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| On 2 days ago

IIT Kanpur कर रहा रिसर्च, हिंदी में पढ़ने को मिल सकते हैं विकीपीडिया-जर्नल्स

IIT Kanpur : हिंदी भाषा प्रेमियों के लिए हिंदी दिवस के दिन ही आईआईटी कानपुर एक खुशखबरी लेकर आया है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो आपको बहुत जल्द विकीपीडिया और जर्नल्स हिंदी में पढ़ने को मिल सकते हैं। इसको लेकर आईआईटी कानपुर लगातार रिसर्च कर रहा है। इसके तहत इंटरनेट पर विकिपीडिया, जर्नल्स आदि को हिंदी में करने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह सफल रहता है तो इससे विद्यार्थियों को काफी सहायता होगी। इस प्रोजेक्ट को कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉ अर्नब भट्टाचार्य लीड कर रहे हैं।

इंटरनेट पर कम है हिंदी कंटेट

IIT Kanpur के प्रोफेसर टीवी प्रभाकर ने बताया कि वर्तमान में इटरनेट पर हिंदी में कंटेंट बेहद कम है। इसलिए IIT Kanpur की ओर से यह प्रयोग किया जा रहा है। IIT Kanpur के छात्रों को हिंदी में नोट्स बनाने एवं अपलोड करने

के लिए प्रेरित किया जा रहा है । इससे हिंदी के स्टूडेंट्स को काफी लाभ मिलने वाला है। गौरतलब है कि कानपुर ने इससे पूर्व गूगल से पहले देवनागरी को भी इंटरनेट की दुनिया में पेश किया था। उस समय डॉ. रजत मुना जो फिलहाल आईआईटी के निदेशक हैं उनके साथ देवनागरी को लांच किया गया था।

IIT Kanpur Work On Hindi : हिंदी के प्रयोग पर कर रहे फोकस

IIT Kanpur के टीवी प्रभाकर ने बताया कि परिसर में स्टूडेंट्स को हिंदी में लिखने व नोट्स बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें स्टूडेंट्स व सीनियर प्रोफेसर को विज्ञान व तकनीक से जुड़े नोट्स व जर्नल्स हिंदी में ही लिखने व इंटरनेट पर अपलोड करने के लिए मोटिवेट किया जा रहा है। इसके अलावा तकनीकी लेखन को भी हिंदी में ही प्रस्तुत करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

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IIT Kanpur Latest News हिंदी के लिए है एक शुभ संकेत

इस बदलाव को हिंदी से जुड़े विशेषज्ञ हिंदी के लिए एक शुभ संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदी भाषा में हो रहा यह परिवर्तन आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदी सिर्फ 200 वर्ष पुरानी भाषा है। वर्तमान में जो हिंदी बोली जा रही है वह 200 वर्ष पूर्व ऐसी नहीं थी। रामायण के रामचरितमानस हिंदी में नहीं अवधी में लिखा गया था। इस लिहाज से अब अवधी को हम लोग भूल गए है। इसलिए किसी भी भाषा में बदलाव होना भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत माना जाता है। जिन भाषाओं में परिवर्तन नहीं किया गया ऐसी कई भाषाएं आज इस दुनिया से समाप्त हो चुकी है।