International Intellectual Property lndex: IP, Need, Process and Indian Rank

अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा सूचकांक: सूचकांक निर्माण विधि, आवश्यकता व स्तिथि सुधार।

यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स के ग्लोबल इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी सेंटर द्वारा अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा सूचकांक का प्रकाशन किया है। सूचकांक में अमेरिका पहले, ब्रिटेन दूसरे, स्वीडन तीसरे, फ्रांस चौथे और जर्मनी पांचवें स्थान पर रहा है। भारत को 36 वां स्थान मिला है।

बौद्धिक संपदा सूचकांक निर्माण की आवश्यकता।

प्रत्येक राष्ट्र के नागरिकों में बौद्धिक क्षमता होती है एवम वे इसका राष्ट्र व व्यक्तिगत हितार्थ उपयोग करते है। बौद्धिक क्षमतावान व्यक्ति अथवा संस्था को उसके प्रयासों का प्रतिफल भी मिलना चाहिए अन्यथा नैराश्य भाव विकसित होता है।

बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा हेतु प्रत्येक राष्ट्र द्वारा कानून बनाकर व वातावरण निर्माण करके सुरक्षा की जाती है। इन प्रयासों को निरन्तर तेज करने की आवश्यकता है एवम इन्ही प्रयासों के आकलन के लिए इस सूचकांक का निर्माण किया जाता है।

बौद्धिक सूचकांक का निर्माण कैसे होता है?

इस सूचकांक को बनाने के लिए विभिन्नसंकेतकों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है और देशों द्वारा प्रत्येक श्रेणी में अर्जित अंकों के आधार पर मुख्य सूचकांक को बनाया जाता है। इस सूचकांक के निर्माण हेतु प्रत्येक वर्ष अलग थीम रखी जाती है। सन 2018 में थीम “सृजन” रखी गई थी।

सूचकांक के संकेतकों में पेटेंट, कॉपीराइट और व्यापार गोपनीयता का संरक्षण आदि शामिल हैं।
सूचकांक बनाने में इन देशों को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क सुरक्षा जैसे नवाचार के लिए जरूरी 30 मानकों पर परखा जाता है।

सूचकांक में भाग लेने वाले देश।

प्रत्येक वर्ष इस सूचकांक में भाग लेने वाले देशों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। 2017 में 45 देशों, 2018 में 50 देशों व 2019 हेतु देशों ने भाग लिया है।

भारत मे बौद्धिक संपदा सुरक्षा।

सम्पूर्ण विश्व मे भारत को एक बौद्धिक राष्ट्र के रूप में मान्यता प्राप्त है लेकिन अभी हमको बौद्धिक संपदा सरंक्षण सूचकांक में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
2018 में भारत को 44 वां स्थान हासिल था एवम 2019 में हमने 8 स्थानों की छलांग लगाकर 36 वां स्थान अर्जित कर लिया है।

भारत मे इस दिशा में करणीय कार्य।

इस सम्बंध में यह आवश्यक है कि हम हमारे पेटेंट्स, कॉपीराइट लेने की प्रक्रिया को सरल, सस्ती व सुलभ करे एवम इसके उल्लंघन पर कठोर रोक स्थापित करे। विश्विद्यालय व कॉलेज स्तर पर शोध व अनुसंधान की सुविधाएं व बजट बढ़ोतरी के साथ ही हमारी रिसर्च व नवाचार कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करते हुए सुरक्षित रखे।

भारतीय स्कुलों में आरम्भिक स्तर पर ही विज्ञान, गणित व अन्य क्षेत्रों में नवाचारों, प्रायोगिक, व्यवहारिक कार्यो को महत्व प्रदान करते हुए विद्यार्थियों को उनके द्वारा किये गए प्रयासों की सुरक्षा हेतु उपलब्ध कानूनी सुविधाओं की जानकारी प्रदान की जाए।

बौद्धिक संपदा सूचकांक में रैंकिंग विकास से ना केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ेगी साथ ही भारतीय औद्योगिक, वाणिजियक व शैक्षणिक विकास को भी आधार प्राप्त होगा।

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