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| On 8 months ago

Independence Day: Outline of speech of an Educational Institution head on Independence Day.

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स्वतंत्रता दिवस : स्वतंत्रता दिवस पर एक संस्था प्रधान के भाषण की रूपरेखा।

माँ शारदे के चरणों मे नमन के साथ मैं आज विद्यालय में पधारे आप सभी का स्वागत करता हूँ।

आज ..…...... विद्यालय प्रांगण में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के गौरवशाली व्यक्तित्व के धनी अध्यक्ष श्री/श्रीमती.........., कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व क्षेत्र के गौरव श्री/श्रीमती................ व कार्यक्रम को गरिमा प्रदान करने वाले विशिष्ट अतिथि श्री/श्रीमती............... एवम अन्य जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणजनों, अभिभावकों एवं विद्यालय की शान हमारे स्टाफ सदस्य व देश के भावी कर्णधार हमारे विद्यार्थियों।

(इस बार विद्यार्थियों को आमंत्रित नही करना है)

जैसा कि आप सभी को विदित है आज हम हमारे प्रमुख राष्ट्रीय दिवस स्वतंत्रता दिवस को आयोजित करने के लिए एकत्र हुए हैं। 15 अगस्त 1947 को हमने एक लंबी गुलामी के बाद स्वतंत्रता प्राप्त की थी। स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आज हम आजादी की 73वीं वर्षगांठ का उल्लासपूर्ण आयोजन कर रहे हैं। आज हमारा 74 वां स्वंतत्रता दिवस है।

हमारे राष्ट्र ने आजादी प्राप्त करने के पश्चात विश्व के प्रमुख राष्ट्रों में गौरवशाली स्थान अर्जित किया है। हमने आर्थिक, सामाजिक, खेलकुद, सुरक्षा अंतरिक्ष, शैक्षिक, मेडीकल इत्यादि सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। आजादी की लड़ाई जिन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने लड़ी उनके प्रति आज पूरा देश नतमस्तक है एवं उन्हें आज के दिन बड़े आदर से याद करता है।

1857 से आरम्भ हुआ स्वतंत्रता प्राप्ति का हमारा आंदोलन आखिरकार 1947 में सफल हुआ। आजादी की प्राप्ति के लिए महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, खुदीराम, सुभाषचंद्र बोस, अशफाकउल्ला खान, अम्बेडकर साहब, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिन चन्द्र पाल , मंगल पांडे इत्यादि अनगिनत वीरों ने कठोर सँघर्ष किया व कठोर यातनाओं का सामना किया। अगुआ नेताओ के साथ ही सम्पूर्ण देशवासियों ने अनगिनत वनवासियों, आदिवासियों, स्थानीय समुदाय ने संघर्ष व त्याग किया। आज हम उन समस्त देशप्रेमी स्वतंत्रता सेनानियों को पूर्ण आदर व सम्मान के साथ याद करते है व उनकों विश्वास दिलाते है कि हम सदैव उनके द्वारा दिखाए मार्ग पर चलकर राष्ट्र के गौरव को दिन दुगना व रात चौगुना बढाने के लिए हमारा सर्वस्व अर्पित करेंगे।

आज हमारा देश उन समस्त वैज्ञानिकों, शिक्षकों, किसानों, सेनिको, राजनेताओं, उद्योगपतियों, चिकित्सकों, व्यापारियों, पत्रकारों, लेखकों, खिलाड़ियों, राज्य व निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, श्रमिको व उन समस्त का आभारी है जिनके कठोर परिश्रम से आज हमारा प्राणों से प्यारा तिरंगा पूरे विश्व मे गर्व से फहरा रहा है। हमने अनेक चुनोतियाँ पार करके सम्पूर्ण विश्व मे गौरवशाली सम्मानजनक स्थान प्राप्त किया है।

तमाम सफलताओं के बावजूद भी आज हमारे राष्ट्र के सामने अनेक गम्भीर चुनोतियाँ है। इन गम्भीर चुनोतियों में सीमापार से आतंकवादी हमले, बेरोजगारी, आपसी विवाद इत्यादि है। आज की प्रमुख आवश्यकता है कि हम धर्म, भाषा, लिंग, क्षेत्र के विवाद को सदैव के लिए भुलाकर भारतमाता की सेवा में अपनी पूर्ण क्षमताओं का समर्पण करें।

शिक्षा ही मूल मंत्र है। शिक्षा एक पारस पत्थर के समान अनमोल रत्न है जिसके स्पर्श मात्र से एक आम इंसान महापुरुषों की श्रेणी में आ जाता है। आज हम इस विद्यालय परिसर में एकत्र हुए है जो पिछले ......वर्षों से क्षेत्र की सेवा कर रहा है। इस विद्यालय से अनेक योग्य छात्रों ने शिक्षा प्राप्त करके राष्ट्र की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है (कुछ भूतपूर्व छात्रों के नाम) एवं वर्तमान विद्यार्थी भी राष्ट्र की सेवा के लिए स्वंय को तैयार कर रहे है। गत वर्ष कक्षा पाँचवी के......, आठवी के ......, दसवीं के..... व बारवीं के......... विद्यार्थियों ने पूरे जिले में अपने ग्राम का नाम रोशन किया है। खेल के क्षेत्र में भी हम पीछे नही रहे है, हमारे......... विद्यार्थियों ने सबका ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट किया है। भविष्य के लिए भी हमारे अनेक विद्यार्थी कठोर परिश्रम कर रहे है। इस हेतु हम विद्यालय के भामाशाह..........., स्टाफ सदस्यों......... व सरपंच महोदय..... के सहयोग के लिए ह्रदय से आभारी है।

इस वर्ष हमारा बोर्ड परीक्षा परिणाम बहुत बेहतरीन रहा है। (विवरण)। इस वर्ष हमारे विद्यालय में ......विद्यार्थियों ने नवप्रवेश लिया है आज के पवित्र दिन हम इनका स्वागत करते है एवं विश्वास रखते है कि वे कठोर परिश्रम से शिक्षा प्राप्त करेंगे एवं अन्य विद्यार्थियों के समान अनुशासन से शिक्षा ग्रहण करके योग्य नागरिक बनकर राष्ट्र की सेवा करेंगे।

अंत मे एक बार आप सभी का ध्यानाकर्षण करना चाहता हूं कि हमारे राज्य ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाकर सम्पूर्ण देश मे दूसरा स्थान प्राप्त किया है। आज राज्य सरकार द्वारा सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए प्री मेट्रिक व पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जा रही है। इसके अलावा निशुल्क पाठ्यपुस्तकों, मध्यान्ह भोजन, कक्षा नवमी की छात्राओं को निशुल्क साइकलों के वितरण के अलावा अनेक योजनाएं संचालित है।

इन योजनाओं में ट्रांसपोर्ट वाउचर, लैपटॉप वितरण, मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना, गार्गी पुरुस्कार, बालिका प्रोत्साहन योजना, आपकी बेटी योजना, इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी योजना प्रमुख है। विद्यार्थियों की सहायता के लिए आइसीटी कक्षाओं, राजीव गांधी कॅरियर पोर्टल का संचालन किया जा रहा है। आधुनिक राज्य के निर्माण के क्रम में आज शिक्षा विभाग में शाला दर्पण, ज्ञान संकल्प पोर्टल भी उपलब्ध है।

कोरोना वायरस के कारण इस वर्ष मार्च 2020 से नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन नही किया जा रहा है। विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु राजस्थान स्कूल विभाग ने "ऑनलाइन शिक्षण" व्यवस्था आरम्भ की गई है।

ऑनलाइन शिक्षण कार्य हेतु राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में नामांकित 85 लाख से अधिक विद्यार्थियों हेतु प्रत्येक स्कूल स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप स्थापित किये गए। इन ग्रुप्स द्वारा प्रतिदिन विद्यार्थियों को उच्च स्तर की पाठ्यक्रम आधारित शैक्षिक सामग्री प्रेषित की गई है। अभिभावकों का इस क्रम में विशेष सहयोग मिला है। इस हेतु विभाग उनको धन्यवाद ज्ञापित करता है।

ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम हेतु स्माइल कार्यक्रम, शिक्षावाणी कार्यक्रम, देववाणी कार्यक्रम, हवामहल महल कार्यक्रम आदि कार्यक्रम आरम्भ किये गए है। व्हाट्सएप ग्रुप के अलावा रेडियो व दूरदर्शन जैसे माध्यम भी इस्तेमाल किये गए है।

आज राजस्थान शिक्षा क्षेत्र की राष्ट्रीय हब के रूप में चमक रहा है। राज्य सरकार विद्यालयों के चहुमुखी विकास हेतु कटिबद्ध हैं। प्रत्येक स्कूल आज नॉलेज सेंटर व सेंटर ऑफ एक्ससिलेन्स बन कर उभर रही है। आप सभी जनप्रतिनिधियों, नागरिकों व अभिभावकों से सादर निवेदन है कि वर्षपर्यन्त स्कूल की सामुदायिक बालसभा व टीचर पेरेंट्स मीटिंग में पधारे व विद्यालय विकास मे सदैव की भांति सहयोग प्रदान करें।

अंत मे एक बार पुनः में अध्यक्ष जी, मुख्य अतिथि जी, विशिष्ट अतिथि जी, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, गणमान्य नागरिकों व विद्यार्थियों के प्रति आभार व धन्यवाद प्रदान करता हुँ।

भारत माता की जय।

Note- उपरोक्त मात्र एक रूपरेखा है संस्था प्रधान स्थानीय परिस्थितियों व आवश्यकता के अनुसार अपने उदबोधन को समायोजित करता है। इस क्रम में विभागीय आदेश सर्वोपरि होते है।