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स्वतंत्रता दिवस हेतु देशभक्ति गीत ( Patriotic Song )

देशभक्ति गीत ( Patriotic Song ) आओ, बच्चों तुम्हें दिखाए झाँकी हिंदुस्तान की । मिट्टी से तिलक करो, यह मिट्टी है बलिदान की । वंदे मातरम ! वन्दे मातरम !! यह महान पंक्तियां 1954 में रिलीज हुई बॉलीवुड की फ़िल्म " जाग्रति " के एक गीत से हैं। इस फ़िल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था एवं संगीतबद्ध हेमन्त कुमार द्वारा किया गया था।

महान कवि प्रदीप द्वारा लिखित इस देशभक्ति गीत को सुनकर समस्त भारतवासी रोमांचित हो जाते है तथा उनके ह्रदय में देशभक्ति के भाव से सरोबार हो जाते है। सम्पूर्ण देश के प्रत्येक जिले के हर ग्राम में देशभक्ति के उदाहरण बतलाते है कि सम्पूर्ण भारत ही वीरो की निवास स्थली है। आइये, "इस मिट्टी से तिलक करो, यह मिट्टी है बलिदान की" नामक देशभक्ति गीत" ( Patriotic Song ) के सन्दर्भ में राजस्थान की कुछ विशेषताओं को देखते है। अगले अंक में अन्य राज्यो के बारे में बात करेंगे।

देशभक्ति गीत (Patriotic Song )

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम …

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की, इस मिट्टी से …

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की इस मिट्टी से …

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम …

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है दक्षिण में चरणों

को धोता सागर का सम्राट है जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की, इस मिट्टी से …

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की इस मिट्टी से …

कवि प्रदीप - देशभक्ति गीतों के महान लेखक | Kavi Pradeep - Great writer of patriotic songs.

कवि प्रदीप की पहचान उनकी सशक्त लेखनी से निकले राष्ट्रप्रेम से सरोबार देशभक्ति गीतों से है। कवि प्रदीप का पूरा नाम रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी था। कवि प्रदीप का 6 फ़रवरी 1915 को उज्जैन, मध्य प्रदेश में हुआ था। कवि प्रदीप का निधन 11 दिसंबर 1998 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ था।

कवि प्रदीप के अत्यंत मशहूर देश भक्ति गीत निम्नानुसार हैं।

  • मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भरलो पानी, जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी ।
  • आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झांकी हिंदुस्तान की। इस मिट्टी को नमन करो, ये मिट्टी है बलिदान की।
  • दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
  • हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के, इस मुल्क को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के।
  • दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा हैं।

उपरोक्त के अलावा आपके अनेक धार्मिक गीत भी बहुत प्रसिद्ध हुए थे। जब तक गीत इस दुनिया मे गाये जाते रहेंगे तब तक कवि प्रदीप के देश भक्ति गीत हिंदुस्तान की सरजमीं पर बुलन्दियों से गाये जाते रहेंगे। शिविरा एवम शिविरा के समस्त पाठकों की तरफ से कवि प्रदीप को सादर नमन व आदरांजलि।

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम 2021 में विद्यालय हेतु देशभक्ति गीत | patriotic song for school in independence day program 2021

" आओ बच्चों तुम्हें दिखाए झाँकी हिंदुस्तान की " जैसे देशभक्ति गीत को विद्यालयों में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम 2021 में अवश्य सम्मिलित करना चाहिए। इस प्रकार के देशभक्ति गीत के माध्यम से बच्चों के बालमन में बचपन से ही देश भक्ति की भावना आ जाती है एवम वह सारा जीवन अपने देश के प्रति प्यार और श्रद्धा के साथ बलिदान की भावना से ओतप्रोत रहते हैं।

वन्दे मातरम एक नारा जो भारत की पहचान बना | Vande Mataram a slogan which became the identity of India.

वन्दे मातरम एक नारे से कहीं बढ़कर हमारे राष्ट्र भारत की पहचान बन चुका है इस नारे ने भारत को स्वतंत्र करवाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस नारे को बोलकर शहीदों ने फांसी के फंदे को चूमकर हँसते हँसते मौत को गले लगाया था। वन्दे मातरम के उच्चारण मातरम से व्यक्ति में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचरण हो जाता है। इस गीत में इस देशभक्ति नारे का सुंदर उपयोग किया गया था। अगले लेख में हम वन्दे मातरम (Vande Matram) नारे की विस्तृत चर्चा करेंगे।

देशभक्ति गीत " आओ बच्चों तुम्हें दिखाए " में राजस्थान का विवरण | Rajasthan symbol of bravery

देशभक्ति गीत " आओ बच्चों तुम्हें दिखाए " में राजस्थान का गुणगान करते हुए कवि प्रदीप ने निम्नानुसार लिखा था कि- 

  • ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे, इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ।
  • ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी , यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की इस मिट्टी से …

कवि प्रदीप ने राजस्थान की शान में बडे सरल व ओजस्वी शब्दो मे राजस्थान के वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप व उदयपुर राजघराने की महारानी पदमनी के त्याग का वर्णन किया हैं। आइये, इसी

संदर्भ में हम राजस्थान व यहाँ के निवासियों के त्याग, बलिदान व शौर्य की संक्षिप्त बात करते हैं।

राजस्थान के शौर्य पर एक दोहा । A couplet ( Doha ) on the bravery of Rajasthan

"केसर न निपजे अठे, न हिरा निपजन्त ।

सिर कटियाँ खग चाँपना, ईण धरती उपजन्त ॥"

इस दोहे का अर्थ यह है कि वीरभूमि राजस्थान में बेशक हीरे ( Diamonds ) व केसर ( Saffron ) का उत्पादन नही होता है लेकिन इस वीर प्रसूता भूमि राजस्थान में ऐसे वीर पैदा होते है जिनके सर कट जाने के बाद भी उनके हाथों से तलवार चलनी रुकती नही हैं। 

राजस्थान पर संक्षिप्त लेख | Brief article on Rajasthan

वीर प्रसूता राजस्थान की दो पहचान है यहाँ की सती सावित्री पुत्रियाँ और यहॉ के धीर-वीर पुत्र। इस धरती पर बेशक धान कम उपजता है लेकिन इस वीर प्रसूता की गोद मे ऐसे वीर वीरांगनाओं ने जन्म लिया है जिनके नाम के स्मरण से ही सैकड़ो तीर्थो की यात्रा का पुण्य प्रप्त हो जाता है।

आजादी मिलने के बाद क्रमशः राज्य का गठबंधन आरम्भ हुआ था जो कि  30 मार्च 1949 तक साकार हुआ, सम्पूर्ण राजस्थान के गठन की प्रक्रिया आबु दिलवाड़ा के सम्मिलित होने तक 1 नवम्बर 1956 तक जारी रही थी। आज इस विशाल राज्य में कुल 33 जिले सम्मिलित है।

अतिप्राचीन काल मे इस क्षेत्र इस क्षेत्र से होकर सरस्वती और दृशद्वती जैसी विशाल नदियां बहा करती थीं। इन नदी घाटियों में हड़प्पा, ‘ग्रे-वैयर’ और रंगमहल जैसी संस्कृतियां फली-फूलीं। आज भी इनके अवशेष खुदाई करते समय प्राप्त होते है। राजस्थान में प्राचीन सभ्यताओं के केन्द्र- कालीबंगा, रंगमहल, आहड, गणेश्वर, बागोर व बरोर है।

आजादी के पूर्व राजस्थान १९ देशी रियासतों में बंटा था, जिसमें अजमेर केन्द्रशासित प्रदेश था। इन रियासतों में उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और शाहपुरा में गुहिल, जोधपुर, बीकानेर और किशनगढ़ में राठौड़ कोटा और बूंदी में हाड़ा चौहान, सिरोही में देवड़ा चौहान, जयपुर

और अलवर में कछवाहा, जैसलमेर और करौली में यदुवंशी एवं झालावाड़ में झाला राजपूत राज्य करते थे। टोंक में मुसलमानों एवं भरतपुर तथा धौलपुर में जाटों का राज्य था। इनके अलावा कुशलगढ़ और लावा की चीफशिप थी।

आज इतिहास के पन्ने उलटते है तो हर राजस्थानी का मस्तक गर्व से उठ जाता है। यह वही भूमि है जहॉ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप, त्याग प्रतिमूर्ति पन्नाधाय, भक्त शिरोमणि मीराबाई, रुणेचा के धनी व लोक आराध्य बाबा रामदेव जी, गोभक्त व वचन के धनी वीर तेजाजी, गो रक्षा हेतु विवाह की वेदी से उठ जाने वाले पाबूजी, नई दिशा व शिक्षा प्रदान करने वाले जाम्भोजी, स्वामिभक्त दुर्गादास व मुकुनदास खींची जैसे सैकड़ों वीर -वीरांगनाओं ने जन्म लिया है।

आज राजस्थान सम्पूर्ण राष्ट्र में अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता व अनेकों पर्यटन स्थलों के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यहाँ के हर जिले की अपनी पहचान व विशेषता है। बाड़मेर की रिफाइनरी, जोधपुर की आईआईटी , एनएलयू व एम्स, उदयपुर के आईआईएम , कोटा की कोचिंग प्रणाली व जयपुर की शैक्षणिक सुविधाएं इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान कर रही है।

शब्दो मे इस प्रदेश के मरुस्थलों, पहाड़ियों, सुरम्य स्थानों, खान-पान, आवभगत, अपणायत, वेशभूषा, संस्कृति, पहनावे को व्यक्त कर पाना बहुत कठिन है। आप जब राजस्थान आएंगे तो स्वयम ही कह उठेंगे।
"इस मिट्टी से तिलक करो, यह मिट्टी है बलिदान की"।