पशुधन बीमा योजना (Livestock Insurance Scheme in Hindi)

पशुधन बीमा योजना : पशुधन बीमा योजना, एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे 10वीं पंचवर्षीय योजना के 2005-06 और 2006-07 के दौरान और 11वीं पंचवर्षीय योजना के 2007-08 के दौरान 100 चयनित जिलों में प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया था। इस योजना को बाद में देश के 100 नए चयनित जिलों में 2008-09 से नियमित आधार पर लागू किया गया था।

इस योजना को बाद में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के पशुधन विकास पर उप-मिशन के तहत जोखिम प्रबंधन और बीमा नामक एक घटक के रूप में शामिल किया गया था।

पशुधन बीमा योजना घटक का उद्देश्य किसानों को मृत्यु के कारण उनके पशुओं के किसी भी संभावित नुकसान के खिलाफ सुरक्षा तंत्र प्रदान करके जोखिम और अनिश्चितताओं का प्रबंधन करना और लोगों को पशुधन के बीमा के लाभ को प्रदर्शित करना है।

स्वतंत्रता के बाद हमारा देश विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में इतना विकसित होने के बावजूद भी पुरानी परंपराओं को नहीं भूला है, इसी का उदाहरण आज के गांव में रहने वाले लोग जोकि आज भी अपना गुजर बसर चलाने के लिए पुरानी परंपराओं पर आधारित पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आज भी निभा रहे हैं उसमें से पशुपालन की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है. लेकिन पशु पालन करना उनके लिए इतना आसान नहीं होता तो इस समस्या को थोड़ा कम करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पशु बीमा योजना का शुभारंभ हुआ है इस योजना के तहत गांव के मवेशी अपने पशुओं का बीमा करवा सकेंगे.

यह योजना अभी तक सरकार द्वारा कुछ चुनिंदा 300 जिलों में ही लागू की गई है और या कई सारे पशुपालक या मवेशियों के लिए एक फायदे का सौदा है इस स्कीम के तहत सरकार द्वारा पशुपालकों के पशुओं का बीमा करवाया जाता है. जिनके कारणवश मृत्यु होने से पशुपालकों या मवेशियों को नुकसान का सामना करना पड़ता है.

पशुधन बीमा योजना के मुख्य बिंदु (Key Highlights Livestock Insurance Scheme in Hindi) :

योजना का नाम :पशुधन बीमा योजना
योजना कब शुरू की गयी :2005-06
योजना किसके द्वारा शुरू की गयी :केंद्र सरकार द्वारा
योजना का उद्देश्य :पशुओं के लिए बीमा
योजना की अधिकारिक पोर्टल :यहां क्लिक करें

पशुधन बीमा योजना की योग्यता (Eligibility Of Livestock Insurance Scheme in Hindi) :

Livestock Insurance Scheme के तहत जो पशु दूध देते अथवा दूध नहीं देते हैं जो पशु दूध देते हैं वह अगर गर्भवती है अथवा बच्चे को जन्म दे चुकी है उसको इस बीमा के अंतर्गत शामिल किया जाता है.
• अगर आपका पशु पहले से ही कोई योजना के तहत सम्मिलित है तो वह इस पशु बीमा योजना के लिए योग्य नहीं है.
• अगर आप सिर्फ दो पशुओं के ही पशुपालक है तो आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं अथवा अगर आपके पास सिर्फ एक पशु ही हैं तो आप 3 साल तक का बीमा करवा सकते हैं.
• आपके पशुओं का बीमा बाजार के अधिकतम मूल्यों की तुलना पर किया जाएगा.

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पशुधन बीमा योजना के लाभ (Benefit Of Livestock Insurance Scheme in Hindi) :

अगर आप पशु बीमा योजना के अंतर्गत हो और अगर आपके पशु की किसी कारण वश मृत्यु हो चुकी है. तो आप बीमा कंपनी से 15 दिन बाद अपना लाभ उठा सकते हैं और मुआवजे का भुगतान मरने वाले पशु के अधिकतम मूल्यों के आधार पर होगी.

पपशुधन बीमा योजना की आवेदन प्रक्रिया (Process of Livestock Insurance Scheme in Hindi) :

एक जानवर का उसके वर्तमान बाजार मूल्य के लिए बीमा किया जाएगा। बीमा किए जाने वाले पशु के बाजार मूल्य का निर्धारण लाभार्थी और बीमा कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से पशु चिकित्सा अधिकारी या बीडीओ की उपस्थिति में किया जाएगा। पशु के न्यूनतम मूल्य का आकलन 3000 रुपये प्रति लीटर दूध की उपज या गाय के लिए स्थानीय बाजार (सरकार द्वारा घोषित) में प्रचलित मूल्य के अनुसार और 4000 रुपये प्रति लीटर दूध की उपज या के रूप में किया जाना चाहिए।

भैंस के लिए स्थानीय बाजार (सरकार द्वारा घोषित) में प्रचलित है। पैक जानवरों (घोड़े, गधे, खच्चर, ऊंट, टट्टू और मवेशी / भैंस। नर) और अन्य पशुधन (बकरी, भेड़, सूअर, खरगोश, याक और मिथुन) के बाजार मूल्य का आकलन पशु के मालिक द्वारा संयुक्त रूप से बातचीत द्वारा किया जाना है। और बीमा कंपनी द्वारा पशु चिकित्सक डॉक्टर की उपस्थिति में। विवाद की स्थिति में मूल्य निर्धारण का निराकरण ग्राम पंचायत/बीडीओ द्वारा किया जायेगा।

बीमा दावे के समय बीमित पशु को ठीक से और विशिष्ट रूप से पहचाना जाना होगा। इसलिए जहां तक ​​संभव हो ईयर टैगिंग पूर्ण प्रमाण होना चाहिए। पॉलिसी लेते समय ईयर टैगिंग की पारंपरिक विधि या माइक्रोचिप्स को ठीक करने की हालिया तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। पहचान चिह्न लगाने का खर्च बीमा कंपनियों द्वारा वहन किया जाएगा और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित लाभार्थियों की होगी। टैगिंग सामग्री की प्रकृति और गुणवत्ता पर लाभार्थियों और बीमा कंपनी द्वारा परस्पर सहमति होगी।

पशु चिकित्सक अपने दावे के निपटान के लिए निर्धारित टैग की आवश्यकता और महत्व के बारे में लाभार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं ताकि वे टैग के रखरखाव के लिए उचित देखभाल कर सकें। पशु पर पहले से उपलब्ध टैग का उपयोग विशिष्ट पहचान संख्या के साथ इस शर्त के अधीन किया जा सकता है कि यह किसान और एजेंसी द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत है और मौजूदा टैग के उपयोग के कारण दावों के निपटान में कोई विवाद नहीं होगा।

बीमा प्रस्ताव को संसाधित करते समय, मालिक के साथ जानवर की एक तस्वीर और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले ईएआर टैग के साथ जानवर की एक तस्वीर बीमा दस्तावेज के प्रसंस्करण के समय ली जाएगी। पशु की बिक्री या अन्यथा पशु को एक मालिक से दूसरे में स्थानांतरित करने के मामले में, बीमा पॉलिसी की समाप्ति से पहले, पॉलिसी की शेष अवधि के लिए लाभार्थी का अधिकार नए मालिक को स्थानांतरित करना होगा।

बीमा कंपनियों को दावों के निपटान के लिए केवल चार दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। बीमा कंपनी, बीमा पॉलिसी पेपर, दावा प्रपत्र और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के साथ सूचना। दावा देय होने की स्थिति में, बीमित राशि का भुगतान अपेक्षित दस्तावेज जमा करने के बाद सकारात्मक रूप से 15 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। यदि कोई बीमा कंपनी दस्तावेज जमा करने के 15 दिनों के भीतर दावे का निपटान करने में विफल रहती है, तो बीमा कंपनी लाभार्थी को प्रति वर्ष 12% चक्रवृद्धि ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगी।

• अगर आप पशु बीमा योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको इस लिंक पर क्लिक करना है ( http://dahd.nic.in ) जिससे आप इसकी ऑफिशल वेबसाइट पर पहुंच जाओगे
• अब आपको वहां पर योजना के ऊपर क्लिक करना है क्लिक करने के बाद आपके सामने एक फॉर्म आ जाएगा।
• उस फॉर्म के अंदर जो जानकारी आप से मांगी जा रही है आप वह जानकारी भर दे इस तरह आप आसानी से आपका आवेदन हो जाएगा.