Lori Lightfoot: Chicago’s acceptance, Refinement of Democracy.

लोरी लाइटफुट: शिकागो की स्वीकृति एवम लोकतंत्र की परिष्कृति।

सैद्धान्तिक रूप से स्वीकृति हासिल हुआ एवम किसी सोच का समाज मे स्थापित हो पाना अलग विषय है। जाति, धर्म, वर्ग, लिंग, नस्ल, भाषा, संस्कृति, मूल्य, लाभ-हानि, मान्यता आधार पर बंटा समाज जब भी बड़े समूह में होता है तो उदार रहता है लेकिन छोटे-समूह, स्वजनों एवम अकेले में संकीर्ण हो ही जाता है। आमतौर पर तसवीर के दूसरे रुख को देखना ही मुश्किल होता है लेकिन अमेरिका के शिकागो ने इस पहलू को बड़ी कोमलता से अनुभूत किया व बड़ी शिद्दत से स्वीकार करके मानवता को नए आयाम देने का प्रयास किया है।

लोरी लाइटफुट ने शिकागो की पहली अश्वेत-अफ्रीकन महिला के रूप में जीत हासिल की। लाइटफुट का जीवन विभिन्न प्रकार के संघर्षों एवम उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा है। लोरी लाइटफुट पहली सीट जितने वाली समलैंगिक सामाजिक प्रतिनिधि भी है। लाइटफुट एक ऐसी नेता बनना चाहती है जो आने वाली पीढ़ी को एक सन्देश दे सके एवम उनके विश्वास को आधार देना चाहती है कि वे अपनी मंजिल प्राप्त कर सकते हैं।

लाइटफुट सबकों साथ लेकर चलने में विश्वास करती है एवम बच्चों हेतु एक सुरक्षित समाज के निर्माण हेतु संकल्पबद्ध दिखाई देती है। उनकी योजनाओं में शिक्षा में विनियोग को बढ़ाना भी सम्मिलित हैं। वे राजनीति में शुचिता की पक्षधर है एवम उनके मत में राजनीति लाभार्जन की जगह अथवा स्त्रोत कदापि नही हैं।

लेखक मूलतः अमेरिकन नागरिक नही है एवम अमेरिकन राजनीति से कोई प्रत्यक्ष रूप से सम्बंधित भी नही है इसके बावजूद लेखक सोशल मीडिया पर उपलब्ध समाचारों एवम जानकारी के आधार पर यह दावा कर सकता है कि शिकागो के मेयर बनने का रास्ता लाइटफुट हेतु बहुत कठिन रहा है लेकिन उनके जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों हेतु एक उदाहरण बन सकता हैं।

वर्तमान समाज मे जहाँ विभिन्न देशों में आप धर्म, जाति, नस्ल, लिंग व भाषा के आधार पर लोकमत एवम लोकसत्ता का निर्धारण हो रहा हो उस माहौल में लाइटफुट के प्रति शिकागो के नागरिकों द्वारा दर्शित विश्वास उनकी जागरूकता का परिचायक है एवम एक स्वस्थ समाज के निर्माण का आशार्थी भी प्रतीत होता हैं।

एक सच्चे लोकतंत्र को परिभाषित करना सदैव आसान नही होता। यह सार्वभौमिक मूल्यों से संचालित नहीं किया जा सकता अतः इसे सर्वकालिक कसौटी पर कसना भी समीचीन नही प्रतीत होता है। लोकतंत्र हमेशा परिष्कृत होता रहता है एवम लाइटफुट इसका एक उदाहरण है। लोकतंत्र की असली ताकत विजय हासिल करने से कही अधिक अपने मूल्यों के साथ हार जाने के बावजूद सामुदायिक चिंतन में सरोकरिता बनाये रखना हैं।

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