कब्ज सौ बीमारियों का कारण | आइये, कब्ज समाप्ति से सम्बंधित जानकारी एक लेख में प्राप्त करते है।

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कब्ज एक सामान्य समस्या है लेकिन इसकी वजह से सौ तरह की समस्याएं शरीर मे बढ़ जाती है। वर्तमान जीवन में व्यक्ति इस कदर उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु व्यस्त है कि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जिम्मेदार व जागरूक नही है। इसी तथ्य का फायदा अनेक पक्ष लेना चाहते है। हम अपने पाठकों से निवेदन करते है कि वे अपने शरीर के प्रति ज़िम्मेदार रहकर पूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति व राष्ट्र की सेवा सुनिश्चित करे। कब्ज की बात करने से पहले एक फिल्मी बात अपने पाठकों को आज शेयर करते है।

अमिताभ बच्चन का कब्ज से रिश्ता

मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन पूर्ण गम्भीरता व वाक कौशल से अपनी बात प्रस्तुत करते है। कब्ज से लेकर उनके भी कुछ किस्से निम्नानुसार है-

अमिताभ बच्चन एक मनोवैज्ञानिक ज्योतिष भी है

अमिताभ बच्चन का केरियर जब टॉप पर था तब उनके वाक चातुर्य की वजह से भी वे हमेशा ” आकर्षण का केंद्र बिंदु ” रहते थे। वे अपने साथी कलाकारों के हाथ के पंजे को देखकर बहुत सी सटीक बाते बता दिया करते थे। एक बार उन्होंने इसका राज खोलते हुए कहा कि-

” मैं बहुत सी सामान्य बातों जैसे- आपको भविष्य में अच्छा ब्रेक मिलने वाला है, पिछला समय थोड़ा संघर्ष युक्त रहा है, पैसा आपके पास नही टिक रहा है जैसे जुमलों के साथ एक बात और जोड़ देता हूँ कि आपका पेट ठीक नही रहता है।” (स्मरण आधारित)

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अमिताभ बच्चन।

यह सही है कि भारत मे अधिकांश लोगों को पेट से लेकर कुछ समस्याएं जुड़ी रहती है व कब्ज इनमें एक प्रमुख कारण है।

“पीकू” अमिताभ ने कब्ज की वास्तविक अभिव्यक्ति के समान अभिनय किया

अमिताभ बच्चन स्टारर फ़िल्म “पीकू” एक लव स्योरी से अधिक अमिताभ बच्चन अभिनीत कब्ज से पीड़ित किरदार के लिए पहचानी जाती है।

मूल विषय कब्ज के बारे में। कब्ज के कारण।

आयुर्वेद, एलोपैथी, होम्योपैथी, प्राकृतिक या किसी भी अन्य विधि में आपको कब्ज से सम्बंधित अनेक कारण बताए जा सकते है लेकिन कब्ज के प्रमुख कारक निम्नानुसार है-

कब्ज के कारण | शारीरिक श्रम की कमी

वर्तमान आधुनिक जीवनशैली में अनेक प्रकार की आधुनिक सुख-सुविधाओं के साधनों, उपकरणों इत्यादि के कारण रोजमर्रा के जीवन मे श्रम की मात्रा बहुत सीमित हो गई है।

पुरातन समय मे व्यक्ति द्वारा प्रातः जागरण के साथ ही शारीरिक गतिविधियों का शुभारंभ कर दिया जाता था जो अब बहुत सीमित है। गाँव कस्बो के लोग पहले सुबह उठते ही निवृत्त होने के लिए गाँव कस्बे से काफी दूर पैदल चल कर जाते थे अब तो प्रत्येक घर मे शौचालय है। (लेखक का उद्देश्य शौचालय की घर मे नही होना चाहिए नही होकर सामान्य जीवन मे श्रम की बात करना है।)

इसके अलावा घर की साफ-सफाई, कपड़े धोना, परिवेश की सफाई, साइकल चलाना, स्वयं का कार्य स्वयम करना इत्यादि कारणों से प्रत्येक व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में शारिरिक श्रम करता था। शारीरिक श्रम के चलते उसके पूरे शरीर के मूवमेंट के कारण उसका पाचन तंत्र भली भांति सक्रिय रहकर अपना कार्य कर पाता था।

वर्तमान में अधिकांश कार्य वाहन, उपकरणों इत्यादि के कारण करने से सभी आयु वर्ग के लोग कम शारिरिक श्रम करते है। कम शारिरिक श्रम के कारण भोजन इत्यादि के पाचन की शक्ति व गति कम हो जाती है जिससे कालांतर में “कब्ज” इत्यादि की समस्याओं का जन्म होने लगता है।

कब्ज के कारण | भोजन के नियमों का पालन नही होना

कब्ज एक पेट की बीमारी है, जो अक्सर खराब जीवनशैली और आहार के कारण होती है। व्यस्त जीवनशैली और कुछ स्वादिष्ट खाने के चक्कर में अक्सर लोग बाहर का खाना खा लेते हैं। टेस्ट के चक्कर में हफ्ते में बाहर का खाना खा तो लेते हैं, लेकिन सेहत के लिए यह नुकसानदायक साबित होता है। गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना भी कब्ज के रोग को आमंत्रित करने के समान होता है।

कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से कब्ज के साथ मल त्याग की आवृति में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

ज्यादा तेल मसाला वाला खाना और बाहर के जंक फूड से गैस, उल्टी, ब्लोटिंग की समस्या होने लग जाती है. ऐसा खान पान में होने वाली गड़बड़ी की वजह से होता है।

कब्ज का कारण | मानसिक अवसाद अथवा परेशानी भी एक कारण

दुख, चिंता, डर, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी जैसे अनेक ऐसे कारण है जिनके कारण व्यक्ति स्वयम को थका-थका अनुभव करने लगता है एवम उसे मल त्याग की अनियमितता अनुभव होने लगती है जो कि धीरे-धीरे कब्ज में परिवर्तित हो जाती है।

कब्ज का कारण | भोजन में फाइबर की कमी होना

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। जैसे अधिक फाइबर युक्त खाना खाने से बड़ी आंत से भोजन जल्दी आगे चला जाता है और पाचन प्रक्रिया सही रहती है। आइये, समझते है कि भोजन में पाया जाने वाला फाइबर क्या है?

भोजन में फाइबर का महत्व

फाइबर कार्बोहाइड्रेट का एक ऐसा प्रकार है, जो प्रायः पौधों की पत्तियों, तने और जड़ों में पाया जाता है। इसके अलावा चोकर, साबुत अनाजों और बींस प्रजाति की सब्जियों में भी फाइबर मौजूद होता है। मूलतः फाइबर दो प्रकार के होते हैं, जो शरीर के लिए अलग तरह से काम करते हैं। पहले तरह का अघुलनशील फाइबर चोकर, मूंगफली, सूखे मेवों और पत्तेदार हरी सब्जियों में पाया जाता है। इसकी बनावट मोटी और खुरदरी होती, इसलिए यह पानी में नहीं घुल पाता और पाचन क्रिया के अंत तक साबुत रहता है। यह उत्सर्जन प्रक्रिया द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता। वहीं घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। हृदय रोग से बचाव करता है और रक्त में शर्करा की मात्रा को भी नियंत्रित रखता है। दलिया, जौ, मटर, सेम, मसूर, बीज, नींबू के फल और सेब में घुलनशील फाइबर पाया जाता है।

फाइबर युक्त खाने के लाभ

  • पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
  • पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक
  • ब्लड में शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में सहायक
  • हृदय, कैंसर आदि रोगों से बचाने में सहयोगी

फाइबर के स्त्रोत खाद्यपदार्थ

अलसी, बादाम, अनार, सूखा अंजीर, गेहूं का चोकर, बाजरा, राई का आटा, राजमा, दाल, गाजर और चुकंदर में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है। होल ग्रेन फ़ूड जैसे होल व्हीट ब्रेड, होल व्हीट पास्ता, ओटमील और ब्रान फ्लेक सीरियल्स ,ब्रोकोली, गाजर, कोलार्ड साग और हरी मटर जैसी सब्जियां भी फाइबर के उपयोगी स्त्रोत माने गए है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करने को कहते हैं। फाइबर की मात्रा अपने आहार में बढ़ाने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर में पानी की कमी न हो।

कब्ज का घरेलू इलाज | Home remedy of constipation

कब्ज को ठीक करने के लिए 8 से 10 ग्राम  मुनक्का रात में भीगोकर रख दें. फिर सुबह दूध में उबालकर खाएं और बचा दूध पी लीजिए.

रात्री में सोते समय एक गिलास गरम दूध में 2 चमम्च अरंडी का तेल मिलाकर पिएं. यह घरेलू उपाय कब्ज ठीक करने के  लिए बहुत लाभकारी है.

बेल भी कब्ज को ठीक करने के लिए बहुत उपयोगी है. आधा कप बेल का गूदा उसमें गुड़ मिलाकर शाम को भोजन से पहले खा लें. 

जीरे और अजवाइन का सेवन भूनकर या पीसकर सामान मात्रा में करने से पेट को जल्दी फायदा मिलेगा. यह कब्ज दूर करने का सबसे असरदार उपाय है.

मुलेठी भी कब्ज ठीक करने में बहुत कारगर है. एक चम्मच मुलेठी का चूर्ण ओर एक चम्मच गुड़ मिलाकर खाने से पेट को जल्दी राहक मिलती है. यह समस्या ठीक करने का सबसे आसान तरीका है.

अमरूद का फल कई स्वास्थ्य स्थितियों में कारगर होता है। इसका उपयोग कई पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत के रूप में किया जा सकता है। यह एक रेचक के रूप में कार्य कर सकता है (मल त्याग को सुविधाजनक बनाने में मदद करता है)। कब्ज को कम करने के लिए आप ताजे अमरूद का सेवन कर सकते हैं।

खजूर का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करने और कब्ज से राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकता है। सुबह पांच से छह खजूर को घी और काली मिर्च पाउडर के साथ ले सकते हैं। इसके बाद एक गिलास गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।

काले चने भून कर बारीक पीस लें. इस चूर्ण को छाछ के साथ लेने से कब्ज दूर होती है।

पान का पत्ता कब्ज को दूर करने में भी मदद कर सकता है। प्रत्येक भोजन के बाद कुछ ताजी पान के पत्तों को चबाने से पाचन में मदद मिलती है और कब्ज से राहत मिलती है। 

थोड़ी मात्रा में सूखी अरंडी की जड़ लें और इसे एक महीन पाउडर में पीस लें। इस चूर्ण को एक गिलास दूध में मिला लें। इस मिश्रण को उबालकर इसकी शुरुआती मात्रा का आधा कर दें। कब्ज दूर करने के लिए इस मिश्रण का सेवन करें। 

भोजन खूब चबा-चबाकर करने की आदत का विकास करना चाहिए। भारतीय आयुर्वेद के विशेषज्ञों का मत है कि ” भोजन को पानी की तरह पीना चाहिए।” यहां पानी की तरह पीने से यह मतलब है कि यदि हम भोजन को खूब चबा-चबाकर खाते है तो भोजन का कोर में इतनी लार मिल जाती है कि लगता है कि हम भोजन को पी रहे है। ऐसा करने से पाचन तंत्र को लिया गया भोजन पचाना बहुत आसान रहता है।

कब्ज के घरेलू इलाज के क्रम में पपीता बहुत उपयोगी है। अनेक लोग इसका दिन में एक बार पपीते नका इस्तेमाल अवश्य करते है।

कब्ज होने से कैसे बचें।

कब्ज से दूर रहने के लिये आप नियमित रूप से व्यायाम करें। प्रतिदिन अधिक मात्रा में पानी पिएं और भोजन में अधिक फाइबर खाएं। सप्ताह में कम से कम 3 या 4 बार चलने, तैरने या कुछ सक्रिय गतिविधि करने की कोशिश करें।

अगर आपको बाथरूम जाने की हाजत हो तो जाइए। प्रतीक्षा न करें या वेग को रोककर न रखें।

आप अपनी आंतों को अधिक नियमित होने के लिए भी प्रशिक्षित कर सकते हैं। यदि आप हर दिन एक ही समय पर शौच जाने की आदत विकसित कर लेते है तो आपके शरीर को इसकी आदत हो जाएगी ।

मानव पाचन तंत्र ( Human Digestive System )

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मानव पाचन तंत्र ( Human Digestive System )

हमारे पाचन तंत्र में छोटी आंत, बड़ी आंत, लीवर, मुंह, गला, भोजन नली सभी शामिल होते हैं।हमारे शरीर में पाचन दो तरह से होता है। पहला प्रकार होता है मैकेनिकल और दूसरा प्रकार होता है केमिकल। मैकेनिकल पाचन होता है, जब हम तोड़कर, चबाकर और दांतों के जरिए महीन पीसकर भोजन खाते हैं। जब दांत से पिसने के बाद भोजन पेट में चला जाता है तब इसे पचाने के लिए केमिकल प्रॉसेस शुरू होती है।

अस्वीकरण

सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. यह वेबसाइट इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

सन्दर्भ सूत्र

https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000120.htm

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