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भारतीयता एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है (Indianness is an Important Responsibility in Hindi)

भारतीयता एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है बात बिल्कुल सीधी व सरल है लेकिन उसको हम कई प्रकार से कह सकते है। अगर घुमा-फिरा कर बताऊँ तो पूरी एक किताब इस विषय पर लिखी जा सकती है लेकिन इस बात को मैं बिल्कुल सरल, सहज व सामान्य रूप से कहना चाहूंगा।

भारतीयता एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है (Indianness is an Important Responsibility in Hindi) :

पूरा विश्व भारत को इसलिए गुरु मानता है क्योंकि भारत के पास वह ज्ञान आज भी उपलब्ध है जिससे जीवन को पूर्णता मिल सकती है। जीवन की सम्पूर्णता का ज्ञान सिर्फ इस देश मे उपलब्ध है। भारत के अलावा अगर कही जीवन की सम्पूर्णता जैसा कुछ दिखाई दे जाए तो आप मान लीजिए कि वह ज्ञान भारत से ही वहाँ गया है।

अब एक दृष्टि आप पूरी दुनिया के वर्तमान व इतिहास पर डाल कर देख लीजिए कि भारत के अलावा आपको कही भी युद्व - विनाश - पुनर्निर्माण - विकास - युद्ध - विनाश- पुनर्निर्माण का दुष्चक्र बहुतायत में मिलेगा लेकिन भारत में ऐसा नही मिलेगा। सिर्फ भारत ही वह स्थान रहा है जहाँ जीवन व मृत्यु के अलावा मोक्ष भी है। जहाँ विजय के बाद त्याग/सन्यास भी है। जहाँ तन के अलावा मन हेतु भी अनेक अभ्यास है।

आप देख लीजिए कि सोशल मीडिया पर हज़ारों की सँख्या में ऐसे वीडियो उपलब्ध है जिसमें विदेशी झूम-झूम के श्री राम

व श्री कृष्ण के भजन भज रहे है। छोटे-छोटे बच्चे मंत्रोच्चार कर रहे है। युवाओं की टीम योगाभ्यास कर रही है। डॉक्टरों की टीम मेडीटेशन पर रिसर्च कर रही है। विदेशों में भारतीय ज्ञान पर रिसर्च बड़े स्तर पर जारी है।

यह हमारे लिए बहुत खुशी की बात है लेकिन अभिमान की बात नही। भारतीय होना हमको अभिमानी नही बल्कि जिम्मेदार बनाता है। भारत हमारे लिए मात्र एक राष्ट्र ही नही अपितु हमारा सर्वस्व है। भारतीयता मात्र एक स्थिति नही अपितु जीवन दर्शन है।

आज जब सम्पूर्ण विश्व मे त्राहि-त्राहि मच रही है तो उसकी काली छाया हमारे कलेवर पर भी पड़ रही है। आज हमारा भारत भी पर्यावरणीय प्रदूषण, पूंजीवाद, अलगाववाद, आतंकवाद, सामाजिक

विषमता, उपभोक्तावाद व कुंठाओ के दंश को सह रहा है। आज भारतीयों के चेहरे में दैवीय सौंदर्य नजर नही आ रहा है। आज संतोष का स्तर भी कम हो रहा है। आज हम भी सनातनी मूल्यों को भुला कर बाजार की तेजी-मंदी की गणना करने लगे है।

इसके बावजूद भी समाधान सिर्फ इसी धरा पर मिलेगा। शांति का साधन भी इसी भूमि से जुटेगा। जीवन को पूर्णता भी इसी के दर्शन से मिलेगी। नैतिकता का उदगार भी यही से गूंजेगा। सत्यम-शिवम-सुंदरम का उदघोष भी इसी स्त्रोत से विश्व को मिलेगा। वसुधैव कुटुम्बकम की सोशल इंजीनियरिंग भी यही से होगी। संयुक्त परिवार की शिक्षा भी यहाँ से बढ़ेगी। योग, स्वाध्याय, मनन, चिंतन, व्याख्या, शास्त्रार्थ, मीमांसा, व्रत, उपवास, तप, जप, सन्यास, टीका व दर्शन भी इसी भूमि पर पल्लवित होगा।

एक भारतीय होना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। एक भारतीय से सदैव यह अपेक्षा रहती है कि वह अपने जीवन में भारत तत्व को पहचान कर उसे धारण करे व पूर्णता वरण करते हुए दूसरों की राह प्रशस्त करे।
सादर।
सुरेन्द्र सिंह चौहान।

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