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International Girl Child Day 2020

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11 अक्टूबर 2020 : अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

11 अक्टूबर 2020 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के सम्बंध में राजस्थान में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किये जाने कार्यक्रमो की जानकारी-

सत्र 2020-21 में अन्न्तराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम है-

"मेरी आवाज : एक समान भविष्य"

"मेरी आवाज : एक समान भविष्य" विषय पर निबंध/ लेख प्रतियोगिता (हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में) ,स्लोगन , कविता ( स्वरचित),चित्रकला, पोस्टर निर्माण इत्यादि गतिविधि आयोजित की जाएगी।

11 अक्टूबर 2020 को रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 10 अक्टूबर 2020 को सभी प्रकार के विद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मुख्य रूप से ऑन लाइन प्रतियोगिता आयोजित की जानी है और शपथ ली जानी है और भी अन्य रचनात्मक एक्टिविटी की जा सकती है।

विभाग द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण सन्देश

आपको एक घंटे के नाम पर ज़ूम वेबिनार में आमंत्रित किया जाता है
*अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस*
दिनांक: 11 अक्टूबर, 2020
समय: दोपहर 12:00 बजे से भारत
मुख्य संदेश: माननीय शिक्षा मंत्री महोदय

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा दोपहर 12 से 1 बजे तक एक घंटे का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम *"मेरी आवाज: हमारा समान भविष्य"* के विश्व थीम पर है।
यह कार्यक्रम सरकारी अधिकारियों से बच्चों की आवाज और संदेश सुनने का अवसर देगा।

सभी जिला अधिकारियों , ADPC कार्यालय और ब्लॉक कार्यालय, PEEOs, प्रिंसिपल, शिक्षकों और छात्रों को वेबिनार में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
कृपया वेबिनार में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
https://youtube.com/channel/UCCBaPD0zr1-1T4I5JqO8guA

विषय सम्बंधित सामग्री

बहुत दुख का विषय है कि आज इकीसवीं शताब्दी में भी हमें बालिकाओं के हितों हेतु चिंतन मनन करना पड़ रहा है। सम्पूर्ण विश्व की बालिकाओ को भ्रूण हत्या, बाल विवाह, यौन शोषण, भेदभाव जैसी समस्याओं से दोचार होना पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 19 दिसंबर 2011 को इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें बालिकाओं के अधिकारों एवं विश्व की उन अद्वितीय चुनौतियों का जिनका कि वे मुकाबला करती है, को मान्यता देने के लिए 11 अक्टूबर 2012 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया था।

भारत में लड़कियों की स्थिति

वर्ष 2011 जनगणना में भारतीय महिलाओं की स्‍थिति में सुधार के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के सुखद परिणाम दिखाई दिए। महिला साक्षरता दर बढ़कर 65.5 प्रतिशत हो गई है, जबकि समग्र साक्षरता दर (पुरूष साक्षरता दर 82.1 प्रतिशत) बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है। हालांकि महिलाओं की साक्षरता दर में काफी वृद्धि हुई और अंतर कम भी हुआ है पर यह गैप अब भी बना हुआ है। (आंकड़े 2018 वर्ष से सम्बंधित)
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, महिला साक्षरता की दर केरल में सबसे अधिक 92 प्रतिशत और राजस्थान में सबसे कम 52.7 प्रतिशत है। भारत की घनी आबादी वाले राज्य जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में महिला साक्षरता की दर बहुत कम क्रमशः 59.3 प्रतिशत और 53.3 प्रतिशत है। इसका सीधा संबंध सेहत और शिशु मृत्यु दर से है। केरल की शिशु मृत्यु दर सबसे कम और उत्तर प्रदेश और बिहार की शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है।
अगर लिंगानुपात की बात की जाए तो हालात अत्यंत चिंताजनक हैं यह अनुपात अभी प्रति 1000 पुरुषों पर 940 महिलायें है। लिंग अनुपात के गणना विभिन्न आयु वर्गों, अत्यधिक महत्वपूर्ण आयु 0-6 वर्ष, के लिए भी की जाती है।

विश्वपटल पर बालिकाओं की दशा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बाल विवाह बांग्लादेश में होते हैं और इसके बाद दूसरे नंबर पर भारत का नाम आता है। बाल-विवाह के मामलों में पहला स्थान पश्चिम बंगाल, दूसरा बिहार व तीसरा स्थान झारखंड का है।

लड़कियों स्थिति में सुधार कैसे हो?

लड़कियों के लिये ये बहुत जरुरी है कि वो सशक्त, सुरक्षित और बेहतर माहौल प्राप्त करें। उन्हें जीवन की हर सच्चाई और कानूनी अधिकारों से अवगत होना चाहिये। उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिये कि उनके पास अच्छी शिक्षा, पोषण, और स्वास्थ्य देख-भाल का अधिकार है। जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें बहुत अच्छे से कानून सहित घरेलु हिंसा की धारा 2009, बाल-विवाह रोकथाम एक्ट 2009, दहेज रेकथाम एक्ट 2006 आदि से अवगत होना चाहिये।
आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा बालिकाओं के हितार्थ अनेकानेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

आज की बालिकाएं।

आज की बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है चाहे वो क्षेत्र खेल हो या राजनीति, घर हो या उद्योग। खेलों की दुनिया में अगर साइना नेहवाल, दीपा करमाकर, साक्षी मलिक, पी वी संधू जैसी लड़कियां अपना हौसला दिखा रही हैं तो वहीं कई अन्य स्तरों पर विभिन्न लड़कियां समाज की मुख्यधारा में अपना रुतबा बढ़ा रही हैं।

इतिहास:

इसे पहली बार एक गैर-सरकारी संगठन "प्लान इंटरनेशनल" द्वारा शुरू किया गया था। लड़कियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए "क्योंकि मैं एक लड़की हूँ" नाम से एक अभियान की शुरूआत
की गयी। इसके बाद इस अभियान को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कनाडा सरकार से सम्पर्क किया।
कनाडा सरकार की एक मंत्री रोना अम्ब्रोस ने 55वें आम सभा के सामने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया।

19 दिसम्बर 2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित किया जिसमें 11 अक्टूबर को अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में चुना गया। प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया। जिसका विषय था "बाल विवाह समाप्त करना"!

उदेश्य:

इस दिवस का प्रमुख उदेश्य बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना है तथा उन्हें शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सुविधा, कानूनी अधिकार तथा भेदभाव से संरक्षण उपलब्ध करवाना है।

अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 2019: Girl Force : Unscripted and Unstoppable

सन् 1995 में चीन के बीजिंग शहर में चौथे महिला विश्व सम्मेलन में 200 देशों की लगभग 30 हजार लड़कियों और महिलाओं ने अपने अधिकारों को मानवाधिकार के रूप में मान्यता देने का संकल्प लिया था। वहां उपस्थित लड़कियों और महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि वे अप्रकाशित और अजेय है। ये शब्द ही 2019 के अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य बिन्दु बना - 'बालिका शक्ति : अलिखित एवं अविरल' है।

शिक्षा विभाग, राजस्थान:

शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार ने 11 अक्टूबर 2019 के अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस को 'बालिकाओं की उपलब्धियों का उत्सव' के उदेश्य के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग ने संस्था प्रधानों को निर्देशित किया है कि वे इस दिन को विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं के नाम करें। विद्यालय संचालन का काम इन बालिकाओं को देखें। मीना मंच, गार्गी मंच की मदद से कविता, स्लोगन प्रतियोगिता तथा अन्य अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत किया जाए।

11अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन *बालिकाओं की उपलब्धियों का उत्सव* के उद्देश्य से मानने बाबत।

राजस्थान शिक्षा विभाग में आयोजित होने वाली गतिविधियों पर एक नजर।

11 अक्टूबर 2018 अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन "शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर के" उद्देश्य से उत्सव मनाने के क्रम में आदेश जारी किए है।
"मेरी उड़ान मेरी पहचान"
उक्त विषयार्तगत समस्त विद्यालयों में 11 अक्टूबर को बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने हेतु विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सभी बालिकाओं को अपनी क्षमताओं को समझने अपने सपनों को बुनने और जीवन में आत्मनिर्भर बनने की संभावनाओं को तलाशने के अवसर दिये जाने की पहल होगी।

सत्र 2018-19 में 11 अक्टूबर की थीम होगी - "मेरी उड़ान मेरी पहचान" को समस्त विद्यालयों में मीना मंच एवं गार्गी मंच के माध्यम से अध्यापिका मंच का सहयोग लेते हुये विभिन्न गतिविधियों का संचालन