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| On 3 years ago

Munshi Premchand: A great Indian writer.

मुंशी प्रेमचंद: एक महान भारतीय लेखक।

भावनाओं के चितेरे, भारतीयता के सूचक, भाव प्राकट्य क्षमता के विशेषज्ञ व भारत के मूर्धन्य लेखक मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिवस 31 जुलाई के शुभ अवसर पर समाज उन्हें बड़े गर्व से याद करता है।

यह भारत के विश्व गुरु होने का प्रमाण है कि हम इस कालजयी श्रेष्ठतम लेखक को भी भारत का सबसे महान लेखक कहने का दुस्साहस नही कर सकते क्योंकि इस महानतम संस्कृति में अनेकों महान लेखकों ने अपना योगदान दिया है।

इसके उपरांत भी

हम निसंकोच रूप से मुंशी प्रेमचंद को बीसवीं सदी का महानतम लेखक कहकर पुकारा सकते है। मुंशी प्रेमचंद गत सदी में भारतीय लेखन के केंद्र बिंदु रहे एवम उनके लेखन ने भारतीयता को उसके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखकर अपने लेखन में अभिव्यक्त किया।

31 जुलाई 1880 को जन्मे धनपतराय प्रेमचंद को "नबाब राय" व " मुंशी प्रेमचंद" के नाम से पहचाना जाता है। एक कहानीकार व उपन्यासकार के रूप में आपकी कृतियाँ आने वाले समय मे पाठकों को मूल भारतीयता का पाठ पढ़ाएगी एवम साहित्कारों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगी।

वाराणसी के एक छोटे से ग्राम लमही में जन्मे प्रेमचंद के मानस में ग्राम्य जीवन की छाप सदैव रही जो की उनकी रचनाओं के ताने-बाने का प्रमुख आधार है। मुंशीजी ने एक अध्यापक के रूप में समाज की सेवा की थी।

वे यथार्थ के धरातल पर लिखते थे लेकिन आदर्श को सर्वोपरि मानते थे। वे भारतीयता के कठोर पक्षधर थे लेकिन पाखंड व अंधविश्वास के घोर विरोधी थे। वे सामाजिक सुधारों के हामी थे। उनके प्रगतिशील साहित्य में इसे बहुत सहज तरीके से महसूस किया जा सकता है।

आप किसी भी भारतीय से श्रेष्ठ हिंदी लेखक के नाम को जानना चाहेंगे तो वह सबसे पहले मुंशी प्रेमचंद का ही नाम लेगा। हिंदी भाषा के शिक्षकों को साक्षात्कार में मुंशी प्रेमचंद पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से बात करनी ही पड़ती है।

गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन इत्यादि मुंशी जी की अमर रचनाएं है। आज के आधुनिक युग मे अगर आप कभी आत्मिक सुख के लिए मूल भारत मे जीने के अभिलाषी हो तो आप प्रेमचंद साहित्य को पढ़ना आरम्भ कर दीजिए। प्रेमचंद साहित्य हमारी अनमोल धाती है।

मुंशीजी के लेखन का प्रभाव उनके बाद के साहित्यकारों पर प्रत्यक्ष दिखाई देता हैं। प्रसिद्ध लेखक फडीश्वर नाथ रेणु, यशपाल, सुदर्शन, श्रीनाथ सिंह पर मुंशीजी का प्रभाव महसूस किया जा सकता है।

आज मुंशीजी के 138 वे जन्मदिवस पर आप सभी से अनुरोध है कि आप अपने प्रियजनों (विशेषकर युवाओं) को प्रेमचंद साहित्य में से कोई भी एक पुस्तक खरीद कर उन्हें भेंट करे एवम उसके अध्ययन की प्रेरणा दे।
सादर।