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| On 3 weeks ago

दूसरे भाव में केतु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

दूसरे भाव में केतु जातक को रूपवान्, सुखी-सम्पन्न तथा धनी बनाता है। उसे अमितसुख तथा धन का लाभ होता है।

दूसरे भाव में केतु का शुभ फल (Positive Results of Ketu in 2nd House in Astrology)

  • दूसरे भाव में केतु (Ketu in 2nd House) रूपवान्, सुखी-सम्पन्न बनाता है। अत्यन्त सुख प्राप्त होता है। अमितसुख तथा धन का लाभ होता है।      
  • दूसरे भाव में केतु स्वगृह (मेष) में या सौम्यगृह (मिथुन-कन्या) में, या
    शुभग्रह की राशि में या मित्रग्रह की राशि में होने से शुभफल देता है।

दूसरे भाव में केतु का अशुभ फल (Negative Results of Ketu in 2nd House in Astrology)

  • दूसरे भाव में केतु (Ketu in 2nd House) धनभाव में होने से जातिका की मति नित्य व्यग्र रहती है। बुद्धि भ्रम से युक्त होती है।
  • दूसरे भाव में केतु होने से जातिका दुष्ट, दु:खी तथा भाग्यहीन होती है और तिरस्कार की पात्र होती है। धनभाव
    का केतु होने से जातिका के मन को ताप होता है, सदा दु:खित रहती है, कार्यों मे विघ्न होता है। यह केतु धर्मनाश करता है। जातिका नीचों की संगति में रहती है। केतु के धनस्थ होने से जातिका को विद्या और धन का अभाव रहता है। धनस्थान का केतु धनहानि करता है।
  • केतु दूसरे भाव में होने से धन के विषय में राजपक्ष से व्यग्रता अर्थात् डर लगा रहता है। राजा से धन की हानि होती है।
    राजा से भय और कष्ट होता है। जातिका पितृधन से वंचित होती है। मुख में रोग होता है। आदर-सत्कार का वचन भी जातिका के मुख से नहीं निकलता है। सभा में जातिका का भाषण सरस नहीं होता है प्रत्युत खराब होता है। बोलना बहुत तीखा होता है। जातिका बुरी नजर से देखती है।
  • धनस्थान का केतु धन-धान्य का नाश करता है। अन्न की नित्य चिन्ता रहती है। दूसरों के अन्न पर अवलम्बित रहती है। बान्धवजनों के साथ कलह
    होती है। कुटुम्बियों से झगड़े होते हैं।
  • द्वितीय भाव के केतु से जातिका का कुटुम्ब के लोगों से तथा मित्रों से विरोध होता है। जातिका पतिसुख से रहित होती है। धन स्थान में केतु से पुत्र की मृत्यु होती है। नुकसान के कारण धन्धा बन्द होना, दीवालिया होना, बदनामी- ये फल मिलते हैं। अशुभफल पुरुषराशियों में अधिक अनुभव में आते हैं।