Let’s Smile : Guard GOPAL DAS is not responsible.

गार्ड गोपाल दास इस नॉट रिस्पांसिबल।

बहुत पुरानी बात है जब अंग्रेजो का राज ता चला गया था लेकिन अंग्रेजी बादस्तूर राज कर रही थी। भारतीय रेलवे भी भला अंग्रेजी के शिकंजे से कैसे बचती? अधिकांश रिपोर्ट्स अंग्रेजी में करनी पड़ती थी। तब का एक किस्सा लोगो में बड़ा मशहूर था जिसे आप भी सुन लीजिए।

हुआ ऐसा था कि राजस्थान के रेतीले इलाकों में रेत से घिरे दो रेलवे स्टेशनों के बीच एक बैल रेलगाड़ी से टकरा गया था। रेलगाड़ी से टकराने के कारण वह बैल कट गया था। इसकी वजह से गाड़ी काफी लेट हो गई थी एवम यात्रियों की असुविधा का सामना करना पड़ा।

जब रेलगाड़ी लेट हो जाती है तो उसकी रिपोर्ट कंट्रोल रूम को हो जाती है एवम कंट्रोल रूम के द्वारा इसकी सूचना रेलवे प्रबंधन को प्रदान कर दी जाती है। अतः रेलवे प्रबंधन द्वारा रेलवे के गार्ड को मुख्यालय में कम्प्लीट रिपोर्ट के लिए तलब किया गया।

सज्जन गार्ड गोपालदास जब मुख्यालय पहुंचे तो प्रबंधन के समक्ष अपनी बात को बताया कि रेलवे ट्रेक पर एक बैल कट गया था एवम औपचारिक कार्यवाही पूर्ण करने में समय लग गया था, इसलिए ट्रेन लेट हो गई थी। प्रबंधन ने उनकी बात सुनने के बाद उनके सामने एक सफेद पेपर रखा एवम जो घटना घटित हुई उसे लिखित में देने का आदेश दिया।

गार्ड गोपालदास कम पढेलिखे सीधे साधे आदमी थे। रेलवे के रोजमर्रा के लिखित काम को बड़ी मुश्किल से ही कर पाते थे। प्रबंधन के आदेश पर उस सफेद कागज पर धटित वाकये को लिखना जरूरी था। लिखने-पढ़ने का कम अभ्यास व अंग्रेजी में हाथ तंग होने के कारण घटना को लिखना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो गया।

काफी सोच-विचारकर जो उन्होंने उस सफेद पेपर पर लिखा वह लंबे समय तक लोगो मे मजाक का विषय रहा। रोमन लिपि में उन्होने लिखा था कि-

” काउज हसबेंड, कट दा ट्रेन।
गार्ड गोपालदास इज नोट रिस्पांसिबल”।।

(बचपने में सुना हुआ एक किस्सा)

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