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जायफल के फायदे नुकसान व उपयोग (Jaiphal Benefits and Side Effects)

जायफल के फायदे नुकसान व उपयोग - जायफल एक सदाबहार पेड़ होता है इससे दो मसाले प्राप्त होते हैं 1. जायफल (Nutmeg) 2. जावित्री (Mace) जायफल चीन, ताइवान, मलेशिया, ग्रेनाडा, केरल, श्रीलंका, और दक्षिणी अमेरिका में भरी मात्रा में पैदा होता है। मिरिस्टिका नामक वृक्ष से जायफल तथा जावित्री प्राप्त होती है। मिरिस्टका की अनेक जातियाँ होती हैं परंतु जायफल अधिकांश मिरिस्टिका फ्रैग्रैंस से प्राप्त होता है।

मिरिस्टिका प्रजाति की लगभग 80 जातियाँ होती हैं जो भारत, आस्ट्रेलिया तथा प्रशंत महासागर के द्वीपों में उपलब्ध हैं। यह पृथग्लिंगी (डायोशियस, Dioecious) वृक्ष है। इसके पुष्प छोटे, गुच्छेदार तथा कक्षस्थ (एक्सिलरी, Axillary) होते हैं। मिरिस्टिका वृक्ष के बीज को जायफल कहते हैं। यह बीज चारों और से बीजोपांग (Aril) के द्वारा ढँका रहता है। यह बीजोपांग व्यापारिक महत्व का पदार्थ जावित्री है।

इस वृक्ष का फल छोटे-से नाशपाती के रूप का 1 इंच से 1.5 इंच तक लंबा, हल्के लाल या पीले रंग का गूदेदा होता है। परिपक्व हो जाने पर यह फल दो भागों में बँट जाता है और अंदर सिंदूरी रंग का बीजोपांग या जावित्री दिखाई देने लगती है। जावित्री के अंदर गुठली होती है जिसके काष्ठवत् खोल को तोड़ने पर अंदर से जायफल (Nutmeg) प्राप्त होता है।Jaiphal (जायफल) का पेड़ समुद्रतट से 400 से 500 फुट तक की ऊँचाई पर उष्णकटिबंध की गर्म तथा नम घाटियों में पैदा

होता है। इसकी प्राप्ति के लिये जल-निकास-युक्त गहरी तथा उर्वरा दूमट मिट्टी उपयुक्त होती है।

इसके पेड़ 6-7 वर्ष की आयु प्राप्त होने पर फलते-फूलते हैं। फूल लगने से पहले नर या मादा पेड़ को पहचानना कठिन होता है। ग्रैनाडा में साधारणत: नर तथा मादा पेड़ 3:1 के अनुपात में पाए जाते हैं जमैका के वनस्पति उद्यान में जायफल के छोटे पौधों पर मादा पेड़ की टहनी कलम करके मादा पेड़ की संख्यावृद्धि में सफलता प्राप्त की जा चुकी है

Jaiphal (जायफल) एक जड़ी-बूटी है इसका प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है। जायफल की दो प्रजातियां होती हैं जो इस प्रकार हैंः

  1. जायफल
  2. जंगली जायफल

जायफल के फायदे नुकसान व उपयोग (Jaiphal Benefits and Side Effects) :

जायफल का पेड़ हमेशा हरा-भरा रहने वाला और सुगन्धित पेड़ होता है। जायफल पेड़ के तने शयामले रंग के होते हैं, जिसमें बाहर छिद्र होते है। अन्दर लाल रंग के द्रव्य होते हैं। इनके पत्ते लम्बे और भालाकार (भाले के आकार के ) होते हैं। इनके फूल(Mace flower) छोटे, सुगंधित और पीले-सफेद रंग के होते हैं। ये गोलाकार, अण्डाकार लाल और पीले रंग के होते हैं ।

फल के पकने पर वह दो भागों में बँट जाता है, जिसमें जायफल निकलता है। जायफल पर चारों ओर से घेरे हुए लाल रंग का कड़ा मांसल कवच होता है जिसे जावित्री कहा जाता है

ये अण्डाकार, गोल और बाहर से शमायला रंग के सिकुड़े हुए, और तीव्र गन्धयुक्त होते हैं

जायफल के अनेक भाषाओं में नाम कुछ इस प्रकार है:

  • Hindi (हिंदी)= जायफल, जायफर
  • English(अंग्रेजी)= नट् मेग (Nutmeg), फॉल्स एरिल (False aril), प्रैंग्रैन्ट नट ट्री (Fragrant nut tree), ट्रू नटमेग (True nutmeg), मैक ट्री (Mac tree)
  • Sanskrit(संस्कृत)= जातीफल, मालतीफल
  • Oriya(ओरिया )= जायफोलो (Jaipholo)
  • Kannada(कनाडा )= जाजीकाय (Jajikaya)
  • Gujarati(गुजराती )= जायफल (Jayaphal)
  • Telugu(तेलुगु)= जाजीकाय (Jajikaya), जाजीपत्री (Jajipattiri)
  • Tamil (तमिल)= अडिपलम (Adipalam), अट्टिगम (Attigam)
  • Nepali (नेपाली)= जाइफल (Jaiphal);
  • Punjabi(पंजाबी)= जयफल (Jayphala)
  • Marathi (मराठी)= जायफल (Jayaphala), बांडा जायफल (Banda jayaphala)
  • Malayalam (मलयालम)= जाति (Jati)
  • Arabic (अरेबिक)– जीआन्सीबेन (Jiansiban), जोउजबाव्वा (Jouzbawwa)

जायफल के फायदे (Jaiphal Benefits and Uses in Hindi) :

  • हिचकी आने पर
  • सरदर्द होने पर
  • मुँह के छाले होने पर
  • बच्चों के दस्त लगने पर
  • नींद न आने पर
  • सर्दी व ज़ुखाम होने पर
  • कील - मुँहासे होने पर
  • गैस/कब्ज़ की तकलीफ़ होने पर
  • मुँह की दुर्गन्ध/ फीकापन लगने पर
  • दाँतो में दर्द होने पर
  • कमर दर्द होने पर
  • बच्चों के दुध न पचने पर
  • भूख ना लगने पर
  • जोड़ों का दर्द होने पर
  • नपुंसकता/ शीघ्रपतन होने पर
  • दुर्बलता/ कमज़ोरी होने पर
  • घाव होने पर
  • दाँतो के कीड़े लगने पर
  • आँखों का संक्रमित होने (आँख आना) पर प्रयोग
  • दमा होने पर
  • खाँसी होने पर
  • अफ़ारा (गैस का बनना) के होने पर
  • गर्भधारण होने पर
  • उल्टी (चमन) होने पर
  • आमातिसार होने पर
  • कान की सूजन / गांठ होने पर
  • संग्रहणी (पेचिश) होने पर
  • बालों की समस्या के लिए
  • स्तनपान बंद करवाने के लिए
  • चेहरे के दाग धब्बे हटाने के लिए
  • प्यास लगने की परेशानी के लिए
  • लकवा पीड़ितों के लिए

जायफल के उपयोगी भाग (Useful Parts of Jaiphal in Hindi) :

  1. बीज (नटमेग)
  2. बीजचोल (मेस)
  3. तेल

जायफल का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Consume Jaiphal in Hindi?) :

  1. Jaiphal (जायफल) चूर्ण  (Ground nutmeg) = 0.5 से 1 ग्राम तक
  2. तेल= 1 से 3 बुँदे

किसे जायफल का उपयोग नहीं करना चाहिए? (Who Should Not Use Jaiphal in Hindi?) :

  1. महिलाओं को Jaiphal (जायफल) का प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए।
  2. जिन्हें एलर्जी की शिकायत रहती है, उन्हें चिकित्सक से सलाह/ परामर्श लेकर Jaiphal (जायफल) का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा संबंधित विकार पैदा हो सकते हैं।

जायफल के साइड इफेक्ट (Jaiphal Side Effects in Hindi) :

  • Jaiphal (जायफल) को 5 ग्राम या अधिक मात्रा का प्रयोग करने से
    • हिचकी आना
    • अधिक प्यास लगना
    • पेट दर्द होना
    • मानसिक विकार होना
    • व्याकुलता होना
    • बेहोशी आना
    • द्विरूपता (Double vision) आना
    • लीवर से जुड़ी परेशानी होना
  • Jaiphal (जायफल) के अधिक उपयोग से मृत्यु भी हो सकती है।
  • Jaiphal (जायफल) के Beens (बीज) का चूर्ण अधिक कामोत्तेजक होता है इसका अधिक मात्रा में प्रयोग नुकसान पहुंचा सकता है

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जायफल कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Jaiphal Found or Grown in Hindi?) :

जायफल की खेती कई स्थानों पर की जाती है। भारत में Jaiphal (जायफल) 750 मीटर तक की ऊँचाई पर Jaiphal (जायफल) का पेड़ (nutmeg tree) होता है। Jaiphal (जायफल) का पुष्पकाल एवं फलकाल दिसम्बर से मई तक होता है। विश्व में मलाया, प्रायद्वीप, सुमात्रा, जावा, सिंगापुर, श्रीलंका, वेस्टइडीज में कृषित और दक्षिण और पूर्वी मोलूक्कास में मिलता है।