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कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) Date, Quotes, Essay | Kargil Vijay Diwas 2021

कारगिल विजय दिवस(Kargil Vijay Diwas), यह दिन सम्पूर्ण देशवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और इस ख़ास दिन को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस महत्वपूर्ण दिन के बारे में सभी को पता भी होना चाहिए कि आख़िरकार यह दिवस क्यों मनाया जाता हैं और इस ख़ास तारीख पर ही क्यों? यदि आपको भी नहीं पता हैं कि कारगिल विजय दिवस क्यों मनाया जाता हैं तो आप इस Article को अंत तक जरूर पढ़ें।

कारगिल विजय दिवस(Kargil Vijay Diwas) कब मनाया जाता हैं?

कारगिल विजय दिवस(Kargil Vijay Diwas) प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। 26 जुलाई 1999 को भारत और पाकिस्तान के मध्य हुए कारगिल युद्ध का अंत हुआ था तथा भारत ने इस युद्ध में विजय हासिल की थी इसीलिए प्रति वर्ष इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में सम्पूर्ण देश में इसको मनाया जाता है।

कारगिल युद्ध (Kargil War) का घटनाक्रम-

Date (तिथि)Event (घटनाक्रम)
03 मई 1999 एक चरवाहे ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ कर कब्जा जमा लेने की सूचना दी।
05 मई 1999 भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम जानकारी लेने कारगिल पहुँची तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और उनमें से 5 की हत्या कर दी।
09 मई 1999 पाकिस्तानियों की गोलाबारी से भारतीय सेना का कारगिल में मौजूद गोला बारूद का स्टोर नष्ट हो गया।
10 मई 1999 पहली बार द्रास, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारतीय सैनिकों द्वारा देखा गया।
26 मई 1999 भारतीय वायुसेना को कार्यवाही के लिए आदेश दिया गया।
27 मई 1999 युद्ध में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया।
26 जुलाई 1999 कारगिल युद्ध आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया । भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना को हरा दिया और कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त कर ली |

कारगिल विजय दिवस(Kargil Vijay Diwas) Essay (निबंध)-

Kargil vijay diwas(कारगिल विजय दिवस)

कारगिल विजय दिवस पर निबंध (Kargil Vijay Diwas Essay in Hindi) में हमने इस युद्ध के दिन, इतिहास और इसमें घटित महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जानकारी दी है। इसमें हमने बताया हैं कि इस युद्ध के होने के क्या कारण थे, किसके मध्य यह युद्ध लड़ा गया, युद्ध कि शुरुआत कब हुई, युद्ध में कितना नुकसान हुआ, कितने समय तक यह युद्ध चला और उस दौरान क्या-क्या घटनाएं घटित हुई तथा इस युद्ध में किसने विजय हासिल की।

Kargil Vijay Diwas Essay In Hindi-

कारगिल विजय दिवस प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता हैं। कारगिल विजय दिवस, कारगिल युद्ध की जीत की ख़ुशी में और शहीद सैनिकों की याद में मनाया जाता हैं। कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान की सेना के मध्य लड़ा गया था। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान की सेना को कारगिल युद्ध में परास्त किया था। प्रतिवर्ष इस दिन को हमारे देश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता हैं तथा युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती हैं। इस दिन देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,सेना के अधिकारी और सम्पूर्ण देशवासी सेना के शौर्य को सलाम करते है तथा शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं।


वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला था, इसमें भारत ने विजय जरूर हासिल की थी लेकिन कई सैनिक भारतीय सेना के भी शहीद हुए थे। विषम परिस्थितियों में भी भारतीय सेना ने वीरता का परिचय देते हुए और अपनी जान की परवाह किये बिना देश के लिए यह युद्ध लड़ा। इस युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है।

भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर स्थित कारगिल दुनिया के सबसे ऊंचे और विषम मौसम परिस्थितियों वाला युद्ध मैदान है। 1999 में भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ कारगिल युद्ध टाइगर नामक पहाड़ी पर हुआ था जो श्रीनगर से 205 किलोमीटर की दूरी पर है। टाइगर पहाड़ी पर मौसम बहुत ठंडा होता है जो रात में -45 डिग्री तक भी पहुँच जाता है और इस क्षेत्र में रातें बहुत लम्बी होती है।

1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिनों तक दोनों देशों की सीमाओं पर सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के अनुसार दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा

पत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसमें दोनों देशों द्वारा कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था। लेकिन पाकिस्तान अपने सैनिकऔर अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था।

इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच की कड़ी को तोड़ना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। पाकिस्तान का यह भी मानना था कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के तनाव से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने में मदद मिलेगी।

प्रारम्भ में भारतीय सेना द्वारा इसे घुसपैठ मान लिया गया था और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन नियंत्रण रेखा में खोज के बाद और इन घुसपैठियों के नियोजित रणनीति में अंतर का पता चलने के बाद भारतीय सेना को अहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को भेजा।

यह युद्ध आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। इस युद्ध के दौरान 550 सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया और 1400 से अधिक घायल हुए थे ।

Kargil Vijay Diwas Essay In English-

Kargil Vijay Diwas is celebrated every year on 26th July. Kargil Vijay Diwas is celebrated to commemorate the victory of Kargil war and in memory of the martyred soldiers. Kargil war was fought between the army of India and Pakistan. On 26 July 1999, Indian soldiers defeated the Pakistani army in the Kargil war. Every year this day is celebrated as Victory Day in our country and tribute is paid to the soldiers who died in the war. On this day the President, Prime Minister, Army officers and entire countrymen salute the bravery of the army and pay homage to the martyred soldiers.

Kargil, located on the borders of India and Pakistan, is the world's highest battleground with extreme weather conditions. In 1999, the Kargil war between India and Pakistan took place on a hill named Tiger, which is 205 km from Srinagar. The weather at Tiger Hill is very cold which reaches up to -45 degree even at night and the nights are very long in this area.

Even after the Indo-Pak war in 1971, military conflict continued on the borders of both the countries for several days. According to history, tensions were increased due to nuclear tests by both the countries. To defuse the situation, both the countries signed the declaration in February 1999 in Lahore. In which both the countries promised to resolve the Kashmir issue peacefully through bilateral talks.

But Pakistan started sending its military and para-military forces across the Line of Control by hiding and named this infiltration as "Operation Badr". Its main objective was to break the link between Kashmir and Ladakh and remove the Indian Army from the Siachen Glacier. Pakistan also believed that any tension in the region would help in making the Kashmir issue an international issue.

Initially it was considered an infiltration by the Indian Army and it was claimed that they would be driven out in a few days. But after a search along the Line of Control and after discovering the difference in the tactics employed

by these infiltrators, the Indian Army realized that the attack was planned on a much larger scale. After this the Government of India sent 2,00,000 soldiers in the name of Operation Vijay. The war officially ended on 26 July 1999. During this war 550 soldiers sacrificed their lives and more than 1400 were injured.

Kargil Vijay Diwas Poem (कारगिल विजय दिवस पर कविता)-

कारगिल के वीरो की याद में “कारगिल विजय दिवस पर कविता – Kargil Vijay Diwas Poem 2021” के माध्यम से आप अपने विचार प्रकट कर सकते हैं |

साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना,

यदि हाल मेरी माता पूछे तो, जलता दीप बुझा देना!

इतने पर भी न समझे तो दो आंसू तुम छलका देना!!

यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना!

इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना !!

यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना!

इतने पर भी न  समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना!!

यदि हाल मेरे पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना!

इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!!

यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना!

इतने पर भी न समझे तो, सीने से उसको लगा लेना!!

यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना!

इतने पर भी न समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!

कारगिल युद्ध के हीरो(Heroes Of Kargil War)-

वैसे तो कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले सभी सेना के अधिकारी और जवान पुरे देश के लिए हीरो हैं लेकिन यहॉ कुछ ऐसे हीरोज के बारे में बात करेंगे जिन्हे भारत सरकार द्वारा उनकी बहादुरी के लिए सम्मान दिया गया।

  1. कैप्टन विक्रम बत्रा (परमवीर चक्र विजेता)- कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 09 सितम्बर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था। उनके माता-पिता अध्यापक थे। वह जून 1996 में Manekshaw Battalion में IMA में शामिल हुए। उन्होंने 19 महीने का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 6 दिसंबर, 1997 को IMA से स्नातक किया।
    उसके बाद उन्हें 13वीं बटालियन, जम्मू और कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के रूप में पद दिया गया था। इन्हे कारगिल युद्ध के नायक के रूप में जाना जाता है और इन्होने पीक पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी| उन्हें प्यार से 'द्रास का बाघ', 'कारगिल का शेर', 'कारगिल का हीरो' आदि कहा जाने लगा। 7 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते हुए कारगिल युद्ध में वे शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र दिया गया।
  2. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव(परमवीर चक्र विजेता)- 19 वर्षीय योगेंद्र सिंह यादव परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। वर्तमान में सूबेदार मेजर है। टाइगर हिल पर हुए हमले में उन्हें 15 गोलियां लगी थीं। वह घटक पलटन का हिस्सा थे जिसने 4 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर तीन रणनीतिक बंकरों पर कब्जा कर लिया था।
    यादव ने हमले का नेतृत्व किया लेकिन आधे रास्ते में दुश्मनों ने गोलियां चला दीं, जिसमें उनके साथी मारे गए। यादव को खुद कई गोलियां लगी थीं, जिससे उनका बायां हाथ स्थिर हो गया था। अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प, यादव ने अपना हाथ एक बेल्ट में बांध लिया, अपने पैर के चारों ओर एक बांदा लपेटा और दुश्मन से लड़ना जारी रखा। उसने नजदीकी लड़ाई में दुश्मन के चार सैनिकों को मार गिराया और गोलाबारी को शांत कर दिया।
  3. नायक दिगेंद्र कुमार (महावीर चक्र विजेता)- सीकर, राजस्थान
    के रहने वाले दिगेंद्र सिंह ने पाकिस्तानी सेना का बहादुरी के साथ सामना किया था। नायक दिगेंद्र सिंह महावीर चक्र विजेता है। कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें कुल 5 गोलियाँ लगी थी। खुद के शरीर में इतनी गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने काफी पाकिस्तानी सैनिकों को मौतके घाट उतार दिया था।
    15 अगस्त 1999 को उन्होंने महावीर चक्र द्वारा नवाजा गया था। दिगेंद्र को भारतीय सेना के बेस्ट कोबरा कमांडो के रूप में भी जाना जाता हैं। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी सेना के मेजर अनवर का सिर चाकू से काट दिया था। 2005 में वे सेना से रिटायर हो गये।
  4. मेजर विवेक गुप्ता(महावीर चक्र विजेता)- शहीद विवेक गुप्ता राजपूताना राइफल्स की सेकेंड बटालियन में थे। 12 जून 1999 को द्रास सेक्टर में एक महत्वपूर्ण पोस्ट पर कब्जा किए जाने के दौरान वह वीरगति को प्राप्त हुए थे। कारगिल युद्ध में उनकी वीरता को देखते हुए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया।
  5. ब्रिगेडियर खुशाल सिंह- ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रहने वाले हैं। कारगिल युद्ध में इनको और इनकी बटालियन को दुश्मनों के छक्के छुड़ाने पर सबसे ज्यादा बहादुरी सम्मान मिले थे. ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने जिस 18 ग्रनेडियर का नेतृत्व किया उसमें 900 जवान थे।
    इनकी कमान के 34 जवान शहीद हुए और सबसे ज्यादा 52 वीरता पुरस्कार भी इनकी कमान को ही मिले थे, जिसमे 1 परमवीर चक्र, 2 महावीर चक्र, 6 वीरचक्र और 18 सेना मेडल सहित अन्य सैन्य सम्मान भी शामिल थे। खुशाल ठाकुर सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने जीवन की नयी पारी की शुरुआत की और सक्रिय राजनीति में आ गये।
  6. एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपनिस- कारगिल युद्ध के दौरान एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपनिस थे। कारगिल युद्ध के दौरान टिपनिस ने अपनी टीम के साथ एयर फोर्स का कुशल नेतृत्व किया था। 18 हज़ार फीट की ऊंचाई से सेना को हवाई मदद देने की चुनौती को बखूबी अंजाम देने में टिपनिस और उनकी फोर्स ने अपनी कुशलता का परिचय देकर इतिहास रचने में मदद की थी।
  7. मेजर राजेश अधिकारी- राजेश अधिकारी का जन्म 1970 में नैनीताल, उत्तरप्रदेश(अब उत्तराखंड) में हुआ था। मेजर राजेश अधिकारी की कारगिल युद्ध से एक वर्ष पहले ही शादी हुई थी। शाम के समय युद्ध क्षेत्र के पास मेजर राजेश अधिकारी के घर से आया हुआ खत पहुंचा लेकिन मेजर राजेश अधिकारी ने खत पढ़ने से यह कहकर मना कर दिया कि पहले दुश्मनों को निपटा आता हूं और खत सुबह पढ़ लूंगा। रात भर युद्ध में डटे रहने के बाद तोलोलिंग पर मेजर राजेश अधिकारी और उनकी टीम ने कब्जा तो जमा लिया लेकिन खत पढ़ने के लिए वह जीवित न रह सके। मेजर राजेश सिंह अधिकारी की वीरता कार्य के लिए सरकार ने उन्हें गैलेंट्री सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया।

कारगिल विजय दिवस(Kargil Vijay Diwas) Slogen/Quotes-

Kargil Vijay Diwas Quotes/Slogen In Hindi 2021-

आओ देश का सम्मान करें,
शहीदों की शहादत याद करें।
जो कुर्बान हो गए मेरे देश पर,
उन्हें सिर झुकाकर सलाम करें।।
Happy Kargil Vijay Diwas!

अगर फौजी दिल पत्थर हैं,
तो वो कोनसा प्यार हैं जो उन्हें खिंच लाया सरहद पर।।
Happy Kargil Vijay Diwas!

तिरंगा हमको प्यारा हैं,
हमारे देश का तिरंगा न्यारा हैं,
हमको जान से भी ज्यादा प्यारा हैं,
इसकी रक्षा हम करेंगे।।
कारगिल दिवस की सभी देश वासियों को शुभकामनायें!

जज्बा कुर्बानी का याद रखना,
जो खो से गए मौत की आघोष में,
उनकी मेहरबानियों

को याद रखना,
वो दे गये तुम्हे एक और मौका जश्न का,
वो जो थे लड़े तुम्हारे लिए,
उनकी कहानियों को याद रखना,
विजय दिवस हैं आज, फ़तेह का दिन,
शहादत और बहादुरी के इस दिन को,
याद रखना..............याद रखना।।
Kargil Vijay Diwas!

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।

Kargil Vijay Diwas Quotes/Slogen In English 2021-

For your tomorrow, soldiers gives their lives…Kargil Vijay Diwas!

Our flag does not fly because the wind moves it, it flies with the last breath of each soldier who died protecting it.

Freedom in mind, Faith in words, Pride in our hearts, Memories of our soul. Jai Jawan, Jai Kishan!

If death strikes before I prove my blood, I swear I’ll kill Death!

कारगिल युद्ध के समय भारतीय सेना के सेना अध्यक्ष कौन थे?

कारगिल युद्ध के समय भारत के सेना प्रमुख वेद प्रकाश मलिक थे।

कारगिल युद्ध के दौरान भारत के राष्ट्रपति कौन थे?

कारगिल युद्ध के समय भारत के राष्ट्रपति के आर नारायणन थे।

कारगिल युद्ध के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?

कारगिल युद्ध के समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे।

कारगिल युद्ध के समय भारत के रक्षा मंत्री कौन थे?

कारगिल युद्ध के समय भारत के रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नान्डिस थे।

कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के कितने सैनिक मरे?

कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना के लगभग 1300 जवान मारे गए थे लेकिन पाकिस्तान सरकार(उस समय की) के अनुसार उनके 357 जवान ही मारे गए थे।

कारगिल युद्ध में कितने भारतीय जवान शहीद हुए थे?

कारगिल युद्ध में लगभग 550 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे ।

कारगिल युद्ध के समय किसकी सरकार थी?

कारगिल युद्ध के समय NDA (National Democratic Alliance) की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे।

कारगिल का युद्ध कितने दिन चला?

कारगिल युद्ध 3 मई 1999 को शुरू हुआ था और 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ ।

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