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| On 3 years ago

Minimum and Maximum is at yours consideration.

दो शब्दों को अब काम में लेना ही पड़ेगा- मिनिमम व मैक्सिमम।

भारत के 125 करोड़ लोग बस एक चीज पर पक्का सहमत है कि हम सभी को एक समृद्ध, सुखी व सुरक्षित राष्ट्र चाहिए। इसके लिए हम सभी कार्य व त्याग हेतु तैयार है।
पूरा विश्व भारतीय प्रतिभा का लोहा मानता है और इसके अनेक सबूत है। आप विश्व की टॉपमोस्ट कम्पनियों के शीर्ष अधिकारियों में भारतीयों का प्रतिशत देख ले। इतनी प्रतिभा के बावजूद हम क्यों लड़खड़ा जाते है?

आज अनेक क्षेत्रों में हमे बहुत काम

करने की आवश्यकता है। एक छोटे से आलेख में हम सभी विषय सम्मिलित नही कर सकते अतः इस आलेख में मात्र दो बिंदुओं पर आपका ध्यानाकर्षण चाहिए।
हम दो शब्दों पर बात करेंगे। मिनिमम जिसे न्यूनतम या कमसेकम या अतिआवश्यक कहा जा सकता है व दूसरा मैक्सिमम जिसे अधिकतम या हद्द या ब्लेक वाल कह सकते है।

मिनिमम-

अर्थशास्त्र में एक टर्म होती है जिसे "थ्रो अवे प्राइज़" कहते है यानी वो कीमत जिससे नीचे किसी वस्तु का विक्रेता माल को बेचने से मना कर देता है। जैसा कि आप देखते ही है कि टमाटर जब 1₹ किलो से कम हो जाता है तो किसान मंडी जाने की जगह उसे राजमार्गो पर फेंक देते है क्योंकि उनके ट्रांसपोटेशन तक की कीमत भी निकलनी दुभर हो जाती है।

जब हमारा अन्नदाता किसान भी बेसिक्स के आधार

पर ही निर्णय करता है तो हमको भी उसे फॉलो करते हुए किसी भी पद की, उसकी आवश्यकतानुसार, एक न्यूनतम यानी मिनिमम कटऑफ डिसाइड कर लेनी चाहिए।
इससे कम योग्यता स्वीकार्य नही होगी, ऐसा आशय सुपरिभाषित कर लेना चाहिए ताकि अतिरंजित उदाहरण समाज के समक्ष प्रस्तुत नही हो सके।

मैक्सिमम-

आपने पुरानी फिल्में देखी ही होगी, जब हीरोइन का अमीर बाप गरीब हीरो के सामने एक चेक फेकता है और कहता है कि " मेरी बेटी को भूलने की कीमत इस चैक में भर दो, चेक पर मैने साइन कर दिए है"। यह मैक्सिमम है।
अब यह व्यवस्था करनी पड़ेगी की हर उपभोक्ता वस्तु की "अपर सेल प्राइज़" क्षेत्रानुसार परिभाषित करनी पड़ेगी। आप बाजार में जाकर देखे तो पाएंगे कि एक मेडिकेटेड क्रीम या समान साल्ट की कोई गोली के पचास भाव है। जैसे सरकारी सप्लाई वाली कम्पनी उसी कॉम्बिनेशन वाली क्रीम को 2.5 ₹ में सप्लाई कर देती है जबकि मार्केटिंग फंडा मेडिकल ग्रुप बाजार में उस कॉम्बिनेशन की क्रीम को एक सैटलमेंट के तहत 80₹ तक बेच डालता है। ये क्या है?
अगर आप हर कमोडिटी की मैक्सिमम प्राइज़ डिसाइड कर देंगे तो बाजार में करतब तो कम होंगे। उपभोक्ता की गर्दन भी सुरक्षित रहेगी।
एक कहावत किसी ने कही, सबने सुनी, यहाँ समीचीन लगती है।
" मैक्सिमम योर्स प्रॉफिट एंड मिनिमाइज योर्स लॉस"।।
सादर।
आपका अपना।
सुरेन्द्र सिंह