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चौथे भाव में केतु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Ketu in Fourth House in Hindi

चौथे भाव में केतु का फल

चौथे भाव में केतु का फल अध्यात्म, खुली उदारता और महत्वाकांक्षा के साथ मूल निवासी प्रदान करता है । इस प्लेसमेंट के साथ मूल निवासी अपने रिश्तों में कर्म विशेषताओं को दिखाते हैं, और उन्हें जीवन में दृढ़ विश्वास है। इस प्लेसमेंट वाले व्यक्तियों को व्यापार में अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है और एक लाभदायक परिणाम प्राप्त हो सकता है। केतु को पुरुष ग्रह भी माना जाता है, लेकिन यह राहु से कमतर होता है। ।

चौथे भाव में केतु का शुभ फल (Positive Results of Ketu in 4th House in Astrology)

  • शुभ फल : चौथे भाव में केतु का फल जातक को शूर, सत्यवादी-मधुरभाषी, धन और धान्य से समृद्ध होता है। बान्धव लोगों से सुख होता है। चतुर्थभाव का केतु वृश्चिक या सिंह में होने से माता-पिता तथा मित्रों का सुख अच्छा मिलता है। उच्चराशि में होने से वाहनसुख मिलता है-राजयोग होता है।

चौथे भाव में केतु का अशुभ फल (Negative Results of Ketu in 4th House in Astrology)

  • अशुभ फल : कोजातक चंचल, वाचाल, कार्यहीन, निरुत्साही एवं निरुपयोगी होता है। दुर्बल, पित्तप्रकृति और वितंडावादी होता है। चतुर्थभाव में केतु होने से जातक दूसरों की निन्दा करता है। दूसरों की आलोचना बहुत करता है। अत: लोग जातक को कुत्सितवृत्ति का मानव समझते हैं। माता से सुख नहीं होता है। माता रोगी रहती है। सौतेली माँ से कष्ट होता है। केतु चतुर्थभाव में होने से माता की मृत्यु हो सकती है। मित्रों से कभी सुख नहीं होता है। जातक के पिता का धन नष्ट होता है। मित्र वर्गों के द्वारा ही पैतृक धन का नाश होता है। पैतृक सम्पत्ति का नाश करके जातक धन कमाने की इच्छा से देश विदेश में ठोकरें खाता फिरता है, मित्र भी मुख मोड़ लेते हैं। आर्थिक विपन्नता जातक का दामन नहीं छोड़ती है। विषबाधा का भय रहता है। जातक
    अपने घर में बहुत रहता नहीं है। यदि रहे तो चित्त में घबराहट होती है एवं घर में कलह होता है। जातक दूसरे के घर में रहता है। जातक की अपनी भूमि, खेत, आदि नष्ट हो जाते हैं। जन्मभूमि भी छोड़नी पड़ती है। चतुर्थभाव का केतु वृश्चिक या सिंह में होने से माता-पिता तथा मित्रों का सुख अच्छा मिलता है।