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Martyr's Day (India) 30 January

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शहीद दिवस 30 जनवरी : दो मिनट हेतु मौन रखा जाता है ।

शहीद दिवस कार्यक्रम 2020

30 जनवरी 2020 , गुरुवार को प्रत्येक वर्ष के समान इस वर्ष भी देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने जीवन का बलिदान देने वालो की स्मृति में शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में शहीदों की पावन स्मृति में दो मिनट का मौन धारण किया जाता है।

इस कार्यक्रम को 10.30 पर आरम्भ करके राष्ट्रपिता की प्रतिमा के समक्ष 10.30 से 10.40 तक पुष्पार्पण के तुरंत पश्चात रामधुन व गांधीजी के प्रिय भजनों के गान पश्चात उपस्थित समुदाय को ठीक 11 बजे सावधान मुद्रा में लाकर 2 मिनट के मौन के पश्चात कार्यक्रम का समापन किया जाता हैं।

इस कार्यक्रम के सुचारू संचालन हेतु प्रातः 11 बजे सायरन बजा कर भी सभी को सूचित किया जाता है।

शहीद दिवस भारत में उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये मनाया जाता है जो भारत की आजादी, कल्याण और प्रगति के लिये लड़े और अपने प्राणों की बलि दे दी। इसे हर वर्ष 30 जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है। भारत विश्व के उन 15 देशों में शामिल हैं जहाँ हर वर्ष अपने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिये शहीद दिवस मनाया जाता है।

शहीद दिवस 30 जनवरी को मनाने का कारण।

शहीद दिवस 30 जनवरी को मनाने का कारण।
30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में आयोजित करने का कारण यह है कि 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी! इसके पश्चात हर वर्ष 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है और बापू को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस मौके पर विशेष श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया जाता है।

बापू की अंतिम यात्रा में लगभग 10 लाख व्यक्ति सम्मिलित हुए थे एवम 15 लाख व्यक्ति उनके अंतिम दर्शनार्थ अंतिम यात्रा की राह में खड़े हुए थे।

शहीद दिवस का आयोजन।

शहीद दिवस का आयोजन।
इस दिन राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेना के प्रमुख राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।  सेना के जवान इस मौके पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में अपने हथियार को नीचे झुकाते है।  इस मौके पर पूरे देश में महात्मा गांधी समेत अन्य शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा जाता है।

देश में 23 मार्च को भी शहीद दिवस आयोजित किया जाता है क्योंकि 23 मार्च के दिन ही आजादी के परवानों शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को भी अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दी गई थी।