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| On 2 years ago

Measures to remove Depression and Phobia.

भवरोग से मुक्ति का उपाय!

1. आत्मनिरीक्षण करना अर्थात प्राप्त विवेक के प्रकाश में अपने दोषो को देखना!
2. की हुई भूलो को पुनः नहीं दोहराने का व्रत लेकर विश्वासपूर्वक भगवान से प्राथना करना!
3. विचार का प्रयोग अपने पर और विश्वास का प्रयोग दूसरे पर करना अर्थात न्याय अपने पर और प्रेम तथा क्षमा अन्य पर करना!
4. जितेंद्रीयता, सेवा , भगवतचिंतन और सत्य की खोज द्वारा अपना

व्यक्तित्व का सतत निर्माण करना!
5. दुसरो के कर्तव्य को अपना अधिकार, दुसरो की उदारता को अपना गुण और दुसरो की निर्धनता को अपना बल नहीं मानना!
6. पारिवारिक और जातीय सम्बन्ध नहीं होते हुए भी पारिवारिक भावना के अनुरूप ही पारस्परिक सम्बोधन तथा सदभाव अर्थात कर्म की भिन्नता होने पर भी स्नेह की एकता बनाये रखना!
7. निकटवर्ती जनसमाज की यथाशक्ति क्रियात्मक रूप से सेवा करना!
8. शारारिक हित की
दृष्टि से आहार-विहार में संयम तथा दैनिक कार्यो में स्वावलम्बन रखना!
9. शरीर श्रमी, मन संयमी, बुद्धि विवेकवती, ह्रदय अनुरागी तथा अहम को अभिमान शून्य करके अपने को सुन्दर बनाना!
१० सिक्के से वस्तु, वस्तु से व्यक्ति, व्यक्ति से विवेक तथा विवेक से सत्य को अधिक महत्व देना!
11. व्यर्थ चिंतन के त्याग तथा वर्तमान के सदुपयोग द्वारा भविष्य को उज्जवल बनाना!

(ब्रह्मलीन श्रदेय संत स्वामी श्री शरणानन्द जी महाराज)

वर्तमान युग मे मानसिक तनाव, आशंका, भय, असंतोष व अवसाद बढ़ रहा है। साधनों की प्रचुरता के उपरांत भी लोगो मे नैराश्य का भाव बढ़ता जा रहा है।
विश्व के हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत का नाम 130 वें नम्बर पर है। इससे स्पष्ट है कि व्यक्तिगत रूप से लोगो मे असंतोष बढ़ रहा है। यह कहना समीचीन है कि जब अंग्रेज भारत मे आये थे तो वे एक आम भारतीय की प्रसन्नता को देखकर यह विचार करते

थे कि साधनों की कमी के उपरांत भारतीय इतने खुश कैसे रहते है जबकि आज स्थिति यह है कि साधन पर्याप्त है लेकिन हम खुश नही है।
उपरोक्त आलेख कुछ वर्षों पहले नोट किया था अब मिला तो उसे आपकी सेवा में प्रेषित किया है। स्वामीजी महाराज के वचनों से हम सभी का हित होगा।
स्वामीजी के चरणों मे मेरा प्रणाम।

सादर!