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Indian Education - The main features of Indian education.

भारतीय शिक्षा- क्यों हमारी शिक्षा व्यवस्था बहुत व्यापक व मजबूत है?

सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवेश में नकारात्मक चीजे सहज रूप से दिखती है एवं उनके आधार पर जनधारणा का निर्माण होने लगता है। भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर भी काफी नकारात्मक विचार अभिव्यक्त होते है।

अगर हम थोड़ा व्यापक दृष्टिकोण रखे एवम समग्र मूल्यांकन करे तो पाएंगे कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था आज विश्व मे अग्रणी है एवं कुछ सुधारो के साथ इसे एक श्रेष्ठतम व्यवस्था भी कहा जा सकता है।

भारतीय शिक्षा के मजबूत पक्ष।

भारतीय शिक्षा :विराट शैक्षणिक आधारभूत सरंचना।

भारत विश्व का जनसँख्या दृष्टि से दूसरा एवम क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ

बड़ा देश है। हमारे देश की विशालता अत्यंत व्यापक है यहाँ क्षेत्रफल तो बहुत अधिक है साथ ही तमाम प्रकार की भौगोलिक विशेषताओं का भी समावेश है। भारतवर्ष में समतल मैदानी, मरुस्थल, पहाड़ी, ठंडे मरुस्थल, सूखे, पठार, दुर्गम-निर्जन व सुदूर क्षेत्र सम्मिलित है।
हमने विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित नकर लिया है कि प्रत्येक विद्यार्थी को उसके वासस्थान के नजदीक प्राथमिक शिक्षा मिल सके। आज सबसे न्यूनतम प्रशासनिक इकाई ग्राम पंचायत स्तर पर भी उच्च माध्यमिक/माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध है।

भारतीय शिक्षा: व्यापक पाठ्यक्रम

हमारा पाठ्यक्रम अत्यंत व्यापक व उदार है। यह अपने अंदर शैक्षणिक व्यापकता के साथ ही विभिन्न धर्मों, भाषाओ, विश्वासों,

मूल्यों, सिद्धान्तों, अवधारणाओं को सम्मिलित करता है। आज तक हमारी शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम पर किसी भी प्रकार का कोई भी प्रश्नचिन्ह नही लगा हैं।

भारतीय शिक्षा:त्रिभाषा फार्मूला।

आज हमारे राष्ट्र में विद्यार्थियों को भाषाई कौशलों के विकास की पूर्ण आजादी प्राप्त है। हम व्यापक रूप से राष्ट्रभाषा हिन्दी, अंतरराष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी, मूल भाषा संस्कृत व स्थानीय भाषा को सम्मिलित करते है। विश्व मे अन्य किसी राष्ट्र में ऐसी उदारता के दर्शन बहुत कम है।

भारतीय शिक्षा:गुरु- शिष्य सम्बन्ध।

कुछेक नेगेटिव उदाहरणों के बावजूद आज सम्पूर्ण राष्ट्र में गुरु-शिष्य सम्बन्ध अत्यंत पवित्र व दीर्घकालिक है। आज भी हमारे शिक्षक गुरु की भूमिका का निर्वहन कर रहे है। हमारे राष्ट्र में

अध्यापक की सोच विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास तक ही सीमित नही है अपितु विद्यार्थियों का सामाजिक, आर्थिक व नैतिक विकास भी उनकी प्राथमिकता है।

भारतीय शिक्षा: आधुनिक नवाचार।

परम्परागत राष्ट्रवाद के बावजूद आज भारत अपने आईआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ कॉलेजों, एम्स के कारण विश्व मे निरन्तर बढ़त प्राप्त कर रहा हैं। बहुत जल्द हम अपने अनुसन्धानों व बौद्धिक संपदा को अपने नाम रजिस्टर्ड करवाकर विशिष्ट स्थान प्राप्त कर लेंगे।

भारतीय शिक्षा: शिक्षा यहाँ परम्परा है।

भारत की आत्मा में शिक्षा का वास है। मानवता के विकास के साथ ही हमारे ऋषियों, मुनियों, आचार्यो, तपस्वियों व बुद्धिजीवियों ने लेखन कार्य किया। आज देश मे हजारों विषयों व उपविषयों पर हस्तलिखित पांडुलिपियों का अक्षत भंडार है।

भारतीय शिक्षा- प्रकति भी शिक्षा के पक्ष में।

एक भारतीय विद्यार्थी को भारत माता की गोद मे ही सभी प्रकार की जलवायु, मौसम, विविधता उपलब्ध है। हमारे विद्यार्थियों को किसी भी कारण से किसी दूसरे राष्ट्र में रिसर्च हेतु जाने की कदापि आवश्यकता नही है। प्राकृतिक कारणों के कारण हमारी बुद्धि लब्धता भी अधिक है।

भारतीय शिक्षा: उदारीकरण एवम सामंजस्य।

भारतीय विचारधारा उदार व संस्कृति सामंजस्य पूर्ण है। हम सहजतापूर्ण नवीन विचारों को स्वीकार कर उनका भारतीयकरण करकर आत्मसात कर लेते है। इसी दृष्टिकोण के कारण हम प्रत्येक चुनोती का सफलतापूर्वक सामना कर लेते है।

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