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| On 3 weeks ago

नवे भाव में मंगल का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Mars in 9th House in Hindi

नवमभाव में मंगल में पुलिस तथा आबकारी अफसरों के लिए भी यह योग विशेष फलदाता नहीं इन्हें अपने अफसरों से लड़-झगड़ कर उन्नति प्राप्त करनी होगी। नवमभाव में मंगल के होने से जातक के पिता का अनिष्ट होगा। पिता का सुख नहीं मिलेगा। माँ का सुख कम मिलेगा।

नवे भाव में मंगल का फल

नवे भाव में मंगल का शुभ फल (Positive Results of Mangal in 9th House in Astrology)

  • नवे भाव में मंगल (Mangal in 9th House) के फल मिश्रित स्वरूप के हैं-ऐसा आचार्यों का मत है। नवमभाव में मंगल होने से जातिका कुशाग्रमति-तीक्ष्ण बुद्धि होगी।
  • जातक तेजस्वी होगा। शीलवान् तथा विद्यानुरागी होगी। जातक प्रसिद्ध होगा। 28 वें वर्ष भाग्योदय होगा। जातक नौकरी करेगा। व्यापार के लिए नाव
    में घुमेगा। जातक नेता, अधिकारी, यशस्वी एवं विख्यात, पराक्रमी होगा। यह राजयोग होता है। डस्टि्रक्टबोर्ड, लोकलबोर्ड, असैम्वली आदि में चुनाव जीतेगा। इस स्थान के मंगल से विदेश यात्रा संभव है। विदेश में भाग्योदय होगा।
  • नवे भाव में मंगल के जातक  आय के स्रोत अच्छे रहेंगे, इसलिए किसी सीमा तक समाज में मान्यता मिल जायेगी। जतिका प्रचुर धन लाभ, राज समाज में सम्मान, सुखोपभोग प्राप्त करेगी। प्रारब्धदत्त अर्थात् भाग्यदत्त धन से धनवान् होगी।
  • मंगल नवम भाव में हो तो जातक राजकुलमान्य, सबसे वंदनीय, भाग्यवान्, ग्रामों में सुख पाने वाला होगा। राजा का मित्र होगा, राजा से (सरकार से) मान आदर बहुत मिलेगा।      
  • मंगल पुरुष राशि में होने से बहिनों को तारक और भाइयों को मारक होगा।
  • कर्क में
    नवम मंगल होने से अच्छा फल मिलेगा। इस योग में डाक्टर अच्छी कीर्ति पाते हैं। इन्हें किसी वस्तु की कमी नहीं रहेगी।  शुभग्रहों से युक्त अथवा उनकी राशियों में हो तो पुण्यवान् होगी। इंजीनियर फिटर, सुनार, लोहार आदि के लिए यह मंगल लाभदायक है। पुलिस तथा आबकारी अफसरों के लिए भी यह योग विशेष फलदाता नहीं इन्हें अपने अफसरों से लड़-झगड़ कर उन्नति प्राप्त करनी होगी। मेष, सिंह तथा मकर को छोड़कर अन्य राशियों मे होने से जातक विद्वान् किन्तु धर्महीन होगा। शुभ ग्रहोें द्वारा देखा जा रहा है अत: धर्मभाव में वृद्धि एवं धर्म परायण बनेगा।

  

नवे भाव में मंगल का अशुभ फल (Negative Results of Mangal in 9th House in Astrology)

  • नवम भावस्थ मंगल (Mangal in 9th House) होने से
    जातक कठोर स्वभाव की, क्रोधी, अभिमानी, द्वेषी, ईर्ष्यालु, झूठ बोलने वाली, प्रवासी, शंकाशील, दुराग्रही, असन्तुष्ट होगी।
  • नवम भावस्थ मंगल के प्रभाव में उत्पन्न जातक धर्महीन, हिंसक, पापी होगी तथा पापकर्म में रुचि होगी। नवमभाव के मंगल से जातक दुराचारी, व्यभिचारी, नीचों की संगति में रहने वाली, कू्रर तथा कष्ट युक्त होगी।
  • नवमभाव में मंगल होने से जातक की मानसवृत्ति हिंसा की ओर रहेगी। धर्म पर अल्प श्रद्धा होगी। अध्यात्म के बारे में दुराग्रही विचार होंगे। पराक्रम व्यर्थ होगा-भारी परिश्रम-भारी यत्न अथवा भारी उद्योग करने से भी लाभ बहुत थोड़ा होगा। उद्योग परिश्रम या शारीरिक कष्ट से चाहे जितना भी यत्न धनार्जन के लिए किया जावे उसका फल परिश्रम की तुलना में नगण्यी होगा। बुद्धिमता से बनाई गई किसी भी योजना को नवम मंगल फलीभूत होने नहीं
    देगा।
  • जातक कार्य में निपुण नहीं होगी, लोग इससे द्वेष करेंगे।
  • जातक लोगों का घात करेगी। जातक के पास वस्त्र अच्छे नहीं होंगे। अनेक लोगों से घिरी हुई, भाग्यहीन होगी। अभागी होगी। प्रसिद्ध होते हुए भी अभागी होंगे।
  • जातक भ्रातृविरोधी होगी। जातक को बड़ा साला या जेठा सगा भाई नहीं होगा अर्थात् जातिका जेठे साले और जेठे भाई के सुख से वंचित ही रहेगी। पुरुष राशि में होने से भाई की मृत्यु होगी। दो भाइयों की मृत्यु होगी। नवमभाव में मंगल के होने से जातक के पिता का अनिष्ट होगा। पिता का सुख नहीं मिलेगा। माँ का सुख कम मिलेगा।