मुहूर्त | धर्म मे अगाध विश्वास रखे लेकिन अंधविश्वास से दूर रहे | Muhurta | Have great faith in religion but stay away from superstitions.

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धर्म मे अगाध विश्वास रखे लेकिन अंधविश्वास से दूर रहे। हम सभी प्राथमिक रूप में इसे मानते है लेकिन जीवन मे कई बार अंधविश्वास के कारण कुछ अनावश्यक कार्य व व्यय भी करते है। एक सीमा तक हर चीज जायजन्हें क्योकि हम जिंदगी को जीना चाहते है नाकि हिसाब-किताब का बहीखाता बनाना। आज सोशल मीडिया पर एक लेख मिला, आपके लिए प्रस्तुत है।

मेरे एक चाचाजी के घर मे बरकत नहीं हो रही थी।किसी ने सलाह दी कि घर के गेट की दिशा ठीक नहीं है।बहुत मेहनती रहे।घर निर्माण के कार्य ही करते थे।

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गेट की दिशा बदलते-बदलते बुजुर्ग हो गए अंतिम दिशा बदली उसके बाद कम ही जिये।जब उनका निधन हुआ तो एक दिन बैठकर सोच रहा था कि जिस इंसान ने लोगों को अपनी मेहनत के बल पर झोंपड़ियों से निकालकर बंगले बनाकर दिए उसके घर की ग्रहदशा क्यों बिगड़ रही है!

जब निर्माण कार्य मे लगे लोगों के घरों की जानकारी लेनी शुरू की तो 90%लोग खुद कच्चे मकान में रहते पाए गए।किसी कामगार ने बचत करके पक्का मकान बना भी लिया तो वो गृह नक्षत्र व शुभ दिशा व मुहूर्त के चक्कर मे फँसे मिले।

रामनिवास भारी कहते है कि मुहूर्त तो केवल पाखंड करने के लिए होता है।

जन्म लेने के लिए
मरने के लिए
डॉक्टर को दिखाने के लिए
खेत में बीज बोने के लिए
खेत में पानी देने के लिए
निनाण करने के लिए
खाद देने के लिए
गाय भैंस चराने के लिए
परीक्षा देने के लिए
पढ़ने के लिए
काम धंधा करने के लिए
खाना खाने के लिए
नहाने के लिए
खेलने के लिए
घूमने के लिए
नींद लेने के लिए तो किसी मूहुर्त की आवश्यकता नहीं होती है।

जब मैं पहली बार दिल्ली आया था तो चचेरे भाई का मजाक-मजाक में तौलिया छीनकर आया था।पुरानी दिल्ली स्टेशन पर 6.30am को उतरा था।जनरल कोच में पूरी रात जागकर आया था व दिन में 12 बजे एग्जाम था।उतरते ही प्लेटफार्म उसी तौलिए को ओढ़कर सो गया था।

एग्जाम था व थका हुआ था।किसी ऊपरी शक्ति के धन्यवाद व आशीर्वाद के चक्कर मे नहीं फंसा।थके को बिना मुहूर्त के ही प्लेटफार्म पर नींद आ गई।हाथ मुँह धोकर तय समय पर एग्जाम सेन्टर पर पहुंच गया।

नौकरी के लिए तीन फॉर्म भरे थे।यह पहला एग्जाम था।तीन एग्जाम दिए और सबसे पहले इसी का परिणाम आया।पहली को जॉइन कर लिया।बाकी दोनों में चयन हुआ लेकिन नहीं गया।

जब भी फॉर्म भरने,एग्जाम देने या जॉइन करने घर से निकला तब रास्ते मे पड़ने वाले किसी भी धर्म स्थल के सामने हाथ नहीं जोड़े,चयन होने पर किसी ईश्वरीय शक्ति को धन्यवाद नहीं दिया।एक बात जरूर मन मे गुदगुदाता कि मेहनत के खिलाफ कोई अन्याय हुए तो आपका आशियाना नहीं बचना।

इसलिए नहीं तो पाखंड करना और न ही उसको करने के लिए मुहूर्त पूछना।

जीने के लिए आवश्यक और उपयोगी कार्य के लिए मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं।जब करोड़ों कमाकर,धर्म संध्याओं का आयोजन करके भी अचानक हार्ट अटैक से विदा हो सकती है तो क्यों जिंदगी को इन उलझनों में खपाये रखना?

मुझे दुःख है कि मेरे चाचाजी ने जिंदगी में जो मेहनत की,जो अर्जित किया वो गेट की दिशा के चंगुल में फंसकर अपने जीवन मे अपनी मेहनत का उपयोग नहीं कर पाए।

क्या फायदा पाखंड का जब एक इंसान अपने जीवन की सारी जमापूंजी अपने सपनों का घर बनाने में खर्च कर दें और कोई पाखंडी कह दे कि आपके गृह प्रवेश का मुहूर्त नहीं है और पूरा परिवार पुराने जर्जर घर मे इंतजार करता ही निपट जाएं!

प्रेमसिंह सियाग ,की वाल पोस्ट से।

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