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हनुमान जी के सिंदूर का महत्व व जाने क्यों लगता है हनुमानजी की मूर्ति पर सिन्दूर? (Importance of Hanuman Ji's Sindoor)

सबसे पहले तो आइये हम हनुमानजी के नाम का जयकारा लगा कर श्री हनुमानजी महाराज को नमन करते है।

श्री हनुमान जी महाराज की जय हो।

कलयुग में हनुमानजी महाराज की कृपा अतिआवश्यक है। श्री रामचन्द्र जी भगवान के परम भक्त श्री हनुमानजी के बारे में उनके भक्तों में उनके प्रति अगाध विश्वास है। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में जिस स्थान पर भी श्री रामचन्द्र जी भगवान की पूजा अर्चना, सुन्दरकाण्ड का पाठ इत्यादि होते है तो श्री हनुमानजी महाराज उपस्थित रहते है।

श्री हनुमानजी महाराज के मंदिर बहुतायत में बने हुए होते है एवम उनके भक्त उनमे गहरी निष्ठा रखते है। श्री हनुमानजी की मूर्ति पर प्रायः सिंदूर अर्पित किया हुआ होता है एवम उनके भक्त सिंदूर का टीका अपने मस्तक पर लगा कर स्वयं का अहोभाग्य अनुभव करते है। युवा वर्ग व बच्चों में बड़ी उत्सुकता रहती है कि श्री हनुमानजी महाराज को सिंदूर क्यो अर्पित किया जाता है अथवा उनकी पावन मूर्ति पर सिंदूर क्यो लगाया जाता है? इस लेख में हम इस सम्बंध में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं। जानकारी प्राप्त करने से पहले आइये प्रेम से बोलते है-

" श्री हनुमानजी महाराज की जय हो।"

हनुमानजी की कृपा से बच्चों के गुस्से पर काबू कैसे प्राप्त करें।

हर माता – पिता की यही प्रयास करते हैं कि वो अपने बच्चों को अच्छी परवरिश तथा अच्छा जीवन दें। जिसके लिए वो अपने बच्चों की हर इच्छा को पूर्ण कर देते हैं। लेकिन कभी – कभी बच्चों के द्वारा कुछ ऐसी वस्तुओं की मांग की जाती हैं। जिनको पूरा कर पाना उनके माता – पिता के लिए असंभव हो जाता हैं। ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे अपने माता – पिता से गुस्सा हो जाते हैं और अपनी मांग की पूर्ति हेतु जिद्द  करते हैं।

अगर इसके बाद लगातार बच्चों की बातों को माता – पिता नजर अंदाज करने लगते हैं तो गुस्सा और जिद्द उनके व्यवहार में निहित हो जाता हैं। जिसके बुरे परिणाम का भी कई बार बच्चों के साथ – साथ उनके माता – पिता को सामना करना पड़ता हैं। यदि आपका बच्चा भी जिद्दी हैं और उसे जल्द ही गुस्सा आ जाता हैं। तो नीचे दिए गये उपायों का प्रयोग जरूर करें।

हनुमान जी के सिंदूर का महत्व

गुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें :

शास्त्रों के अनुसार यदि कोई बच्चा

बहुत ज्यादा जिद्दी हो, छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता हो, माता – पिता की बात बिल्कुल न सुनता हो, जिद्द के कारण ही जमीन पर लेट जाता हो, चिडचिडापन उसके व्यवहार की मुख्य प्रवृति बन गई हो तो इसके लिए किसी प्रतिष्ठित हनुमान जी के मंदिर में शनिवार और मंगलवार को जाएँ और उनके बायें पैर का सिंदूर लेकर उसके माथे पर लागायें।  हर मंगलवार और शनिवार के दिन इस प्रयोग को करने से आपका बच्चा जिद्द करना और गुस्सा करना बिल्कुल छोड़ देगा।

हनुमान जी के सिंदूर का महत्व :

“महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति से संगी।।”

अर्थात हनुमानजी कुबुद्दि को हटाने वाले और सुबुद्धि के प्रकाशक है। उनकी कृपा  से विकृत बुद्धि और जिदद्पना  ख़त्म हो सकता है क्योंकि ये स्वयं ही अनंत बल और अनंत सुबुद्धि के भण्डार है। इन्होने भगवान सूर्य को अपने गुरु रूप में स्वीकार किया है।   

हनुमान जी के दोनों पैरों पर लगा सिंदूर बहुत ही प्रभावशाली होता हैं। ऐसा माना जाता हैं कि इस सिंदूर का तिलक जब कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क पर लगता हैं तो हनुमान जी उस व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं। इसीलिए हनुमान जी

को बल और बुद्धि का दाता भी माना जाता हैं तथा इसीलिए जो व्यक्ति या बच्चे ज्यादा जिद्दी या गुस्सैल होते हैं।

उनके लिए यह सिंदूर बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता हैं। हनुमान जी के सिंदूर को लगाने के बाद व्यक्ति का गुस्सा जैसे – एक दम से ही गायब हो जाता हैं और जिद्द धीरे – धीरे ख़त्म हो जाती हैं। हनुमान जी के सिंदूर को लगाने से व्यक्ति को इन दोनों ही चीजों से मुक्ति तो मिलती ही हैं। इसके साथ ही उन्हें पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है। 

क्यों लगता है हनुमानजी की मूर्ति पर सिन्दूर :

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार हनुमानजी ने माता सीता को मस्तक पर सिंदूर लगाते हुए देखा तो आने पूछ लिया की आप सिन्दूर क्यों लगती है? तो माता सीता ने उत्तर दिया कि “सिन्दूर लगाने से पति की उम्र बढ़ती है। मैं अपने पति प्रभु श्री राम की दीर्घायु के लिए यह सिन्दूर लगाती हूँ।” 

अब हनुमानजी ठहरे श्री राम के परम् भक्त तब उन्होंने अपने प्रभु की मंगल कामना के लिए पुरे शरीर पर ही सिन्दूर लगा लिया। यह देख कर सभी अयोध्यावासी, श्री राम और माता सीता

हंसने लगे। जब रामजी ने सिन्दूर लगाने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया की यदि माता सीता के चुटकी भर सिन्दूर लगाने से आपकी दीर्घायु हो सकती है तो मैं हमेशा सवा  मन सिन्दूर अपने पुरे शरीर पर लगाऊंगा जिससे आप सशरीर अमर हो जायेंगे। हनुमानजी की यह भक्तिपूर्ण बात सुनकर रामजी भाव विभोर हो गए और उन इसी रूप में पूज्य होने का वरदान दे दिया। 

इस प्रकार हनमानजी के इस सिन्दूर में केवल हनुमानजी का ही नहीं  बल्कि रामजी का भी अशीर्वाद शामिल है जो बच्चो हो उत्तम बुद्धि और कामयाबी प्रदान करता है।    

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