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शब्द रचना | शब्द रचना का अर्थ (Meaning of Shabad Rachna) उपसर्ग के उपयोग से शब्दों की रचना करना या बनाना | Creating words using prefixes

हिंदी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा मे से एक है जब आप शब्द रचना करना सीख जाते है तो उस भाषा से आपका जुड़ाव बढ़ जाता है। हम अपनी अभिव्यक्ति हेतु शब्दों में कुछ नया शब्द जोड़ते है जैसे मूल शब्द है जैसे अवलोकन, सिंहावलोकन, विहंगावलोकन इत्यादि। किसी भी भाषा का सौंदर्य उसके शब्द भंडार होते है । जितने अधिक शब्द किसी भाषा मे प्रयुक्त होते है उतना ही अधिक हम बेहतर रूप से अपने विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते है तो आइये, समझते है शब्द रचना के बारे में।

शब्द-रचना का अर्थ | Meaning of Shabad Rachna

शब्द रचना का अर्थ है कि किसी एक शब्द में अन्य शब्द को जोड़कर नए शब्द का निर्माण करना। शब्द-रचना हम स्वभावतः भाषा व्यवहार में कम से कम शब्दों का प्रयोग करके अधिक से अधिक काम चलाना चाहते हैं। अतः शब्दों के आरंभ अथवा अंत में कुछ जोड़कर अथवा उनकी मात्राओं या स्वर में कुछ परिवर्तन करके नवीन-से-नवीन अर्थ बोध कराना चाहते हैं। कभी-कभी दो अथवा अधिक शब्दांशों को जोड़कर नए अर्थ-बोध को स्वीकारते हैं। इस तरह एक शब्द से कई अर्थों की अभिव्यक्ति हेतु जो नए-नए शब्द बनाए जाते हैं उसे शब्द रचना कहते हैं।

शब्द रचना के चार प्रकार हैं।

  • उपसर्ग लगाकर
  • प्रत्यय लगाकर
  • संधि द्वारा
  • समास द्वारा

उपसर्ग के उपयोग से नए शब्द बनाना या निर्माण करना | Creating new words using a prefix

वे शब्दांश जो किसी शब्द के आरंभ में लगकर उनके अर्थ में विशेषता ला देते हैं अथवा उसके अर्थ को बदल देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। जैसे परा पराक्रम, पराजय, पराभव, पराधीन, पराभूत इत्यादि।

इस लेख में हम उपसर्ग के उपयोग द्वारा किस प्रकारणनये शब्दो का निर्माण किया जाता है ? इस पर चर्चा करेंगे अगले अध्याय में हम प्रत्यय, संधि व समास के द्वारा नए शब्दो की रचना अथवा निर्माण के बारे में बात करेंगे।

उपसर्गों को चार भागों में बाँटा जा सकता है

(क) संस्कृत के उपसर्ग

(ख) हिन्दी के उपसर्ग

(ग) उर्दू के उपसर्ग

(घ) उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय

संस्कृत के उपसर्ग प्रयोग करके नए शब्दो का निर्माण | Creating new words using the Sanskrit prefix

सँस्कृत प्राचीन भाषा है एवम इसकी गणना विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषाओं में होती हैं। सँस्कृत व हिंदी भाषा मे निकटता है अतः हिंदी में शब्द रचना करते समय हम हिंदी के शब्दों के नए अर्थ गढ़ते है इसके निम्नलिखित उदाहरण है-

निम्नलिखित तालिका में संस्कृत भाषा के उपसर्गों के उपयोग से हिंदी भाषा के शब्दों को नया रूप दिया गया है उदाहरणार्थ उत्तम हिंदी का शब्द है इसमे जब सँस्कृत भाषा के उपसर्ग अति को जोड़ा

जाता है तो नया शब्द निर्माण होता है अतिउत्तम। उत्तम का अर्थ भी अच्छा होना है लेकिन अतिउत्तम शब्द अधिक प्रभावोत्पादक होता हैं।
सँस्कृत के उपसर्ग।

हिन्दी के उपसर्ग प्रयोग करके नए शब्दो का निर्माण करना | Creating new words using the Hindi prefix

ये प्रायः संस्कृत उपसर्गों के अपभ्रंश मात्र ही हैं। हिंदी व सँस्कृत भाषा मे बहुत निकटता होने के कारण अनेकानेक शब्द दोनों भाषाओं में समान हैं। जब हिंदी भाषा के उपसर्ग अति को जोड़ा जाता है तो नया शब्द निर्माण होता है अतिउत्तम। उत्तम का अर्थ भी अच्छा होना है लेकिन अतिउत्तम शब्द अधिक प्रभावोत्पादक होता हैं।

जैसा कि हम जानते ही है उपसर्ग लगाकर किसी शब्द का उपयोग बदल जाता है एवम नई विशेषता का सृजन होता है उसी प्रकार उपसर्ग के प्रयोग से किसी शब्द का अर्थ बदल जाता हैं। उदाहरणार्थ भाव हिंदी का शब्द है इसमे जब हिंदी भाषा के ही उपसर्ग अ को जोड़ा जाता है तो नया शब्द निर्माण होता है अभाव । भाव शब्द का अर्थ मन मे विचार अथवा मूल्य से होता है लेकिन अभाव शब्द का अर्थ अनुपस्थिति व गरीबी हैं।

हिन्दी के उपसर्ग।

उर्दू के उपसर्ग प्रयोग करके नए शब्दो का निर्माण करना | Creating new words using the Urdu prefix

उर्दू का भारत मे बहुत पुराना इतिहास रहा है। सैकड़ो

वर्षों से हिंदी भाषा व उर्दू जुबान का समिल्लित उपयोग भारत मे होने के कारण उर्दू के उपसर्गों के उपयोग से भी हिंदी में अनेक नए शब्दों का निर्माण हुआ है।

उदाहरणार्थ जोर हिंदी भाषा का शब्द है इसमे जब उर्दू भाषा के उपसर्ग कम को जोड़ा जाता है तो नया शब्द निर्माण होता है कमजोर । हिंदी भाषा के शब्द जोर का अर्थ ताकत व मजबूती से होता है , उर्दू भाषा के शब्द कम शब्द का अर्थ थोड़ा होता हैं। इससे बना नया शब्द कमजोर जोर का विलोम शब्द हैं।

उर्दू के उपसर्ग।

उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होने वाले सँस्कृत अवयय का प्रयोग करके नए शब्दों की रचना करना

सँस्कृत विश्व की महानतम भाषाओं में से एक है। भारतीय ऋषियों, मुनियों व विद्वानों ने संस्कृत भाषा मे अनेक महान गर्न्थो का सृजन किया। सँस्कृत भाषा की नियमावली बेहद उन्नत है। सँस्कृत के अनेकानेक प्रकार से प्रयोग है। जैसा की हम जानते है उपसर्ग का प्रयोग शब्द के आगे लगाकर नए शब्द का निर्माण किया जाता है उसी प्रकार ऐसे शब्द जिनमें लिंग, वचन, पुरुष, कारक इत्यादि के कारण कोई दोष नही आता है उन शब्दों को हम अवयय कहते हैं। अवयय के कुछ उदाहरण अग्रनुसार है - कब, इधर, किन्तु, परन्तु, क्यों, जब, तब, और, अतः, इसलिए आदि।

अतः कुछ अवयव का प्रयोग हम शब्द के

आगे करके यानी उपसर्ग के समान करके भी नए शब्दो की रचना या निर्माण कर सकते हैं।

आशा है कि आप अब उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द की रचना किस प्रकार होती है को समझ चुके हैं एवम स्वयम भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्दो का निर्माण कर सकते है । अगले लेख में आपको नए प्रकार से शब्द रचना के बारे में बात करेंगे।

किसी भी भाषा के सौंदर्य से सम्बंधित कुछ नई जानकारी हेतु आप निम्नलिखित लेख अवश्य पढ़ें।