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| On 2 years ago

Indian Railways: "Railway Colony" is a stay that no religion can ever divide.

भारतीय रेलवे: "रेलवे कॉलोनी" एक रिहाइश जिसे कोई धर्म कभी विभक्त नही कर सकता।

यह इस लेखमाला का पहला अध्याय है अतः सबसे पहले में आपका परिचय "रेलवे ट्रैफिक कॉलोनी" से करवा दूँ। जैसा कि आप जानते है भारतीय रेल विश्व की चौथी सबसे बड़ी रेल है एवम इसमें 13 लाख से अधिक कार्मिक कार्यरत है।

रेलवे के बारे में सबसे बड़ी बातें अभी कही जानी शेष है। रेलवे अपने आप में एक संसार है एवम भारतीय रेल की अपनी एक दुनिया है। एक ऐसी दुनिया जिसमें विचरण किये बिना उसको महसूस करना बड़ा मुश्किल है। रेलवे के अथाह समुंद्र से कहानियों के मोती भावनाओं से भीगो कर आप तक पहुँचाने की कोशिश करूंगा।

सबसे पहले रेलवे भारत में 1853 ईसवी में मुंबई से ठाणे तक की 34 किलोमीटर की यात्रा की थी और आज 166 वर्ष की यात्रा में भारत के 1,15,000 किलोमीटर रेलपथ के संचालन हेतु 7, 172 रेलवे स्टेशन 24 घण्टे सेवारत है। हर स्टेशन के संचालन के लिए कार्मिक है व इन कार्मिको कर रहने हेतु रेलवे की अपनी कॉलोनियों का निर्माण किया गया है।

रेलवे कॉलोनियों के बारे में।

ये मात्र चुने-गारे से बने मकानों की श्रंखला नही है बल्कि एक अजब संसार है जिसके अपने कायदे-कानून है। रेलवे के इन क्वाटर्स को सामुहिक रूप से कॉलोनी कहा जाता है। जिनमे कार्मिको हेतु लम्बे,

उच्च कार्मिको हेतु डबल, शहरी क्षेत्रों में दो मंजिला व अफसरों हेतु सुविधा युक्त बंगले होते है। कुछ विशेष क्षेत्रो में इनकी छतें गोलाकार होती है।

रेलवे की इन कॉलोनी में सभी धर्म व जातिवर्ग के लोग मिलजुल कर रहते है। ये क्वाटर इतने पास होते है कि मजाल है आप कोई व्यजंन बना ले और पडोसी को पता नही चले और आप किसी मुसीबत में हो और पूरी कॉलोनी के लोग अनजान रह जाये। यहाँ लोगो की एक ही जातिवर्ग होता है जिसकों मानवता कहते है।

इस कॉलोनी का अपना एक अनुशासन होता है जिसकों सभी स्वप्रेरणा से मानते है। रेलवे कर्मचारियों की, विशेषकर ट्रैफिक स्टाफ की, ड्यूटी अलसुबह से देर रात्रि

में कभी भी शुरू हो सकती है अतः कॉलोनी के छोटे बच्चे स्वयम ही जोर-जोर से कभी नही चिल्लाते।

रेलवे कार्मिको के बारे में सबसे बड़ी बात उनकी 24 घण्टे वाली घड़ी के टाइम के बारे में होती है। उनकी घड़ी दोपहर के चार बजाती है लेकिन उनके मुँह से 16 ओ क्लॉक निकलता है। रेलवे कॉलोनी के क्वाटर भले ही छोटे है लेकिन उनमें रहने वालों का दिल बहुत बड़ा होता है।

रेलवे में सभी धर्म व जाति के लोग काम करते है अतः एक ठीकठाक बड़ी कॉलोनी के अंदर सभी राज्यों, धर्मो व जातिवर्ग के लोगों की सामुहिक रिहाइश के कारण लोग एक दूसरे के त्यौहार का आनंद भी लेते है एवम साथ-साथ भोजन भी ग्रहण करते है।

रेलवे में शुरू से ही कार्मिको के बच्चों की शिक्षा एवम महिला विकास का बहुत ध्यान रखा गया है इसलिए रेलवे कॉलोनी में या तो रेलवे के स्वयम के स्कूल होते है अथवा स्थानीय प्रशासन को रेलवे द्वारा स्कूल खोलने हेतु सहयोग दिया जाता है। रेलवे कर्मियों की पत्नियों हेतु रेलवे प्रशासन द्वारा सहयोग दिया जाता है अतः महिला विकास समिति गठित की जाती है। बड़ी कॉलोनी में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित होता हैं।

अगले अंक में मैं आपको जोधपुर की रेलवे ट्रैफिक कॉलोनी के बारे में बतलाऊंगा जिसमे उपरोक्त सभी तथ्य सम्मिलित थे।
शेष फिर।
सादर।