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| On 2 months ago

Munshi Premchand: मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित पुस्तकों के वेब लिंक Web links for Books written by Premchand.

मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) को आज हिंदी का मूर्धन्य लेखक माना जाता है लेकिन सत्य यह है कि उनकी लेखनी ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक रत्न रूपी पुस्तक भण्डार इस संसार को प्रदान किये है। उनकी पुस्तकें आने वाली पीढ़ियों तक श्रेष्ठतम मानवीय मूल्यों का संचरण करेगी।

भारतवर्ष के आधुनिक काल के लेखकों में प्रथम नाम मुंशी प्रेमचंद का आता है। मुंशी प्रेमचंद की कलम से शब्द नही अपितु  भारतीयता प्रवाहित होती थी। आज के आधुनिक समय मे जब भारतीयता के दर्शन दुर्लभ हो गए है तब युवाओं को राष्ट्र की आत्मा को समझने के लिए मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं को आवश्यक रूप से पढ़ना चाहिए।

मुंशी प्रेमचंद की पुस्तकों को पढ़ना एक ऐसा अहसास है जिससे किसी भी व्यक्ति को भारतीय होने पर गर्व का अहसास होता है एवं साथ ही उसे सर्वोच्च नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों को पहचानने तथा अवसर मिलता है। मुंशी जी की पुस्तकों को पढ़ने हेतु श्रेष्ठ यह है कि आप उनकी पुस्तकों को खरीद कर पढ़े एवम उनको सहेज कर अपनी निजी लाइब्रेरी में हीरों के समान रखे। आपकी सुविधा हेतु इस आलेख में हिंदी के मूर्धन्य लेखक

आदरणीय मुंशी प्रेमचंद के बारे में कुछ जानकारी एवम उनकी ऑनलाइन उपलब्ध पुस्तकों के वेब लिंक आपकी सुविधा हेतु दिए जा रहे हैं।

प्रेमचंद : संक्षिप्त जीवन परिचय | Premchand: Brief Biography

उत्तरप्रदेश के लमही ग्राम (वाराणसी) में 31 जुलाई 1880 को श्री अजायब राय व आनंदी देवी के घर  जन्मे प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय था। आपकी किताब सोजे-ए-वतन अंग्रेजो द्वारा प्रतिबंधित कर दिए जाने के कारण आपने इसके बाद "प्रेमचंद" के नाम से लिखना आरम्भ किया था।

Munshi Premchand Www.shivira.com


मात्र 18 वर्ष की आयु में मेट्रिक करने के पश्चात आपने शिक्षक के रूप में कार्यारम्भ किया। आपने अध्यापन के साथ अध्ययन जारी रखा व शिक्षा विभाग में इंस्पेक्टर बने। आप के लेखन के साथ ही जीवन मे भी सुधारवादी प्रयास दर्शित होते है आपने प्रथम विवाह सफल नही होने पर दूसरा विवाह एक विधवा नारी से किया था। लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ।

मुंशी प्रेमचंद का लेखन कार्य | Writing work of Munshi Premchand

मुंशी प्रेमचंद ने 15 उपन्यास, 300 कहानियाँ, 3 नाटक, 10 अनुवाद, 7 बाल-पुस्तको के लेखन के अतिरिक्त अनेक समीक्षाएं, परिचय इत्यादि का

सृजन कार्य किया। आपकी एक किताब सोज-ए-वतन अंग्रेजो ने सीज कर दी थी एवम एक पुस्तक मंगलसूत्र अधूरी रह गई थी।

मुंशी प्रेमचंद : मुंशी शब्द जुड़ने का कारण | Munshi Premchand: The reason for adding the word Munshi

प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय था। आपके लेखन कार्य पर अंग्रेजो ने प्रतिबंध लगा दिया था।  नबाबराय के नाम से वे ऊर्दू में भी लिखते थे। उर्दू अखबार "ज़माना" के संपादक मुंशी दया नारायण निगम ने नबाव राय के स्थान पर 'प्रेमचंद' उपनाम उन्हें सुझाया था।


" हंस " नामक एक पत्र में वे कन्हैयालाल मुंशी के साथ सह-सम्पादक थे। सम्पादकीय में कई बार दोनों का नाम एक साथ इस प्रकार छपता था।


मुंशी, प्रेमचंद
इस प्रकार यह मुंशी प्रेमचंद प्रचारित हो गया।

मुंशी प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट क्यो कहा गया ?

बंगाल के प्रसिद्ध कथाकार शरत बाबू के घर जब एक सम्पादक गए तो उन्होंने देखा कि शरत जी एक उपन्यास पढ़ रहे थे। वह उपन्यास प्रेमचंद का लिखित था व शरत जी ने उनके नाम के आगे उपन्यास सम्राट लिख दिया था। इसके बाद से ही यह शब्द प्रचारित हो गया।

मुंशी प्रेमचंद के लेखन कार्य पर संक्षिप्त टिप्पणी | Brief note on the writing work of Munshi Premchand

आपका लेखन गरीब व मध्यमवर्गीय समाज से अधिक सम्बंधित था। विभिन्न प्रकार के लेखन के बावजूद उनकी सर्वकालिक पहचान उनके उपन्यासों से ही रही है। बेहतरीन शिल्प व सम्वाद के उपरांत भी उनके नाटक बहुत अधिक प्रतिष्ठित नही हो सके।

मुंशीजी के माता-पिता उनके बचपन मे ही स्वर्ग सिधार चुके थे अतः उन्होंने बहुत कठिन समय व आर्थिक परेशानियों का सामना किया। आपने प्रथम विवाह के पश्चात दूसरा विवाह एक विधवा नारी से किया। अध्यापक के रूप में समाज से जुड़े। आजादी के लिए सँघर्ष करते राष्ट्र में उनके लेखन प्रतिबंधित हुए।

उपरोक्त कारणों से उन्हें जीवन मे अनुभवों की बहुलता मिली। योग्य विद्यार्थी,   कर्मठ शिक्षक व इंस्पेक्टर जैसे ओहदे पर कार्य ने उनके लेखन को विराटता प्रदान की। उनके लेखन पर भारतीयता, ग्राम्य जीवन, सामाजिक कुरीतियों, मानवीय बन्धनों, मुक्ति की छटपटाहट, प्राकृतिक जीवन, संसाधनों की कमी, भारतीय मानसिकता, स्त्रियों के जीवन मे सुधार की आवश्यकता, धर्मनिष्ठा, सामाजिक जीवन मे शुचिता के साथ मनुष्य ह्रदय में पल्लवित होते प्रेम व राष्ट्र के प्रति प्रेम के मिलन ने उनकी कलम से शुद्ध भारतीय लेखन प्रवाहित हुआ।

प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यास व उनके लिंक | Major novels of Premchand and their links.

1. सेवा सदन 1918

डाउनलोड कीजिये-

https://epustakalay.com/book/6798-sevasadan-by-premchand/

ऑनलाइन पढ़िए-
https://epustakalay.com/book/6798-sevasadan-by-premchand/

2. प्रेमाश्रम 1922

https://epustakalay.com/book/5653-premashram-by-premchand/

3. रंगभूमि 1925

https://epustakalay.com/book/26596-rangabhumi-by-premchand/

4. निर्मला 1925


https://archive.org/search.php?query=Nirmala%20pdf%20premchand

5. कायाकल्प 1927


https://epustakalay.com/book/7086-kayakalp-by-premchand/

6. गबन 1928


https://epustakalay.com/book/5728-gaban-by-premchand/

7. कर्मभूमि 1932

https://epustakalay.com/book/5375-karmbhumi-by-premchand/

8. गोदान 1936

https://epustakalay.com/book/26633-godan-by-premchand/

उपरोक्त के अतिरिक्त मुंशी प्रेमचंद की 100 से अधिक कहानियाँ उपलब्ध है।

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