तथ्य को समझने का प्रयास करेंगे।

हंबनटोटा पोर्ट

हंबनटोटा अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह, हंबनटोटा, श्रीलंका में एक गहरे पानी का बंदरगाह है। यह 18 नवंबर 2010 को खोला गया था और कोलंबो बंदरगाह के बाद श्रीलंका का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है। इसका निर्माण 2008 में आरम्भ हुआ था। इस पोर्ट को चीन ने श्रीलंका से 99 वर्ष की लीज पर लिया हुआ है। हंबनटोटा बंदरगाह श्रीलंका के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। हंबनटोटा पोर्ट से तमिलनाडु के कन्याकुमारी की दूरी करीब 451 किलोमीटर है। जासूसी के खतरे को देखते हुए ही भारत श्रीलंका से इस शिप को हंबनटोटा में एंट्री न देने को कहा था।

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हंबनटोटा पोर्ट, श्रीलंका

एक चीनी कंपनी के पास हंबनटोटा बंदरगाह का प्रभार है, लेकिन नेविगेशन और परिचालन संबंधी मामले श्रीलंका खुद नियंत्रित कर रहा है। ऐसा बताया जाता है कि बंदरगाह के निर्माण और इसके लिए चीन ने लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किया है।

इसको बनाने में चीन हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (सीईसी) और चीन हाइड्रो कॉर्पोरेशन नाम की सरकारी कंपनियों ने एक साथ मिलकर काम किया था।

युआन वांग 5

युआन वांग 5 चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज है। चीन में जियांगन शिपयार्ड में निर्मित युआन वांग 5 ने 2007 में सेवा में प्रवेश किया। चीन द्वारा इसे एक शोध पोत (जो कि रिसर्च कार्य करता हो) कहा जाता है जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह एक ट्रैकिंग जहाज है जो जासूसी कर सकता है। इसमें ट्रांसोसेनिक एयरोस्पेस ऑब्जर्वेशन के लिए अत्याधुनिक ट्रैकिंग तकनीक ऑनबोर्ड है। कम से कम 222 मीटर लंबा और 25.2 मीटर चौडे युआन वांग 5 में अंतरिक्ष और उपग्रह ट्रैकिंग क्षमता शामिल है। ये जहाज टॉप-ऑफ-द-लाइन एंटेना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस हैं, जो मिसाइल और रॉकेटों के लॉन्च और सर्विलांस का सपोर्ट करता हैं।

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भारत के लिए विचारणीय विषय

युआन वांग 5 की निगरानी सीमा लगभग 700 से 750 किमी है, जिसका अर्थ है कि यह समुंद्री जहाज भारत की जासूसी कर सकता है। हंबनटोटा पोर्ट पर युआन वांग 5 श्रीहरिकोटा में इसरो उपग्रह बेस और कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र तक निगरानी कर सकता है। यह कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कलपक्कम में परमाणु ऊर्जा संयंत्र, दक्षिणी भारत के छह नौसैनिक बंदरगाहों और कोच्चि में दक्षिणी नौसैनिक कमान की भी जासूसी कर सकता है। इंडो-पैसिफिक के आसपास की भू-राजनीति पर बारीकी से नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह हिंद महासागर पर हावी होने की चीन की योजना का हिस्सा है।

  • भारत ने हाल ही में श्रीलंका सरकार की संकट में महत्वपूर्ण मदद की है लेकिन श्रीलंका भारत के अनुसार कार्य नही कर सका है।
  • भारत अनेकानेक बार इस परिक्षेत्र को अपने नियंत्रण में बता चुका है।
  • अमेरिका ने भी चीन के इस कदम पर चिंता जाहिर की है।
  • पाकिस्तान के भी एक पोत के इस क्षेत्र में आने की मीडिया रिपोर्ट्स है।
  • श्रीलंका पहले से ही गहरे आर्थिक संकट में है।

आपकी टिप्पणी

उपरोक्त मुद्दे पर आप गहन अध्ययन कीजिए। आप अपने अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष से स्वयं समझ सकते है कि मामला कितना गहरा व गम्भीर है। यहां हम स्पष्ट करना चाहते है कि हम मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लेख लिखते है।

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