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मैलकम मार्शल बनाम सुनील गावस्कर | Malcolm Marshall vs Sunil Gavaskar

मैलकम मार्शल एक ऐसा नाम है जिसने अपनी गेंदबाजी की रफ्तार एवम सटीकता के कारण क्रिकेट को एक नया रोमाच प्रदान किया था। ऐसे ही महान खिलाड़ियों के कारण क्रिकेट पूरे विश्व मे लोकप्रिय हैं। वे अपने समय मे विश्व के सबसे तेज गेंदबाज रहे थे जबकि उनके दौर में तेज गेंदबाजों की भरमार थी। अपनी गेंदबाजी से उन्होंने अपने समय के बैट्समैनों के हौसले पस्त कर के रख दिये थे। सुनील गावस्कर सर्वकालिक बेस्ट बैट्समैनों में शुमार हैं। इन दोनों के बीच एक जबरदस्त खेल प्रतिद्वंदता रही है। इस रोमांचक प्रतिद्वंदता को खेल जगत में बहुत बार दोहराया जाता है। सुनील गावस्कर जैसा बैट्समैन, कमेन्टर, क्रिकेट लेखक व सदाशय जेंटलमैन किसी भी राष्ट्र व समाज हेतु अनमोल सम्पति हैं।

मैलकम मार्शल दुनिया का बेस्ट तेज गेंदबाज | Malcolm Marshall world's best fast bowler

Getty Images Of Malcolm Marshal

वेस्टइंडीज के मैलकम मार्शल का नाम गेंदबाजी में सबसे अव्वल रहेगा। उनका बोलिंग रनअप एवम डिलीवरी फिनिशिंग दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मानी जा सकती हैं। वो जब बॉल को डिलीवर करते थे तब लगता था कि बंदूक से गोली सीधा शिकार हेतु निकली हो। वेस्टइंडीज एकमात्र ऐसी टीम रही है जिसमे दुनिया के बेस्ट बॉलर भी यह नही कह सकते थे कि उनका टीम में चयन किया जाएगा।

माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, जॉयल गार्नर, कोलिन क्राफ्ट व मैलकम मार्शल जैसे नाम ही बहुत थे जिनके कारण बैट्समैन रात को सो नही पाते थे। ये फ़ास्ट बॉलर्स अपने आप मे फ़ास्ट बोलिंग की एक स्कूल रहे है। इस तरह की भयावह बोलिंग क्षमता वाली टीम के सामने खेलने का सपना भी निरर्थक था। आज के इस लेख में हम मार्शल की कुछ विशेष बात करेंगे।

सामान्य कदकाठी के लेकिन सुगठित शरीर के मालिक मैलकम मार्शल का रनअप काफी लंबा व नियोजित था। 18 अप्रैल 1958 को जन्म लेने वाले मार्शल दुर्भाग्य से 1999 में इस दुनिया को छोड़ चुके हैं।

बारबाडोस, ब्रिजटाउन से उन्होंने अपना क्रिकेटिंग कैरियर शुरू किया था एवम हैम्पशायर हेतु वे काउंटी खेले थे। उनकी तेजगति की बॉल व गजब की स्विंग बल्लेबाज हेतु एक बुरा सपना ही थी। उन्नीस सौ सत्तर से उन्नीस सौ अस्सी के बीच उन्होंने वेस्टइंडीज का दबदबा बढ़ा दिया था। ऐसा तेज तर्रार गेंदबाज किसी भी टीम की शान होता हैं। उन्होंने मात्र 81 मैच में ही 376 विकेट लिए थे। विश्व के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शुमार होल्डिंग ने अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी 'नो होल्डिंग बैक' में लिखा है, "मेरे ख़याल से मैलकम मार्शल और एंडी रॉबर्ट्स दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ रहे. मैलकम रॉबर्ट्स की तुलना में ज़्यादा तेज़ थे । प्रेम से उनके मित्र उन्हें मैको बुलाते थे।"

मैलकम मार्शल अपनी गेंदबाजी के प्रति इतने समर्पित थे कि वे क्रिकेट मैदान से बाहर हर समय अपने पैरों में " वेट स्ट्रिप " बांध के रखते थे ताकि उनके पैरो की मांसपेशियों की मजबूती बरकरार रहे। उनका कैरियर आरंभ में बहुत प्रभावी नही था लेकिन 1978 में कैरियर शुरू करने वाले मार्शल ने 1980 में एक टेस्ट में 7 विकेट विश्व के क्रिकेट प्रेमियों का ध्यानाकर्षण कर लिया था।

मैलकम मार्शल का तूफानी गेंदबाजी अंदाज जो बल्लेबाज में खोफ जगा देता था। Www.shivira.com

मैलकम मार्शल की गेंद पर ही विश्व के तगड़े बल्लेबाज माइकल गेटिंग की नाक की हड्डी टूट गई थी। मार्शल अपनी दुश्मनी मैदान तक ही सीमित रखते थे लेकिन उनकी कर्नल नाम से मशहूर भारत के स्टाइलिश बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर से रंजिश थी। एक बार जब मार्शल बेटिंग कर रहे थे वेंगसरकर अनावश्यक अपील कर रहे थे। मार्शल का उन्होंने ठप्पे के बावजूद कैच लेकर अपील कर दी एवम उनको आउट करार दे दिया गया था। यह बात मार्शल के दिल को बहुत चुभी थी।

मार्शल ने अपनी ऑटोबायोग्राफी " मार्शल आर्ट्स " में अनेक बातों को खुलासा किया था। उनकी किसी और से खुन्नस रही हो अथवा नही लेकिन वेंगसरकर के बारे में उन्होंने अपनी कठोर भावनाओं का खुलकर इजहार किया था। वे वेंगसरकर को आउट करने के प्रति बहुत उत्सुक रहते थे तथा अपने बोलिंग लेवल को टॉप लेवल से भी ऊपर उठाने हेतु प्रयास करते थे।

अपने ख़ौफ़नाक गेंदबाजी के अलावा मार्शल निचले क्रम के अच्छे बल्लेबाज भी रहे थे। उन्होंने टेस्ट मैच व वनडे कैरियर के दौरान 2700 से अधिक रन बनाए थे। हालांकि उनका बेटिंग औसत 20 से कम रहा लेकिन उन्होंने टेस्ट मैच में एक बार 92 रन की पारी खेली थी।

सुनील गावस्कर दुनिया का बेस्ट बल्लेबाज | Sunil Gavaskar is the world's best batsman

निस्संदेह गावस्कर का रिकॉर्ड अब टूट चुका है लेकिन क्रिकेट की दुनिया मे सबसे पहले दस हजार रन बना कर वे रिकॉर्ड बुक में अमर है। इसके अलावा उन्होंने सर्वकालिक बेस्ट तेज गेंदबाजी का मुकाबला किया था यह बात क्रिकेट का हर विशेषज्ञ कहता हैं। उनकी बेटिंग स्किल क्रिकेट के ठोस सिद्धांतो पर आधारित थी उनके शॉट्स परफेक्ट होते थे। उनके जैसा स्टेट ड्राइव व कवर ड्राइव मार पाना प्रत्येक बैट्समैन का पहला सपना होता हैं।

सुनील गावस्कर सर्वकालिक बेस्ट बैट्समैन! Www.shivira.com

सुनील गावस्कर के बारे में यह मशहूर रहा है कि जितना उनको टफ मुकाबला व खराब पिच मिलता उतना ही वे अपने लेवल को बढ़ा देते थे। वे किसी भी प्रकार की गेंदबाजी व पिच पर टिक कर खेलने व बड़े स्कोर करने में सक्षम थे। वे उच्च स्तरीय क्रिकेटर के साथ ही कम्प्लीट जेंटलमैन है। इतने लंबे क्रिकेटिंग व कमेंट्री केरियर के बावजूद उन्होंने किसी विवाद का सामना नही किया। मैदान में उनका व्यवहार अन्य खिलाड़ियों हेतु आदर्श रहा।

गावस्कर ने अपने शानदार क्रिकेट खेल जीवन में 125 टेस्ट मैचों की 215 पारियों में 10,122 रन बना कर तत्कालीन रिकॉर्ड बना डाला था। इसके अलावा 108 वनडे में 3092 रन बनाये थे। उनका टेस्ट मैचों में 51.12 का बेटिंग औसत उनकी क्षमता को बताता हैं। वे अपने खेल कौशल व व्यवहार के कारण परफेक्ट खिलाड़ी के रूप में पहचान बना सके। उनमें लंबी पारियां खलने की अनोखी क्षमता थी। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 34 सैकड़े जमाएं थे। 10 जुलाई 1949 को जन्मे 72 वर्षीय सुनील गावस्कर का नाम क्रिकेट दुनिया के अलावा समाज मे बड़े आदर के साथ लिया जाता हैं। अर्जुन पुरस्कार, पदम भूषण व विस्डन से सम्मानित हो चुके इस महान बैट्समैन ने अपने कैरियर के दौरान अपनी कप्तानी में भारत को " बैसेन एंड हैजेज कप" एवम "एशिया कप" में फतह दिलवा कर कीर्ति प्राप्त कर भारत का परचम लहराया था।

सनी डेज, आइडल्स, रंस एण्ड रूइंस तथा वन डे वंडर्स जैसी महत्वपूर्ण क्रिकेटिंग किताबे लिखने वाले कलम के धनी इस खेल सितारे ने फिल्मों के रुपहले पर्दे पर अभिनय भी किया था। उनकी शांत व गम्भीर आवाज में उनके क्रिकेटिंग ज्ञान से ओतप्रोत कमेंटरी को सुनना एक सुखद अनुभव रहता है। अपनी कमेंटरी के मध्य उनकी शालीन मजाक व गहरे अनुभव से कमेंटरी में चार चांद लग जाते हैं।

कैसे सुनील गावस्कर ने मैल्कम मार्शल के सामने वापसी की | Malcolm Marshall vs Sunil Gavaskar

1983 के एक टेस्ट मैच में मैलकम मार्शल के विरुद्ध बल्लेबाजी करते वक्त गावस्कर के हाथ से बल्ला गिर गया था जिसको लेकर बहुत बयानबाज़ी हुई। कुछ लोगो ने यहां तक कह दिया था कि गावस्कर का कैरियर अब समाप्ति पर है। उस टेस्ट में सुनील गावस्कर पहली पारी में शून्य व दूसरी पारी में महज सात रन पर आउट हुए थे। उनको दोनों ही पारियों में मैलकम मार्शल ने आउट किया था।

मैलकम मार्शल का तूफानी अंदाज। Www.shivira.com

1980 के समय विश्व के समस्त बल्लेबाज जब वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी से आतंकित थे एवम अपनी सुरक्षा हेतु हेलमेट पहनकर ही बल्लेबाजी करते थे तब एकमात्र सुनील गावस्कर ही बिना हेलमेट पहनकर वेस्टइंडीज की इस आंधी के मुकाबले बल्लेबाजी करते थे।

1983 में भारत ने तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ टीम वेस्टइंडीज को हराकर क्रिकेट वनडे का विश्वकप जीत कर दुनिया भर में सनसनी मचा दी थी। 1983 के विश्वकप के बाद जब वेस्टइंडीज भारत आई तो मैलकम मार्शल जैसे तेज गेंदबाजों के कारण वेस्टइंडीज ने टेस्ट श्रृंखला 3-0 से और वनडे 5-0 से जीती थी। इस श्रंखला में मैलकम मार्शल ने 5 टेस्ट मैच में 33 विकेट लिए थे।  मैल्कम मार्शल 1983 की सीरीज के प्लेयर ऑफ दी सीरीज रहे थे।

1983 की सीरीज जिसे रिवेंज सीरीज या बदला तक कहा गया था उसमें वेस्टइंडीज ने भारत को खेल के हर क्षेत्र में मात दी तब एक मात्र बैट्समैन सुनील गावस्कर ने अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलकर 236 नॉटआउट का स्कोर करके विश्व के सामने खुद को सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज सिद्ध कर दिया था।

वेस्टइंडीज के कप्तान ने तब यह कहा था कि अगर गावस्कर ने यह पारी वेस्टइंडीज के अलावा विश्व की किसी अन्य टीम के खिलाफ खेली होती तो उनका स्कोर 400 से भी ज्यादा होता। इस सीरीज में गावस्कर के अलावा हरफनमौला कपिल देव ने भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था।
महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर का खूबसूरत अंदाज़। Www.shivira.com

अगले मैच से पहले सुनील गावस्कर ने जम कर तैयारी की एवम प्रेक्टिस के लिए बॉलर्स से कहा कि वे आधी पिच से तेज बोलिंग करे ताकि वे मैलकम मार्शल की स्पीड को मुकाबला कर सके। फिरोजशाह कोटला में हुए अगले मैच में सुनील गावस्कर ने जबरदस्त पलटवार किया एवम मात्र 94 बॉल में सेंचुरी ठोक दी थी। इससे पहले मात्र 37 बॉल पर उन्होंने अपना अर्धशतक पूर्ण कर लिया था।

1983 में ही एक मैच में जबकि गावस्कर ने एक टेस्ट की दोनों पारियों में मात्र 33 रन ही बना सके थे व दबाब में थे। रवि शास्त्री के अनुसार अगले मैच में गावस्कर वापस फॉर्म में आ गए तथा जब वो 49 रन पर खेल रहे थे तो मार्शल ने एक जबरदस्त शार्ट पिच गेंद जानबूझकर डाली थी। वह गेंद तूफानी रफ्तार से बिना हेलमेट बल्लेबाजी करते गावस्कर के सर के बीचोबीच लगी। बॉल गावस्कर के सर से टकराने के बाद काफी दूर गई थी। सारे मैदान व भारतीय खेमे में सनसनी मच गई थी।

उस टीम में सम्मिलित युवा विकेटकीपर किरण मोरे भाग कर सुनील गावस्कर के पास पहुंचे तथा उनसे यह पूंछा की क्या आपको बर्फ या अन्य किसी चीज की आवश्यकता है तो किरण मोरे के अनुसार गावस्कर ने उनको तुरंत मैदान से बाहर निकाल दिया। किरण मोरे गावस्कर के बारे में बात करते हुए कहते है कि गावस्कर बहुत वरिष्ठ खिलाड़ी थे व उन्होंने मुझे मैदान से तुरंत निकल जाने को जब कहा तो मोरे बहुत भयभीत हो गए थे। बाद में मोरे ने अनुभव किया कि टेस्ट स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी को किस प्रकार मजबूती से हर स्तिथि का सामना करके देश का सम्मान बढाना होता हैं एवम इस बात को सुनील गावस्कर ने उस चोट को सहन कर के सिद्ध कर दिया था।

विजयी अंदाज में गावस्कर। Www.shivira.com

गावस्कर को सम्भलने का मौका दिए बिना मार्शल दूसरी गेंद डालने बोलिंग एंड पर पहुँच गए व फिर उसी रफ्तार से दूसरी गेंद डाली जिसे गावस्कर ने बाउंड्री के पार चौके के लिये भेज दिया। उनके बीच मे गजब का मुकाबला रहा था लेकिन सबसे बुरी बात यह रही कि वेस्टइंडीज के किसी भी खिलाड़ी ने गावस्कर को चोट लगने के बाद सांत्वना तक प्रदान नही की।

भारत व वेस्टइंडीज के बीच खेले गए कटक वनडे के दौरान कमेंट्री करते हुए गावस्कर ने कहा कि मैं आज भी मार्शल को याद करके गहरी नींद से उठ जाता हूं। इसी प्रकार की विनम्रता के कारण गावस्कर एक महान क्रिकेटर के अलावा विश्व के सबसे महान कमेंट्रेटर कर रूप में आज विख्यात है। मैल्कम मार्शल से टकराव के बाद से गावस्कर ने स्कल केप पहनकर कर बैटिंग करना आरंभ किया था। इस केप में स्टील की एक प्लेट लगी होती थी।

सारांश | Summary

अंत मे यह कहा जा सकता है कि महान खिलाड़ियों के मध्य प्रतिद्वंदता मात्र मैदान तक ही रहती है इसी प्रकार मैलकम मार्शल व सुनील गावस्कर के मध्य खेल के मैदान के बाहर कोई प्रतिद्वंदता नही थी। मैलकम मार्शल को श्रदांजलि के साथ ही इस आलेख को समाप्त करते हैं।