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| On 2 months ago

छठे भाव में केतु का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

छठे भाव में केतु होने से जातक का शरीर नीरोग होता है एवं कदाचित् कोई रोग उत्पन्न हो तो वह शीघ्र दूर होता है। षष्ठ भाव में जातक श्रेष्ठपद प्राप्त करनेवाला होता है और वह जातक की प्राय: इष्टसिद्धि होती है। पशु धन विपुल होता है और षष्ठ भाव में गाए-भैंस, बकरी, घोड़ा आदि चौपाए जानवरों का सुख मिलता है।

छठे भाव में केतु का फल

छठे भाव में केतु का शुभ फल (Positive Results of Ketu in 6th House in Astrology)

  • षष्ठ भाव में केतु (Ketu in 6th House) होने से जातक का शरीर नीरोग होता है। कदाचित् कोई रोग उत्पन्न हो तो वह शीघ्र दूर होता है।
  • छठे भाव में केतु होने से बंधु को प्रिय, उदार, गुणवान्, दृढ़ प्रतिज्ञ होता है। जातक प्रसिद्ध, तथा विद्या के कारण यशस्वी होता है।
  • जातक श्रेष्ठपद प्राप्त करनेवाला होता है। जातक की प्राय: इष्टसिद्धि होती है।
  • षष्ठ भाव में केतु से पशुपालक होता है। पशु धन विपुल होता है। गाए-भैंस, बकरी, घोड़ा आदि चौपाए जानवरों का सुख मिलता है।
  • वाद-विवादरूप संग्राम में विवाद करने से भयंकर शत्रु का भी नाश होता है। छठे भाव में केतु होने से शत्रु दूर भाग जाते हैं।
  • षष्ठ भाव में केतु होने से शत्रुओं को पराजित करनेवाला होता है। जातक को द्रव्य लाभ होता रहता है। फिजूलखर्च नहीं होता। मितव्ययी होता है।

छठे भाव में केतु का अशुभ फल (Negative Results of Ketu in 6th House in Astrology)

  • छठे भाव में केतु (Ketu in 6th House) होने से जातक वात-विकारी, झगड़ालू, भूत-प्रेतजनित रोगों से रोगी, कभी स्वस्थ कभी अस्वस्थ रहने वाला होता है।
  • मातृपक्ष से हानि उठाने वाला होता है। मामा का सुख कम मिलता है।
  • षष्ठ भाव में केतु से जातक का मानभंग
    मामा से होता है-अर्थात् मामा परस्पर वैमनस्य होने से जातक का आदर-मान नहीं करता है। मातृकुल से और मामा से सुख (सम्मान) अल्प मिलता है।
  • षष्ठ भाव में केतु होने से धन की हानि होती है और धनाढ़्य नहीं होता है।
  • छठे भाव में केतु होने से जातक के दाँत या होठ के रोग उत्पन्न होते हैं।