मिड डे मील योजना (Mid Day Meal Scheme in Hindi)

मिड डे मील योजना : भारत की आजादी के इतने वर्षों बाद, हमारे देश में ना जाने कितनी ही ऊंचाइयों को छू लिया है। चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो या वह शिक्षा क्षेत्र हो, लेकिन इतनी प्रगति करने के बाद भी हमारे देश में कुछ समस्याएं ऐसी भी है, जिससे लोग हमेशा चिंताजनक रहते हैं। जैसे कि हमारे देश में जनसंख्या की वृद्धि होने के कारण रोजगार के क्षेत्रों में हर किसी को रोजगार प्राप्त नहीं होता, इसी कारण की वजह से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।

इसको लेकर सरकार ने बीते सालों में कई बड़े कदम उठाए हैं, जैसे कि बच्चों के माता-पिता को सरकारी स्कूलों के माध्यम से अपने बच्चों को शिक्षा की ओर धकेलना जिससे वह अपना भविष्य को एक नई ऊंचाई दे सके, लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं उनको पोषक भोजन प्राप्त नहीं हो पाता।

इसी समस्या की तरफ देखकर केंद्र सरकार ने सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के लिए मिड डे मील योजना का स्थापन स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1995 में किया था। इस योजना के तहत जो बच्चे 1997 के बाद जन्मे है, उनको सरकारी स्कूलों के अंदर मिड

डे मील या कहे तो पोषक भोजन प्राप्त करवाना
जिससे उनके सोचने की क्षमता और पढ़ने की क्षमता में वृद्धि हो सके ।

मिड डे मील योजना के अंतर्गत जो बच्चे सरकारी प्राथमिक स्कूल के अंदर पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक पढ़ते हैं तथा वह बच्चे जो 8 कक्षा तक पढ़ते हैं, उनको पोषक तत्वों से पूर्ण भोजन उपलब्ध करवाना अगर भोजन की बात करें तो प्रत्येक बच्चे के भोजन में 400 ग्राम कैलोरी तथा 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध करवाया जाता है।

मिड डे मील योजना के मुख्य बिंदु (Key Highlights Mid Day Meal Scheme in Hindi) :

योजना का नाम :मिड डे मील योजना
योजना कब शुरू की गयी :1995
योजना किसके द्वारा शुरू की गयी :केंद्र सरकार
योजना का उद्देश्य :बच्चों को खाना देना
योजना की अधिकारिक पोर्टल :यहां क्लिक करें
Mid Day Meal Scheme

मिड डे मील योजना के फायदे (Benefit Of Mid Day Meal Scheme in Hindi) :

  • इस विश्व में प्रत्येक बच्चे की शिक्षा अति आवश्यक है, जो उसके विकास की तरफ पहला कदम है लेकिन हमारे भारत में काफी माता-पिता ऐसे हैं जो बच्चों को सरकारी स्कूल तक भी नहीं भेजते लेकिन इस योजना के बाद ज्यादातर माता पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला करवा रहे हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही।
  • योजना के तहत उन्हीं बच्चों को भोजन प्राप्त होता है, जिनकी हाजिरी सरकारी स्कूल में 75% से ज्यादा है।इसके कारण बच्चों में फिजूल अवकाश की कमी रहती है और वह अपनी पढ़ाई की तरफ झुकाव रखते हैं।
  • इस योजना का प्रभाव सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों पर ही नहीं पड़ा बल्कि जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के बच्चों पर भी पड़ा है जैसे कि ज्यादातर आदिवासी समूह के लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजना पसंद नहीं करते लेकिन इस योजना के बाद आदिवासी समूह के लोगों में भी वृद्धि हुई है।
  • जिन बच्चों को अपने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण एक वक्त की रोटी नसीब होती थी अब वह भरपेट खाना खा सकते हैं।
  • इस योजना के लागू होने के बाद समाज में रहने वाले अन्य जाति वाले बच्चों को साथ में बैठकर भोजन करवाया जाता है जिससे उनमें भाईचारा बढ़ता है।
  • इस योजना में ना ही सिर्फ बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन दिया जाता है, साथ में उन बच्चों को कुछ नैतिक मूल्य भी सिखाए जाते हैं जैसे कि खाने से पहले हाथ धोना, खाने से पहले प्रार्थना करना।

मिड डे मील योजना का मकसद (Objective Of Mid Day Meal Scheme in Hindi) :

  • इस योजना के तहत सरकार का जो मुख्य उद्देश्य है वह यह है की जितने भी ग्रामीण वर्ग में गरीब बच्चा है जिनको एक वक्त की रोटी मिलती है उनको पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की प्राप्ति करवाना।
  • इस योजना के तहत सभी बच्चों को एक साथ बैठकर भोजन करवाया जाता है जिससे उनमें आपसी संबंध अच्छे बने और इससे उन सब में नैतिक गुणों का विकास हो जिसकी वजह से जो समाज में ऊंच-नीच की प्रथा है उसको खत्म किया जा सके।
  • इस योजना के तहत जो माता पिता पुरुष लड़के कि शिक्षा को प्राथमिकता देना पसंद करते हैं उनकी सोच को परिवर्तित करता है जिससे वह बच्चियों को स्कूल भेज सकें।
  • इस योजना का एक उद्देश्य यह भी है कि आदिवासी प्रजाति के बच्चों तथा लड़कियों की संख्या में वृद्धि करना।
  • कुपोषित बच्चों को प्राथमिकता देकर उन्हें अधिक भोजन देना तथा उनके विकास को सुनिश्चित करना।

Also Read :

मनरेगा योजना (Manrega Yojana) : युवाओं के लिए सरकार की तरफ से रोजगार का अवसर
पशु बीमा योजना (Livestock Insurance Scheme) : मवेशियों के लिए सुनहरा मौका
किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana) : विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा कदम।
Indira Gandhi Matritva Poshan Yojana: (इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना 2021)
राजस्‍थान स्वजल योजना (Rajasthan Swajal Yojana)
Mukhyamantri Yuva Sambal Yojana (राजस्थान मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना)

मिड डे मील योजना की समस्या (Limitations Of Mid Day Meal Scheme in Hindi) :

  • बेशक सरकार की इस
    योजना में बच्चों की वृद्धि तो हुई है लेकिन यह योजना सिर्फ आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए ही सीमित है तो जो माता-अपने बच्चों को भोजन के लिए स्कूल भेजते हैं तो वह उन्हें आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाते हैं, इससे बच्चों का पूरा विकास नहीं हो पाता।
  • इस योजना में सरकारी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों को अपना योगदान देना पड़ता है जिसके कारण वहां के बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती और इसी वजह से सरकार का मुख्य उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाएगा।
  • कभी-कभी इस योजना में कुछ सरकारी स्कूलों को राशन की प्राप्ति नहीं हो पाती तो इसकी वजह से बच्चों को मिड-डे-मील भी नहीं मिल पाता।
  • अगर खाना उपलब्ध होता है तो प्रत्येक बच्चों को बेसिक सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती।
  • रसोई घर में हाइजीन का ध्यान भी नहीं रखा जाता, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, वह बीमार भी पड़ सकते हैं।