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लिवर एंजाइम (Liver Enzymes in Hindi)

लिवर एंजाइम : लिवर एंजाइम लिवर हमारे शरीर में एक बहुत ही नाजुक सा स्पंज अंग होता है यदि लिवर खराब हो जाता है, तो पूरे शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। यदि लिवर की समस्या का समय पर उपचार ना हो तो यह एक गंभीर समस्या बन सकती है। लिवर के खराब हो जाने पर कई प्रकार की बिमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है लिवर खराब तब होता है जब खान-पान सही नहीं होता है, या वे लोग जो शराब का सेवन अधिक करते हैं उनका लिवर अन्य लोगों की भांति जल्दी खराब होता है। इन्हीं में से एक लिवर की बीमारी है लिवर एंजाइम।

अधिक मात्रा में शराब का उपयोग करने वाले व्यक्तियों में लीवर एंजाइम के कारण सबसे अधिक होते हैं, क्योंकि शराब के सेवन से लीवर पर सीधा असर होता है।लिवर में एलानिन ट्रांसेमिनेस और एस्पार्टेट ट्रांसमीनेस हेपेटोसाइट्स में पाए जाते हैं जो लीवर के खराब होने पर निकलते हैं। अल्कलाइन फॉस्फेट, लिवर की पित्त नली की कोशिका में पाया जाने वाला एक एंजाइम होता है, जो लिवर में चोट लगने के कारण ऊंचा हो जाता है, किन्तु शराब के अधिक उपयोग से यह काफी ऊंचा नहीं होता है। यह एंजाइम उन लोगों में अधिक होता है जो शराब का इस्तेमाल करते हैं। 

लिवर एंजाइम

लिवर एंजाइम क्या है? (What is Liver Enzymes in Hindi) :

शरीर में लिवर एंजाइम का स्तर हमारे पूरे लिवर की कार्य क्षमता को प्रभावित करता है। यह लिवर

की कोशिकाओं को क्षति और सूजन जैसी समस्या प्रदान करता है। यह एंजाइम सामान्यतौर पर लीवर की कोशिकाओं में पाया जाता है, परन्तु जब लीवर खराब होता है, तब यह एंजाइम रक्तप्रवाह से बाहर निकल जाता है। इसका पता रक्त परीक्षण से चलता है। लीवर एंजाइम के लिए सबसे सामान्य परीक्षण AALT (एएलटी) या लैनिन ट्रांसएमिनेस और AAST (एएसटी) या एस्पार्टेट ट्रांसएमिनेस होते हैं। लीवर की परेशानी के लक्षण लीवर एंजाइम में सामान्य वृद्धि से शुरू होते हैं, लेकिन इनके हानिकारक प्रभाव बहुत अधिक प्रभावी होते हैं।

लीवर एंजाइम एक प्रकार के प्रोटीन होता है, जो शरीर में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करता है। इन्हीं रासायनिक प्रतिक्रियाओं में पित्त और पदार्थों का उत्पादन शामिल होता है जो रक्त के थक्के बनाने में मदद करता है तथा भोजन को और विषाक्त पदार्थों को तोड़ता है, और संक्रमण से लड़ता है। यदि लीवर खराब हो जाता है तो यह रक्त के प्रवाह में एंजाइम को छोड़ता है।

  • क्षारीय फॉस्फेट ALP (एएलपी)।
  • एलानिन ट्रांसएमिनेस ALT (एएलटी)।
  • एस्पार्टेट ट्रांसएमिनेस AST (एएसटी)।
  • गामा-ग्लूटामाइल ट्रांसफ़ेज़ GGT (जीजीटी)।

लिवर एंजाइम का बढ़ना शरीर में लिवर कोशिकाओं के नुकसान और सूजन की ओर प्रदर्शित करता है। यह एंजाइम मुख्य रूप से लिवर की कोशिकाओं के अंदर पाया जाता है, लेकिन जब लिवर को नुकसान होता है तब इस एंजाइम का हमारे खून में ज्यादा रिसाव होने लगता है। लिवर एंजाइम के लिए सबसे ज्‍यादा होने वाले परिक्षण (ALT) एएलटी/लनाइन ट्रान्समिनस व एएसटी (AST)/एस्‍सर्टेट ट्रान्समिनस होते हैं जिसको एसजीओटी (SGOT) भी कहा जाता है।

लिवर एंजाइम के लक्षण (Symptoms of Liver Enzymes in Hindi) :

  1. पेट में हर समय दर्द रहना/होना।
  2. गहरा पेशाब आना।
  3. अधिक थकान होना।
  4. कमज़ोरी महसूस होना।
  5. अधिक खुजली होना।
  6. पीलिया रोग होना ख़ासकर आँखों का अधिक पीला होना।
  7. हल्के रंग का मल आना।
  8. भूख में कमी होना।
  9. उल्टी आना जी मितलाना।

लिवर एंजाइम के कारण लिवर का आकार बढ़ना :

लिवर एंजाइम का बढ़ना लिवर के बढ़ने की ओर भी संकेत करता है। लिवर के बढ़ने को हिपेटोमिगेली कहते हैं। हिपेटोमिगेली के सामान्य कारणों में हेपेटाइटिस और लिवर में सूजन हो जाती है। हेपेटाइटिस संक्रमण/वायरस जैसे ए, बी, और सी हिपेटोमिगेली के कारण होते है। इसके अतिरिक्त शराब लिवर डिजीज और Cencer (कैंसर), ल्यूकेमिया या लिंफोमा की वजह से भी लिवर आकार बढ़ता जाता है।

लिवर एंजाइम के कारण पीलिया रोग होना :

लिवर में जब बिलरुबिन बढ़ने लगता है, तब यह शरीर में पीलिया रोग पैदा करता है। पीलिया रोग में त्‍वचा का रंग पीला, मुंह और होंठ और आंखों का रंग सफेद से बदलकर पीला होने लग जाता है। बिलरुबिन एक हरे-पीले रंग का लिक्विड लिवर होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने का एक उप-उत्पाद कारण है। लिवर आम-तौर पर बिलरुबिन से छुटकारा पाने में सहायता करता है। किन्तु अगर लिवर एंजाइम के बढ़ने से लिवर ख़राब हो जाता है तो अधिक बिलरुबिन को रोकने में लिवर अनुतीर्ण हो जाता है, जिसके बढ़ने से पीलिया रोग का कारण बनता है।

लिवर एंजाइम बढ़ने के कारण (Due to Increased Liver Enzymes in Hindi) :

  • लिवर के कारणों का पता रक्त परिक्षण में चलता है कि लिवर एंजाइम बढ़ा हुआ है
  • मेटाबॉलिक सिंड्रॉम।
  • हेपेटाइटिस।
  • Alcohol (एल्कोहॉल)/शराब।
  • सिरोसिस इससे लिवर के टिश्यू क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
  • जिगर की बीमारियों, चिकित्सीय स्थितियों, दवाओं और संक्रमणों के कारण लीवर एंजाइम बढ़ सकते हैं।
  • कुछ दवाएं, जैसे कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाइयों का प्रयोग।
  • अन्य बीमारियां जिनके कारण लिवर एंजाइम के कारण बढ़ते हैं।
    • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस।
    • सीलिएक रोग।
    • एप्सटीन बार वायरस (Epstein-Barr virus) से संक्रमित।
    • हेमोक्रोमैटोसिस (Hemochromatosis)।
    • मोनोन्यूक्लिओसिस (Mononucleosis)।
    • सेप्सिस या ब्लड प्वांजनिंग।
    • विलसन रोग।
  • मांसपेशियों में सूजन आना।
  • जोड़ों में दर्द होना।
  • भूख न लगना।
  • पेट दर्द होना।
  • बुखार आना।
  • खुजली होना।
  • आंखों और त्वजा का पीला हो जाना।

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लिवर एंजाइम के बचाव (Liver Enzyme Defenses in Hindi) :

  1. रात को सोने से पहले दूध में हल्दी मिला कर पीयें, क्योंकि हल्दी में रोग निरोधक क्षमता होती है।
  2. एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर और शहद मिला कर दिन में दो से तीन बार लें यह शरीर में मौजूद विषैले चीजों को निकालने में मदद करता है।
  3. आंवला Vitamin C (विटामिन सी) का अच्छा स्रोत है, यह लीवर को कार्यशील बनाने में मदद करता है।
  4. पपीता पेट से सम्बंधित सभी रोगों एक औषधि है प्रतिदिन दो चम्मच पपीते के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलकर पीयें।
  5. पालक और गाजर का रस लीवर सिरोसिस के लिए फायदेमंद होता है।
  6. सेब और हरी पत्तेदार सब्जी पाचन तंत्र में उपस्थित जहरीली चीजों को बाहर निकालने में और लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
  7. भुई–आंवला एक औषधि हैं, जो लीवर को सुरक्षा देती है।

लिवर एंजाइम का इलाज कैसे किया जाता है (How Liver Enzymes are Treated in Hindi) :

लिवर एंजाइम का पता परीक्षण के द्वारा चलता है अल्ट्रासाउंड स्कैन लिवर की समस्या का पता लगाता है, लिवर एंजाइम का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है। नए परीक्षण में फाइब्रोस्कैन और फाइब्रोटेस्ट के रूप में जाने जाते हैं

लिवर एंजाइम को रोकने के उपाय (Ways to Inhibit Liver Enzymes in Hindi) :

  • शराब का उपयोग नहीं करें।
  • स्वस्थ भोजन का उपयोग करें।
  • हेपेटाइटिस का टीका लगवाएं।
  • मधुमेह पीड़ित हैं तो रक्त शर्करा का प्रबंधन करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें।
  • नियमित रूप से योग/व्यायाम करें।