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Management Mantra: 11 unique spells of human resource management which will make you successful and popular.

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मैनेजमेंट मंत्रा: मानवीय संसाधन प्रबंधन के 11 बेजोड़ मंत्र जो आपको सफल व लोकप्रिय बना देंगे।

उत्पादन के जितने भी संसाधन है उनमें से सबसे महत्वपूर्ण संसाधन मानवीय संसाधन है। मानवीय संसाधन को जो प्रबंधन मैनेज कर लेता है उसकी सफलता को कोई रोक नही सकता।

जब भी ह्यूमन मैनेजमेंट की बात आएगी तो हेनरी फोर्ड का नाम बड़े सम्मान से लिया जाएगा क्योंकि वे अपनी मोटरनिर्माण कम्पनी की सफलता का सबसे अधिक श्रेय अपने कार्मिको को प्रदान करते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्हें अपनी विशाल कम्पनी के छोटे से छोटे कार्मिक का नाम जुबानी याद था एवम वे लगभग सभी के व्यक्तिगत हालात से वाकिफ थे।

उत्पादन के संसाधनों में से "मानव संसाधन" ही एक मात्र संसाधन है जो कि जीवित है, प्रतिक्रिया करता है, स्वयम की सोच रखता है, गतिशील है, स्वयम को निरन्तर परिमार्जित करता है। अतः मानवीय संसाधन से व्यवहार करते समय एक प्रबंधक को अत्यंत मानवीय, सजग, कुशल, मैनेज्ड व स्मार्ट रहने की आवश्यकता है।

एक प्रबंधक के रूप में आपको ह्यूमन मैनेजमेंट करते समय निम्ना टिप्स पर काम करना चाहिए। ये टिप्स सर्वकालिक, सार्वभौमिक व सर्वे सन्तु सुखिनः है।

1. पूर्वाग्रह नही रखे-

पहली टिप्स है कि आपको मानव संसाधन के मामले में कभी भी पूर्वाग्रहीत नही रहना चाहिए। आप ये मानकर चले कि सभी मनुष्य जाति, लिंग, वर्ण, रंग, भाषा, क्षेत्र व नस्ल के आधार पर एक समान है। ये सबसे महत्वपूर्ण टिप्स है। आप किसी भी व्यक्ति मूल्यांकन उसके कार्य के आधार पर ही करेंगे तो ही आप सफल प्रबंधन कर सकेंगे।

2. एगेन्स्ट वर्ड्स हवाई जहाज से यात्रा करते है-

किसी भी व्यक्ति के बारे में अनावश्यक रूप से नकारात्मक व्यक्तिगत टिप्पणी से बचें क्योकि सकारात्मक टिप्पणी सदियों में पहुंचती है जबकि नकारात्मक टिप्पणी क्षणों में पहुंचती है। इस प्रकार की बेजा टिप्पणियों से आपके लिए अनावश्यक प्रतिरोध जन्म लेते है।

3. तारीफ ढोल बजा कर करे-

अगर किसी कार्मिक की सराहना करनी हो तो सभी के सामने, पूरे जोश से व दिल से करें लेकिन किसी की आलोचना करनी हो तो अकेले में करे, सुधारात्मक करे, सम्वाद के रूप में करे व उसका पक्ष जानने का भी प्रयास करें।

4. श्रेय लेने का नही देने का प्रयास करे-

जब हम बड़े समूह में काम करते है तो कार्य की पूर्ण सफलता पर सभी की कोशिश श्रेय लेने की होती है। आपको श्रेय लेने से बचना चाहिए एवम उन व्यक्तियों को श्रेय अवश्य देना चाहिए जिन्होंने कार्य किया है। किसी भी हालात में गलत व्यक्ति को श्रेय अथवा सम्मान नही देना चाहिए क्योंकि इससे समाज में अनरेस्ट डवलप होता है।

5. व्यंग्य करने से श्रेष्ठ है कठोर बोलना-

अगर आपकी किसी अधीनस्थ या सहकर्मी से कोई वास्तविक समस्या है तो आप उस प्रॉब्लम से सम्बंधित तथ्य एकत्र करके अपना विरोध दृढ़ता पूर्वक उसके सामने रखे लेकिन व्यंग्य/अपरोक्ष/छायावादी तरीके का प्रयोग नहीं करें। याद रखे एक व्यंग्य के कारण ही मानवीय सभ्यता को कुरुक्षेत्र का युद्ध देखना पड़ा था।

6. नेक्स्ट पार्टी प्रॉफिट/प्रॉब्लम पर फोकस करें-

जब भी आप किसी सहकर्मी या अधीनस्थ से कोई ऑफिशियल इश्यु पर डील करे या कोई मामला सेटल करे इस इश्यू में उसको प्रॉफिट पहुँचाने का प्रयास करें व वर्क प्लान करते समय उसकी प्रॉब्लम को अवश्य ध्यान में रखे।

7. याद रखे। समय परिवर्तनशील हैं-

जब भी आप होल्डिंग पोजिशन में हो तो व्यक्तियों से डील करते समय बातचीत के मानवीय नियमों को ध्यान में रखें। यह ध्यान रखे कि समाज से आपको वापस वही मिलेगा। अगर आप अपनी बेटर पोज़िशन पर लोगों से रूढ़ व्यवहार करेंगे तो ध्यान रखे कि समय परिवर्तनशील है व कल आपकी जगह पर कोई होगा व शायद आपको उसे फेस करना पड़ेगा।

8. दिल बड़ा रखे व माफ करना जारी रखें-

अपने साथियों व सहायक कर्मियों की छोटी मोटी बातों को इग्नोर कर दे। छोटे इश्यू को बड़ा नही बनाये व दूसरों की गलतियों को माफ करना सीखें। किसी को माफ कर सकना ही एक ऐसा गुण है जो आपके आत्मसंतोष में इजाफा करेगा।

9. अकारण किसी से मदद नही मांगे व कोई मदद मांगे तो अकारण मना नही करें-

एक बार किसी से मदद मांग लेंगे तो इसकी आदत बनने लगती है। मदद कम से कम मांगे लेकिन अगर आप से कोई मदद मांगे तो बिना कारण उसे मना नही करे। एक लीडरशिप का जन्म दुसरो की मदद से ही होता हैं।

10. जापानी मॉडल अपनाओ-

जापान में एक प्रबंधक अपने कार्मिको को सीखने का अवसर प्रदान करता है। उनकी गलतियों को सुधारने का मौका देता है। आपको भी अपने सहकर्मियों को नए लर्निंग अवसरों को देना है। उनके लिए लर्निंग अवसर डवलप करने पड़ेंगे।

11. गोल्डन रूल-

अगर मैं अग्नि में रहूँ तो तुम धूप में रहो, अगर मैं धूप में रहूँ तो तुम छाया में रहो, अगर मैं छाया में रहूँ तो तुम आराम करो।
आपको एक प्रबन्धक के रूप में यही कार्यशैली रखनी है। जिम्मेदारी उठानी है। रोल मॉडल बनना है। लीडरशिप को सिद्ध करना है। आगे बढ़ना है तो सभी के एक कदम आगे रहना है।

सुरेन्द्र सिंह चौहान