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Indian Religious Tourism: Uttarakhand religious tour diary.

चार धाम यात्रा: मेरी यात्रा डायरी।

यात्रियों के बुलंद हौसले के आगे सूर्यदेव पस्त।

8 जून 2019, शनिवार, 46 डिग्री गर्म, उमस, चिपचिपाहट व भारी भीड़ के बावजूद धार्मिक यात्रा पर सम्पूर्ण देश से आये यात्रियों के हौसलो को सलाम। सभी के चेहरे पर एक सकून व विश्वास आप प्रत्यक्ष अनुभव कर सकते है।

गर्मी का यह समय निश्चित रूप से हरिद्वार में कठिन है लेकिन कुछ किलोमीटर दूरी पर पर्वतों में अथाह शांति, अपार भक्ति, अपूर्व सौंदर्य व अदभुत प्राकृतिक नजारे विद्यमान हैं।

रेलवे स्टेशन पर व्यवस्थाओं से झुंझते यात्रियों के ह्रदय में

सनातन धर्म के प्रति विश्वास, दर्शनों की उत्कंठा व महादेव-पार्वती के दर्शन की तमन्ना है। हरिद्वार में उतरने वाले हर यात्री को इस पवित्र जमीन पर उतरते हीगंगा मैया का आशीर्वाद प्राप्त होने लगता हैं।

दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सत्य है कि यहाँ हरिद्वार में एक ही स्तर की सुविधा सभी हेतु अलग-अलग दरों पर हासिल है। स्टेशन पर उतरते ही कुली से मोलभाव हो या गन्तव्य स्थान तक पहुँचने के लिए टेक्सी चालक से सर लगाना आपको आरम्भ करना पड़ेगा।

किसी अंग्रेज लेखक ने बहुत खूब तरीके से भारतीय मानसिकता वर्णीत करते हुए लिखा था कि "

भारत मे चाहे संसाधनों की कमी हो लेकिन संतोष व विश्वास प्रचुर से भी अधिक मात्रा में हैं। "

यात्री अधिक भाव देने के बाद भी यह कहते है कि " यहाँ तीन महीने का सीजन रहता है अतः स्थानीय लोग 9 महीने का खर्चा भी तो हमसे ही निकालेंगे। " कुछ यह भी कहते है कि " वो जितना चाहे उससे पचास रुपये ज्यादा दो, सबकी दीपावली रहनी चाहिए"।

मुज्जफरनगर (लीची वाला नगर) के एक सज्जन ने अवश्य कहा कि " हरिद्वार मे एक कि जगह दो डिस्ट्रिक्ट कलक्टर व्यवस्था होनी चाहिए ताकि एक बड़ा अधिकारी यहाँ आने वाले लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दिला सके!

यहाँ आने वाले यात्रियों को आप कम से कम दो वर्ग ।के विभक्त कर ही सकते है। पहला वर्ग अपने संसाधनों के दम पर गंगा स्नान के साथ उत्तराखंड के विभिन्न धामो की आरामदायक तरीके से यात्रा करता है। ऑनलाइन बुकिंग वाले इस वर्ग के अलावा यहाँ सामान्य वर्ग की बहुत बड़ी तादाद सिर्फ धार्मिक कारणों से यहाँ पहुँचती है। दूसरे वर्ग को वास्तव में नाना प्रकार की तकलीफों का सामना करना पड़ता हैं।

निश्चित रूप से हरिद्वार में सैकड़ों धार्मिक व सामाजिक संगठन यात्रियों की सेवार्थ अपने रात-दिन एक कर रहे है इसके बावजूद भी सक्षम सरकार से आम आदमी की अपेक्षा दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं।
यह लिखना भी समीचीन है कि सामाजिक सविधाएँ भी जातिवर्गो में काफी हद्द तक विभक्त है। प्राथमिक रूप से यह प्रतीत भी होती है लेकिन अंतिम रूप से तो यह कहना ही पड़ता है कि " हरि को भजे सो हरि का होई" व हरिद्वार यानी हरि की तरफ जाने वाले द्वार में बिना विभेद हर हिन्दू को न्यूनतम सुविधाएं निश्चित रूप से मिलनी चाहिए।
शेष लगातार--
सुरेन्द्र सिंह चौहान