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लिवर एब्सेस क्या है? (Liver Abscess in Hindi)

लिवर एब्सेस क्या है - लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा Solid Organ सॉलिड ऑर्गन होता है। जो शरीर के Blood (खून) में से Toxins (टॉक्सिन्स) को हटाता है। इसके साथ ही Liver (लिवर) के अन्य कई महत्वपूर्ण काम भी होते हैं। जैसे Liver (लिवर) हमारे Blood (खून) के अधिकतर Chemical (केमिकल) स्तर को विनियमित करता है, हालांकि Liver (लिवर) संबंधी समस्याएं सामान्य होती हैं।

जिनमें से एक है Liver abscess (लिवर एब्सेस)। यह समस्या हर किसी को हो सकती है। अधिकांश Liver abscess (लिवर एब्सेस) बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमण के द्वारा होता है। इसका समय पर निदान होने पर इसका उपचार संभव है। लेकिन, अगर सही समय पर इसका निदान ना हो, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

Liver (लीवर) हमारे शरीर का मुख्य अंग होते हैं, और इसमें किसी तरह की परेशानी हो जाने पर शरीर की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है। Liver (लीवर) का फोड़ा एक ऐसी बीमारी होती है जिसके दौरान लीवर में जैसे कोई गाठ या फोड़ा हो जाता है और जिसे Liver Abcess (लीवर एब्सेस) भी कहते है या जिसे जिगर का फोड़ा भी कहा जाता है इस स्तिथि में Liver (लीवर) में बहुत अधिक मात्रा में मवाद इकठ्ठा हो जाती है।

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लिवर एब्सेस क्या है (Liver Abscess in Hindi) :

Liver (लिवर) हमारे शरीर का Digestive System (डायजेस्टिव सिस्टम) पाचक तंत्र का वह Organ (ऑर्गन) होता है। जो पाचक तंत्र के कार्य में सहायता करता है। इसके अलावा यह और भी कई जरूरी कामों को करता है। इन जरूरी कार्यों में खाने को शक्ति को तोड़ने में मदद करने वाले बाइल का उत्पाद करता है। महत्वपूर्ण चीजों जैसे Harmons (हॉर्मोन्स) का निर्माण करना, खून से Toxins (टॉक्सिन्स) को निकालना, वसा के भण्डारण को नियंत्रित करना आदि शामिल हैं।

लिवर एब्सेस (Liver abscess) लिवर में पस से भरे हुए सिस्ट को

कहा जाता है। इस समस्या का उपचार होना जरूरी होता है। क्योंकि, ऐसा न हो तो उसके कारण सेप्सिस (Sepsis) रोग हो सकता है, जो एक गंभीर ब्लड संक्रमण/इंफेक्शन (Blood Infection) है। इसके गंभीर लक्षण जैसे सांस लेने की समस्या, अधिक बुखार आना, बेहोशी आदि जैसे लक्षण सामने आते हैं।

लिवर एब्सेस के लक्षण क्या हैं (Symptoms of Liver Abscess in Hindi) :

लिवर एब्सेस (Liver abscess) के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यह समस्या गंभीर नहीं होती है, लेकिन अगर फोड़ा खुला हो और संक्रमण फैलता है तो यह शरीर के लिए काफी हानिकारक या जानलेवा हो सकता है। यह समस्या शरीर में अचानक ही होती है।लिवर एब्सेस (Liver abscess) के सामान्य लक्षण इस प्रकार से हैं-

  • सामान्य लक्षण -
    • पेट में दर्द अधिक होना।
    • खाँसी अधिक होता।
    • पेशाब/मल गाढ़ा आना।
    • अधिक बुखार आना।
    • ज्यादा ठंड लगना।
    • जोड़ों में दर्द होना।
    • भूख में कमी होना।
    • जी मचलना/ मन नहीं लगना।
    • सीना/छाती में दर्द रहना।
    • अधिक पसीना आना।
    • वजन कम होना।
    • पीलिया रोग होना।
    • पेट में किसी तरह का संक्रमण होना।
    • आंत्र में छिद्र का होना।
    • पित्त में संक्रमण।
    • लीवर में चोट लगना।
    • खान पान सही ना होना।
  • गंभीर लक्षण -
    • मानसिक स्थिति गड़बड़ा जाना।
    • चिड़चिड़ापन आ जाना।
    • व्यवहार में बदलाव आना।
    • हर समय भर्मित रहना।
    • बेचैनी होना।
    • तीव्र बुखार आना।
    • ह्रदय गति तेज होना।
    • सांस लेने में समस्या होना।
    • गंभीर दर्द होना।
    • उलटी आना।

लिवर एब्सेस के कारण (Causes of Liver Abscess in Hindi) :

यह स्थिति रक्त, जठरांत्र प्रणाली में अथवा पेट में संक्रमण के कारण हो सकती है। यह शल्य प्रक्रिया से चोट तथा जिगर को अन्य आघात के कारण भी हो सकती है।

  1. लिवर फोड़ा होने के संक्रामक कारण इस प्रकार है -
    1. पित्त-निकासी नलियों में जीवाणु संक्रमण होना।
    2. आंत में छिद्र होना आंत से जुड़े पेट में जीवाणु संक्रमण।
    3. रक्त प्रवाह में संक्रमण होना।
    4. एंटअमीबा हिस्टोलिटिका संक्रमण यह जीव जो अमीबिक पेचिस का कारण बनते हैं।
    5. पानी के माध्यम से या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकता है।
  2. लीवर फोड़ा होने के जोखिम कारण -
    1. यकृत के फोड़े के बढ़ने के जोखिम को बढ़ाते हैं।
    2. पाइोजेनिक लीवर फोड़ा के जोखिम कार्य में सम्मिलित होता है।
    3. क्रोहन रोग होना।
    4. पेट या जठरांत्र संबंधी संक्रमण।
    5. मधुमेह रोग होना।
    6. पेट की सर्जरी।
    7. पित्त-निकासी नलियों की सर्जरी करवाना।
  3. अमीबिक यकृत फोड़ा के जोखिम कारण-
    1. उम्र ज्यादा दिखना।
    2. भारी मात्रा में शराब का सेवन करना।
    3. HIV (एचआईवी)/ एड्स या अन्य स्थितियों के कारण।
    4. खराब पोषण आहार के कारण।

लीवर की बीमारियों की जांच (Liver Disease Screening in Hindi) :

  • Hepetitis B Test (हेपेटाइटिस बी टेस्ट) - हेपेटाइटिस बी टेस्ट के जरिए डॉक्टर लीवर में हेपेटाइटिस बी के संक्रमण की जांच करते हैं।
  • Blood Test (ब्लड टेस्ट) - ब्लड टेस्ट के जरिए लीवर फंक्शन, लीवर संक्रमण और लीवर से जुड़ी बीमारियों के बारे में जानने की कोशिश करता है।
  • Ultra Sound (अल्ट्रा साउंड) - लीवर से जुड़ी बीमारियों को जानने के लिए अल्ट्रा साउंड करवाना एक अच्छा माध्यम माना जाता है। इसमें पिक्चर के जरिए लीवर की कंडीशन और फंक्शन को देखा जाता है।
  • Liver biopsy (लीवर बायोप्सी) - लीवर बायोप्सी ब्लड टेस्ट या अल्ट्रा-सांउड के बाद किया जाता है। जिसमें लीवर से जुड़ी बीमारी को जाना जाता है।
  • C.T.Scan (सी टी स्केन) - सी टी स्केन यानि कंप्यूटेड टोमोग्राफी के जरिए पेट का सी टी स्कैन किया जाता है। जिसमें पेट और लीवर की डिटेल इमेज मिलती है।जिससे लीवर की बीमारी को पहचानने में मदद मिलती है।

लीवर की सफाई कैसे करें (How To Clean Liver in Hindi) :

लिवर एब्सेस हेतु लिवर की सफाई के घरेलू उपाय -

  1. रोजाना लहसुन और नींबू का उपयोग करें। इनमें एंटीबॉयोटिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। लहसुन में लीवर की क्षमता को बढ़ाने वाले ऐलिसिन और सेलेनियम नामक एंजाइम होते हैं, तथा नींबू का विटामिन सी से लीवर की सफाई आसानी से हो जाती है।
  2. चुंकदर और गाजर के रस का उपयोग करने से लीवर की सफाई की जा सकती है। इसके साथ ही लीवर की कोशिकाओं की मरम्मत करने में सहायक होते हैं क्योंकि चुंकदर और गाजर में उच्च मात्रा में फ्लेवेनॉइड और बीटा केरोटिन पाया जाता है
  3. दिन में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  4. साबुत अनाज का सेवन करना साबुत अनाज में भरपूर मात्रा में विटामिन बी कॉमप्लेक्स पाया जाता है। जिससे लीवर फंक्शन सुचारु रुप से हो पाता है। साबुत अनाज का सेवन हमेशा सुबह के समय करना चाहिए।
  5. अजवायन में एंटी फंगल, एंटीबॉयोटिक गुण पाए जाते हैं। जो लीवर को इंफेक्शन से बचाते हैं। अजवायन के तेल का प्रयोग स्किन डिसीज में किया जाता है।
  6. सेब में मौजूद पैक्टिन तत्व हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है। लीवर से हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर कर सफाई करने में मदद करता है। सेब में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं।
  7. एवाकॉडो ये फल लीवर की कोशिकाओं और ऊतकों का निर्माण करने में मदद करता है। इसके साथ ही एवाकॉडो में मौजूद ग्‍लूटाथोनिन तत्‍व और मोनोसैचुरेटेड फैट लीवर को साफ करते हैं।
  8. ग्रीन टी बढ़ते वजन को कम करने के साथ लीवर की सफाई करने में अहम भूमिका निभाती है। ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व के अलावा लीवर की गंदगी यानि फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
  9. जैतून का तेल लीवर की सफाई के लिए उपयोगी होती है। क्योंकि उसमें लिपिड सही मात्रा में पाया जाता है। जिससे लीवर को कार्य करने में आसानी होती है और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  10. ब्रोकली का हफ्ते में 2-3 बार सेवन करना ब्रोकली में विटामिन और मिनरल के अलावा ग्‍लूकोसिनोलेट्स नामक एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो लीवर के विषैले तत्वों को निकालने में सहायता करते हैं।

लिवर एब्सेस को रोकने के उपाय (Measures to Prevent Liver Abscess in Hindi) :

  • पौष्टिक आहार का उपयोग करें।
  • आहार में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, कम वसा वाले डेरी उत्पाद, बीजों का प्रयोग, लीन मीट्स और फिश आदि।
  • एल्कोहॉल/शराब का सेवन न करें।
  • व्यायाम करें।
  • तनाव से दूर रहें।
  • योगा और मैडिटेशन करें।
  • भरपूर नींद लेना।

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लीवर की बीमारियों के उपचार (Liver Disease Treatment in Hindi) :

  1. Liver Trans plant (लीवर ट्रांसप्लांट) - लीवर ट्रांसप्लांट की जरुरत लीवर फेल्योर होने और लीवर के सही से फंक्शन न करने पर किया जाता है।
  2. Hepetitis A & B Treatment (हेपेटाइटिस ए और बी ट्रीटमेंट) - हेपेटाइटिस ए समय के साथ स्वयं ठीक हो जाता है, जबकि हेपेटाइटिस बी के इलाज में एंटीवायरल मेडिसिन्स का उपयोग किया जाता है।
  3. Liver Cencer (लीवर कैंसर)का इलाज - लीवर कैंसर का उपचार कीमोथेरेपी, सर्जिकल के अलावा लीवर ट्रांसप्लांट के जरिए किया जाता है।