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आँखों की रौशनी बढाने के घरेलू उपाय? (Home Remedies for Eye Sight in Hindi)

आँखों की रौशनी बढाने के घरेलू उपाय - Eye Sight मानव शरीर का वह अंग है जो विभिन्न उद्देश्यों से प्रकाश के प्रति क्रिया करते है। आँख वह इंद्री है जिसकी सहायता से हम देखते हैं। मानव Eye (नेत्र/आँख) लगभग 1 करोड़ रंगों में अन्तर कर सकता है संस्कृत में (नेत्र/आँख) को अक्षि, नयनम् कहते हैं अंग्रेजी में Eye. (नेत्र/आँख) जीवधारियों का वह अंग होता है जो प्रकाश के प्रति संवेदनशील होता है।

(नेत्र/आँख) प्रकाश को संसूचित करके उसे तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा विद्युत-रासायनिक संवेदों में बदल देता है। जंतुओं के (नेत्र/आँख) एक जटिल प्रकाशीय तंत्र की तरह होते हैं जो आसपास के वातावरण से प्रकाश एकत्र करता है मध्यपट के द्वारा (नेत्र/आँख) में प्रवेश करने वाले प्रकाश की तीव्रता का नियंत्रण करता है।

(नेत्र/आँख) प्रकाश को लेंसों की सहायता से सही स्थान पर केंद्रित करता है। (जिससे प्रतिबिंब बनता है इस प्रतिबिंब को विद्युत संकेतों में बदलता है इन संकेतों को तंत्रिका कोशिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क के पास भेजता है। (नेत्र/आँख) का रंग और वर्णन आँखें काली,नीली, भूरी, हरी और लाल रंग की हो सकती है (नेत्र/आँख) तेजस्वी होते हैं। (नेत्र/आँख) को कफ इन दोष से डर रहता है।

प्रत्येक (नेत्र/आँख) 2.5 सेंटीमीटर व्यास का गोलाकार पिंड होता है। यह कपाल के नेत्रगर्त  में स्थित होते हैं और उनका छोटा-सा भाग ही बाहर से दिखाई देता है। इस भाग को अग्रखंड कहते हैं। (नेत्र/आँख) खंड का मध्य भाग कॉर्निया है जो पारदर्शक होता है।

नेत्र गोलक की तीन परतें होती हैं। बाहरी परत (श्वेत पटल) घने संयोजक तंतुओं की होती हैं, जो अंदर की परतों की रक्षा और नेत्र पेशियों की कंडराओं के संन्निवेश को सुविधा प्रदान करती है। (नेत्र/आँख) पटल का अग्रभाग पारदर्शक कॉर्निया होता है और शेष भाग श्वेत अपारदर्शी होता है। (नेत्र/आँख) में कंजंक्टाइवा नामक श्लेष्मिक झिल्ली के पीछे से इसकी सफेदी दिखाई पड़ती है।

मध्य परत है श्यामवर्ण रंजित पटल। इसके दो भाग होते हैं : पश्च दो तिहाई, कोरायड, जो केवल रक्तवाहिनियों का जाल होता है और अग्र

तिहाई, अपेक्षाकृत स्थूल भाग, जिसे रोमक पिंड (सिलियरी बॉडी) कहते हैं। यह वृत्ताकार पिंड आगे की और आइरिस या परितारिका पट्ट बनाता है। आइरिस के बीच एक छिद्र होता है जिसे हम प्यूपिल या नेत्र तारा कहते हैं। यह छोटा-बड़ा हो सकता है । तथा इसमें से प्रकाश नेत्र के पश्चखंड में प्रवेश करता है।

भीतरी परत, तंत्रिका के रेशों और कोशिकाओं से निर्मित, दृष्टिपटल होती है। इन परतों केअतिरिक्त रोमक पिंड से निलंबन स्नायु द्वारा संलग्न ठीक आइरिस के पीछे लेंस अवस्थित होता है। जो कॉर्निया और लेंस के अग्रपृष्ठ के बीच का स्थान अग्रकक्ष तथा आइरिस और लेंस के बीच का पतला वृत्ताकार स्थान पश्चकक्ष कहलाता है। इन पक्षों में पतला जलीय द्रव नेत्रीद होता है। लेंस के पश्च भाग में क्रिस्टलीय पारदर्शी श्लिषि (जेल) होती हैं, जिसे सांद्र द्रव कहते हैं।

रोमक पिंड (Ciliary body) के तीन भाग होते हैं :

  • रोमक मुद्रिका = रंजित पटल का अग्रभाग, जिसमें अरीय ढंग से स्थापित मेड़ें होती हैं;
  • रोमक प्रवर्ध = लेंस परिसर के चारों और झालर की भांति स्थित होता है;
  • रोमक पेशी (ciliary muscle) = यह अरेखित पेशियाँ होती हैं तथा अरीय और वृत्तीय ढंग से स्थित होती हैं। दूरदृष्टि वालों में ये पेशियाँ काफी विकसित होती हैं।

आइरिस में दो प्रकार की पेशियाँ होती हैं वृत्तीय और अरीय। वृत्तीय के आकुंचन से प्यूपिल छोटा होता है वह अरीय के सिकुड़ने से फैलता है। ये स्वचालित पेशियाँ होती हैं और सहजक्रिया-केंद्र द्वारा इनका नियंत्रण होता है।

आँखों की रौशनी बढाने के घरेलू उपाय? (Home Remedies for Eye Sight in Hindi) :

नेत्रोद का निर्माण संभवत= रोमक प्रवर्ध की कोशिकाओं से प्राप्त स्फाटकल्पयुक्त तरल के अपोहन से होता है। इनमें प्लाज़्मा के समानुपात में स्फाटकल्प होते हैं और पर्याप्त मात्रा में ह्यालयुरोनिक अम्ल होता है। नेत्रोद के कारण नेत्र के अंदर का चाप 18 - 25 मिमी. (पारद) होता है। नेत्रोद पश्च कक्ष से निकलकर अग्रकक्ष में और यहाँ से फांटाना में आता है। यह श्लेम की नाल और

प्रदेश के बीच केवल अंत:कला का झीना अंतरपट होता है और नेत्रोद इसी पथ से नेत्र शिरा में जा गिरता है। प्रति मिनट 2 घन मिमी. नेत्रोद बनता है और उसके बाहर निकलने में कहीं बाधा आती है तो नेत्र का चाप बढ़ जाता है। इस दशा को 'ग्लॉकोमा' या समलबाई कहते हैं।

आँखों की रोशनी कम क्यों होती है? (Causes of Weak Eye Sight in Hindi) :

मानव शरीर की उम्र बढ़ने के साथ (नेत्र/आँख) में क्षयकारी (Degenerative) बदलाव आने शुरू हो जाते हैं जिसके कारण धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है। लेकिन भोजन में पोषक तत्वों की कमी होना एवं अनुचित जीवनशैली का पालन किया जाए तो यह बदलाव समय से पहले आने लगते हैं। साथ ही यदि उचित आहार और जीवनशैली का पालन किया जाए तो लम्बे समय तक व्यक्ति की दृष्टि अच्छी बनी रहती है। भोजन में जरूरी पोषक तत्वों की कमी से आँखों की रोशनी में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

Vitamin C (विटामिन-सी), Vitamin A (विटामिन-ए) और Vitamin E(विटामिन-ई), जिंक, ल्यूटिन, जियाजैक्थीन और Omega -3 (ओमेगा-3) फैटी एसिड हमारे (नेत्र/आँख) के स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं ।किंतु लम्बे समय तक आहार में इनकी कमी पाई जाती है तो कमजोर दृष्टि के अलावा (नेत्र/आँख) से संबंधित क्षयकारी बीमारियों की आशंका बनी रहती है जैसे- कैटारैक्ट, उम्र संबंधित मैक्यूलर डिजेरेशन आदि।

आँखों की रोशनी कम होने के लक्षण (Symptoms of Weak Eye Sight in Hindi) :

(नेत्र/आँख) से कम दिखाई देने के अलावा और भी लक्षण होते हैं-

  • पढ़ते समय धुंधला दिखाई देना
  • दूर की वस्तुएँ देखने में असमर्थता होती है
  • कम रोशनी और रात में धुंधला दिखाई पड़ना
  • (नेत्र/आँख) में हर समय दर्द होना
  • पढ़ते समय बार-बार सरदर्द  की शिकायत होना
  • तेज रोशनी में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देना
  • (नेत्र/आँख) में सूजन या लालिमा का होना
  • (नेत्र/आँख) से पानी निकलना
  • अंधेरे से एक-दम रोशनी में जाने में देखने में परेशानी होना

आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए? (How to Improve Eye Sight in Hindi) :

  • (नेत्र/आँख) को दिन में 2-3 बार ठण्डे पानी से धोना चाहिए
  • पढ़ते समय रोशनी
    का विशेष ध्यान रखना हल्की रोशनी में पढ़ने या लिखने से (नेत्र/आँख) पर दबाव पड़ता है।
  • धूल, प्रदूषण और तेज धूप से (नेत्र/आँख) को बचाना चाहिए
  • तेज धूप में जाते समय (नेत्र/आँख) पर अच्छी गुणवत्ता वाले चश्मे का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें (UV rays) (नेत्र/आँख) को नुकसान पहुँचाकर समस्या को उत्पन्न करती है।
  • देर तक लगातार पढ़ने या कम्प्यूटर पर काम करने के कारण (नेत्र/आँख) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस के लिए कुछ देर के अंतराल में (नेत्र/आँख) को बंद करके आराम देना चाहिए।
  • (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ाने के लिए (नेत्र/आँख) के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषक तत्वों से युक्त आहार लेना चाहिए जिनमें आवश्यक Vitamins (विटामिन्स) और Minerals (मिनरल्स) हो।
  • Vitamin C (विटामिन सी), Vitamin A (विटामिन ए) और Bita Cerotin (बीटा कैरोटिन) से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए जैसे-
    • गाजर
    • सभी प्रकार के खट्टे फल
    • Vitamin A (विटामिन-ए) के लिए गेहूँ से बने उत्पाद
    • Dry Fruit सूखे फल Nuts (नट्स) का उपयोग करें। Nuts (नट्स) में अच्छी मात्रा में Vitamin E (विटामिन ई) पाया जाता है जो (नेत्र/आँख) को उम्र के बढ़ने के साथ-साथ होने वाली क्षयकारी बीमारियों से बचाता है जैसे :
      • अखरोट
      • बादाम
      • पिस्ता
      • मूंगफली
  • हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग
  • सभी प्रकार की दालों का सेवन करें।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का उपयोग (नेत्र/आँख) के लिए बेहद आवश्यक होता है।
  • अलसी के बीजों का उपयोग करें।
  • शकरकंद (Sweet potato) को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। शकरकंद  बीटा कैरोटिन और Vitamin E (विटामिन ई)  का अच्छा स्रोत माना जाता है।

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आँखों की रोशनी बढ़ाने के उपाय (Prevention Tips to improve Eye Sight in Hindi) :

(नेत्र/आँख) को दिन में 2 बार ठण्डे पानी से धोना

पढ़ते समय रोशनी का ध्यान रखना चाहिए। हल्की रोशनी में ना पढ़ना या लिखना

धूल, मिट्टी, प्रदूषण और तेज धूप से आँखों को बचाना

धूप में जाते समय (नेत्र/आँख) पर अच्छी गुणवत्ता वाले चश्मों का प्रयोग करना

निरंतर पढ़ने या कम्प्यूटर पर काम करने के कारण (नेत्र/आँख)

पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

(नेत्र/आँख) को बंद कर के आराम देना चाहिए।

आँखों की रोशनी बढ़ाने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Eye sight in Hindi) :

  1. शहद का मिश्रण (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ाने में फायदेमंद होता है
  2. बादाम-सौंफ का मिश्रण (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ाने में लाभकारी होता है
  3. त्रिफला (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ाने में मददगार साबित होता है
  4. गाजर (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ाने में फायदेमंद होती है
  5. हथेली की सिकाई से (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ती है
  6. सरसों के तेल की मालिश से (नेत्र/आँख) की रोशनी बढ़ती है
  7. फिटकरी आँखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होती है
  8. बादाम किशमिश का मिश्रण आँखों की रोशनी बढ़ाने में लाभकारी होता है

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ? (When to See a Doctor in Hindi?) :

यदि दृष्टि कमजोर होने के साथ चश्मे का नम्बर तेजी से बढ़ रहा हो तो तुरन्त ही डॉक्टर /विशेषज्ञ की सलाह/सहायता लेनी चाहिए