Categories: Astrology
| On 3 weeks ago

पांचवें भाव में मंगल का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Mars in 5th House in Hindi

पांचवें भाव में मंगल का फल

पांचवें भाव में मंगल का शुभ फल (Positive Results of Mangal in 5th House in Astrology)

  • पंचमभाव में मंगल (Mangal in 5th House) स्त्रीराशियों में (मकर को छोड़कर) शुभफल देता है। जन्मलग्न से पंचमभाव में मंगल होने से जातक की उदराग्नि प्रबल हो जाती है पाचन शक्ति तीव्र हो जाती है इतनी भूख लगती है कि क्षुधा शान्ति होती ही नहीं।
  • पांचवें भाव में मंगल में हो तो जठराग्नि प्रबल होती है अर्थात् अधिक भोजन खाता है
    और पचा भी लेता है। धन सुख, सट्टे में लाभ आदि मिलता है। स्त्री का सुख मिलता है। ज्ञानी, किन्तु प्रत्यक्षवादी, संसारवादी, तीक्ष्णबुद्धि होता है। धन सन्तति, कीर्ति प्राप्त होते हैं।
  • पंचमभाव में मंगल होने से जातक भोगी और धनी होता है।
  • पांचवें भाव में मंगल होने से जातक उग्रबुद्धि, बुद्धिरहित, चंचलमति, कू्रर, कपटी, व्यसनी, रोगी, उदररोगी, कफ-वात-व्याधिवान्, कृशशरीरी, गुप्तांगरोगी, चंचल, एवं सन्तति-क्लेशयुक्त, सुखहीन, धनहीन, पुत्रहीन, मित्रसुख, स्त्रीसुख से हीन, घुमक्कड़ दूसरा धर्म अपनानेवाला, पिशुन, अनर्थकारी,खल, विकल और नीच होता है। मकर, मेष वा वृश्चिक में होने से पुत्र बहुत होते हैं अन्नदान करता है। अधिकारी होता है। उच्च या स्वगृह में मंगल होने से, अथवा शुभग्रह की मंगल पर दृष्टि होने से जातक सट्टा, लाटरी, रेस आदि में बहुत यश मिलता है।  
  • मंगल स्वगृही होने से या उच्च का होने से एक पुत्र होता है जो देह से दुबला पतला होता है।

पांचवें भाव में मंगल का अशुभ फल (Negative Results of Mangal in 5th House in Astrology)

  • पांचवें भाव में मंगल (Mangal in 5th House) के जातक
    गर्भपात होने की संभावना भी रहती है।
  • पांचवें स्थान में मंगल की स्थिति से जातक सन्तान सुख से वंचित रहता है। पांचवें भाव में बैठा हुआ अकेला ही मंगल जातक की उत्पन्न तथा गर्भस्थित सन्तान को नष्ट करता रहता है। जातक की पुत्र संतान जीवित नहीं रहती है-और जीवित रहे भी तो रोगी रहती है। सन्तान का सुख नही होता। पंचम भाव में मंगल होने से सन्तान अच्छी नहीं होती, सन्तान होती है किन्तु मरजाती है। सन्तति जन्मते ही मर जाती
    है-बहुत दु:खी होता है।
  • जातक चुगुलखेर होता है। बन्धुओं से वैमनस्य होता है, तथा दीन होता है। स्त्री, मित्र तथा शत्रुओं से कष्ट होता है। पाराशरमत से पंचम मंगल पिता का मारक है।
  • जातक को बुरी वासनाएँ होती है। शत्रुओं से कष्ट होता है। बुद्धिभ्रंश आदि रोग होते हैं। पंचम स्थान में-मंगल हो तो अल्प धन की प्राप्ति होती है किन्तुं कीर्ति प्राप्त होती है।