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सातवें भाव में मंगल का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Mars in 7th House in Hindi

सातवें भाव में मंगल के जातक को घर-बार प्राप्त होता है। पत्नी अच्छी किन्तु कलहप्रिय, तथा पति को अपने वश में रखनेवाली होती है।जातक चोरी या व्यभिचार के लिए स्वस्त्री को छोड़कर दुष्टस्त्रियों का सेवन करता है। संतति कम होती है। जातक को धन, यात्रा, घर का सुख थोड़ा होता है।

सातवें भाव में मंगल का फल

सातवें भाव में मंगल का शुभ फल (Positive Results of Mangal in 7th House in Astrology)

  • सातवें भाव में मंगल (Mangal in 7th House) का जातक बुद्धिमान होता है। घर-बार प्राप्त होता है। पत्नी अच्छी किन्तु कलहप्रिय, तथा पति को अपने वश में रखनेवाली होती है। भाई, मामा, मौसियाँ बहुत होती है।
  • सप्तम भाव में मंगल डाक्टरों के लिए अच्छा है-चीर-फाड़ आदि करने से कीर्ति मिलती है। वकीलों की भी मंगल फौजदारी अपीलों में विशेष यश मिलता है-मैकैनिक, इंजीनीयर, टरनर, फिटर, ड्राईवर आदि लोगों के लिए सप्तम मंगल अच्छा है। पुलिस तथा अधिकारी अफसरों के लिए भी यह मंगल अच्छा है ।      
  • सप्तम भाव में मंगल के 1, 3, 5, 7, 8, 10, 11, 12 राशि में होने से शुभ फल का अनुभव होता है।     
  • मंगल बलवान् होने से स्त्री तरूण साधारण सुंदर होती है। वृष या तुला में मंगल होने से पति पत्नी से बहुत प्रेम करता है। मिथुन,
    तुला तथा कुंभ में साईकिल-मोटर का विक्रय, इनकी मरम्मत, विमान ड्राइविंग-ये व्यवसाय धनार्जन के लिए ठीक रहते हैं। पुरूषराशि में होने से धैर्य और सहिष्णुता बने रहते हैं।

सातवें भाव में मंगल का अशुभ फल (Negative Results of Mangal in 7th House in Astrology)

  • सातवें स्थान में मंगल (Mangal in 7th House) होने से जातक की स्त्री-दुखी, वातरोगी, शीघ्र कोपी, कटुभाषी, धूर्त, मूर्ख, निर्धन, घातकी, धननाशक एवं ईर्ष्यालु, दुष्टबुद्धि होती है।
  • सप्तम में मंगल हो तो जातक अनुचित कर्म करनेवाला होता है। अपमानित होना पड़ता है। जातक क्रोधी, नीचवृत्तिी लोगों का नौकर, ठगानेवाला, तथा गुणरहित होता है। जातक युद्धप्रिय होता है। शराबी तथा झगड़ालू होता है।
  • मंगल सप्तमभाव में होने से अत्यन्त लघुता को प्राप्त करता है अर्थात् अभागा होता है।
  • सप्तम का मंगल किसी भी राशि में हो मंगल प्रभावान्वित व्यक्ति प्रत्येक उद्योग करने की इच्छा करता है किन्तु ठीक तरह से किसी उद्योग में भी सफल नहीं होता। 18 वें वर्ष से 36 वें वर्ष कुछ स्थिरता होती है और मंगल के कारकत्व का कोई एक उद्योग करता है। जातक मारा-मारा फिरता है। परदेश में वास करना पड़ता है।
  • सातवें भाव में मंगल के जातक को शत्रु पराजित करते हैं और सदा अपने आपको शत्रुओं से घिरा हुआ महसूस करता है। शत्रुसमूह पीड़ा देकर उसके शरीर को दुर्बल कर देता है। शत्रुओं से भयभीत होता है। शत्रुओं के साथ स्पर्धा करने से हानि होती है। जातक का शरीर दुबला होता है। निर्बल और घमंडी होता है। जातक व्यापार को छोड़ बैठता है। व्यापार में यश नहीं मिलता है। व्यापार में शत्रु की स्पर्धा प्रबल और खुलेरूप से होती है। साझीदारी में यश नहीं मिलता। अनेक प्रकार के अनर्थ पीडि़त करते हैं। व्यर्थ की चिन्ताएँ होती हैं। सदा तकलीफ से रहता है। जातक को सुख नहीं मिलता है। युवावस्था में पत्नी का वियोग भी संभव होता है।