सफलता की यात्रा | आइये, हर हाल में सफलता प्राप्त करें ।

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प्रिय विद्यार्थियों,

आज सबसे पहले हम बात करते है कि सफलता का पहला मूल मंत्र क्या है? हालांकि सफलता खुद में एक विषय है व इस पर भी बात की जानी चाहिए! सफलता क्या है? सफलता की परिभाषा क्या है? सफलता सबके लिए अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग होती है। एक व्यक्ति के लिए भी अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग हो सकती है। सफलता काल, समय व स्थान के आधार पर भी अलग-अलग हो सकती है।

आइये, आज हम सफलता का अर्थ आपके विवेक पर छोड़ देते है। मोटे तौर पर सफलता से आशय यह है कि कोई व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, मनोवैज्ञानिक, शारीरिक व संवेगात्मक रूप से अपने आप से सन्तुष्ट हो। अपने कार्यो व परिणामो से खुद को सन्तुष्ट अनुभव करे। उसके मन मे कोई पश्चाताप, ग्लानि या नकारात्मकता नही हो तथा अगर हो तो कम हो। इतनी कम हो कि वह उस पर नियंत्रण कर सके।

आप सभी अभी विद्यार्थी है अतः अभी आपके लिए सफलता का अर्थ प्राथमिक तौर पर उस परीक्षा में अच्छे परिणाम लाना है जिस परीक्षा में आप इस सत्र में प्रवेश हो रहे है। आपको इस परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मैं अपनी बात को वापस दोहरा देता हुँ –

“आपको परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।”

ऊपरोक्त पंक्ति (लाइन/स्टेटमेंट) को आप दो-तीन बार पढ़ लीजिए। मैने स्पष्ट रूप से लिखा है कि ” अपना सर्वश्रेष्ठ ” प्रदर्शन करना है ना कि कक्षा या स्कूल या बोर्ड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। आप तो बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करे। अपने साथियों व सहपाठियों को सहयोग जरूर दे व आवश्यक होने पर उनसे सहयोग भी ले लेकिन प्रतिस्पर्धा आपको उनसे नही करनी है। आज के जमाने मे हर जगह प्रतिस्पर्धा है लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि आपको प्रतिस्पर्धा करनी है लेकिन दुसरो से नही। जब दूसरों से प्रतिस्पर्धा नही करनी है तो किससे करनी है। बता देता हूँ-

” आपकों स्वयं से प्रतिस्पर्धा करनी है।”

आपको स्वयं से ही प्रतिस्पर्धा करनी है। आपको रोजाना खुद को थोड़ा सा बेहतर बनाना है। आप भगवान के द्वारा बनाये गए एक ऐसे शख्स हो जो अनमोल है। बेजोड़ है। स्पेशल है। आप जैसा दूसरा कोई नही है व किसी भी दुसरे की परिस्थिति व क्षमताएं भी आप जैसी नही है अतः किसी दूसरे से मुकाबले का या प्रतिस्पर्धा का तो प्रश्न ही नही उठता है। दूसरे से प्रतिस्पर्धा नही करनी है लेकिन प्रतिस्पर्धा में तो रहना ही पड़ेगा अतः आप खुद को ही अपना प्रतिस्पर्धी बना ले। आप रोजाना अपने आज को बीते हुए कल से बेहतर बनाये।

सफलता की तैयारी

आप अपनी सफलता की तैयारी आरम्भ करें। सफलता की तैयारी के लिए सबसे पहले आपके पास एक दृढ़ निश्चय व परम् सदविश्वास होना चाहिए। आपको सफल होने के लिए दृढ़ निश्चय की प्रथम आवश्यकता है। अगर आप दृढ़ निश्चय नही करेंगे अथवा मन मे सफलता के प्रति निश्चय भाव नही लाएंगे तो सफलता कैसे मिलेगी?

दृढ़ निश्चय की कहानी

अभी इन दिनों में एक नॉवल बहुत सक्सेसफुल है। इस उपन्यास की चर्चा विद्यार्थियों में बहुत अधिक हो रही है। सबसे पहले आपको मैं इस नॉवल (उपन्यास ) का नाम बता देता हूँ। इस उपन्यास का नाम है-

टुवेल्थ फेल

जी हाँ, उपन्यास का नाम यही है। यह एक ऐसे विद्यार्थी की कहानी है जो बीहड़ क्षेत्र से था। यह 12 वी कक्षा में सिर्फ हिंदी विषय मे ही उतीर्ण हुआ बाकी सब विषय मे उसका डिब्बा गोल हो गया था। “डब्बा गोल” तो आप समझते ही होंगे? डब्बा गोल का मतलब है कि सभी विषय मे फेल हो गया था लेकिन आज वह व्यक्ति आईपीएस अधिकारी है तथा कई जिलों में पुलिस के कप्तान के रुप मे काम करके वह सफलता की एक पहचान बन गया है। उसकी धर्मपत्नी भी एक बड़ी अधिकारी है। आइये, इस उपन्यास का कवर पेज देख लेते है।

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“ट्वेल्थ फेल”

इस उपन्यास को आपको पढ़ना चाहिए। हालाँकि इस उपन्यास को अभी मैने पढा नही है लेकिन इस इस उपन्यास के लेखक अनुराग पाठक, हीरो व हीरो के मेंटर टीचर विकास दिव्यकिर्ति का भाषण एक वीडियो में देखा है। आइये, मैं आपको उस वीडियो का लिंक देता हूँ।

आप इस लेख को पढ़े इसमें हमने मनोज कुमार शर्मा के संघर्ष पर आधारित ” ट्वेल्थ फेल “ का लिंक दिया है।

” ट्वेल्थ फेल” से सम्बंधित वीडियो को देखे।

https://shivira.com/watch-meet-12th-fail-dig-mr-manoj-kumar-sharma-on-youtube/

आपको मैने दृढ़ निश्चय पर बात की। इसी बीच मे मनोज शर्मा का जिक्र आया। उसके वीडियो का लिंक हमने शेयर किया। यह पक्की बात है कि इस प्रक्रिया में आप थोड़े भटक गए होंगे। अगर भटक गए तो कैसे काम चलेगा। एक बार फिर अपनी बात दोहरा देता हूँ कि-

” सफलता के लिए आपमें सबसे पहले दृढ़ निश्चय होना चाहिए।”

परम सदविश्वास

सफलता के लिए पहली चीज जरूरी है ” आपका दृढ़ विश्वास”। इसके बाद आपमें होना चाहिए ” परम् सदविश्वास”।

परम सदविश्वास से मतलब है कि आपके अंदर अपने गुरु, अपनी पाठशाला, अपनी पुस्तक, अपने परिवेश, अपने आप पर यह विश्वास होना चाहिए कि आप जिन साधनों का इस्तेमाल कर रहे है, जिनसे सिख रहे वे श्रेष्ठ ही नही सर्वश्रेष्ठ है।

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ-

” एक बार किसी गांव में एक संत आये।उस गांव में अकाल पड़ा हुआ था। लोग पानी के लिए तरस रहे थें। जब सन्त ने यह देखा तो उन्होंने सभी ग्रामीणों को एकत्र करके कहा कि ” आप सभी लोग कल शाम को मंदिर में आना। हम सब प्रार्थना करेंगे। भगवान हम पर प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे।”

अगले दिन सभी लोग एकत्र हुए। लोगो ने प्रार्थना की। एक दो घण्टे की प्रार्थना के बाद अचानक लोगो ने देखा कि आसमान में काले-काले बादल छाने लग गए है तथा वर्षा भी आने लगी है।

” सभी लोगो ने प्रसन्न होकर सन्त को धन्यवाद देना आरम्भ किया। तब सन्त ने लोगो से कहा कि आज वर्षा मेरे ज्ञान से नही बल्कि किसी और कारण से हुई है। लोगो के पूछने पर सन्त ने जो कारण बताया, आप उसे सुनिए-

सन्त ने कहा ” आज वर्षा एक छोटे बच्चे के विश्वास के कारण हुई है क्योंकि कल मैने कहा था कि हम भगवान की प्रार्थना करेंगे तब भगवान प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे। आप सब आये व प्रार्थना भी की लेकिन भगवान ने वर्षा उस छोटे बच्चे के विश्वास को बनाये रखने के लिए की, क्योंकि-“

” वह छोटा बच्चा अपने साथ छाता लाया था, उसे अपनी प्रार्थना पर व अपने भगवान पर सदविश्वास था। “

निष्कर्ष

प्रिय विद्यार्थियों, हम आगे बात करेंगे कि कैसे सफल हो लेकिन अगली बात सुनने से पहले आपको खुद में दृढ़ निश्चय सदविश्वास बनाये रखना हैं।

बाकी कल-

धन्यवाद

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