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आज भी धड़क रहा श्रीकृष्ण का दिल, जानें हजारों साल पुराना ये रहस्य (Mysterious Facts about Shree Krishna)

आज भी धड़क रहा श्रीकृष्ण का दिल कृष्ण पृथ्वी पर अवतरित होने वाले सबसे महान अवतारों में से एक हैं। लाखों कृष्ण भक्त भगवद गीता में लिखे गए श्लोको का अनुसरण करते हैं। वे भगवान विष्णु के आठवे अवतार थे । एक नीले शरीर वाले बांसुरी वादक और एक चुंबकीय अवतार जिसने मानव रूप में जीवन की चुनौतियों का सामना किया और अपनी अंतर्निहित ब्रह्मांडीय शक्तियों का प्रदर्शन किया। एक युग पुरुष या पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित, कृष्ण अपने भक्तों को 'रास लीला' की शक्ति के साथ लपेटते रहते हैं

लेकिंग कृष्ण की रहस्यमयी मौत हमें हैरान करती रहती है। कहानी के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद कृष्ण एक पेड़ की शाखा पर आराम कर रहे थे। जाहिर है, एक शिकारी ने अपने लटकते पैरों को हिरण समझ लिया और तीर चला दिया। जिससे भगवन श्री कृष्ण की मृत्यु हो गई लेकिन ऐसे कहा जाता कि हजारों साल पहले मर चुके भगवान कृष्ण का दिल आज भी पृथ्वी पर धड़क रहा है

पांडवों के स्वर्ग लोग जाने के बाद पूरा द्वारका नगर समुद्र की गहरीयो में समा गया तब भगवान कृष्ण के जलते हुए हृदय सहित सब कुछ पानी के साथ समुद्र में बह गया, ऐसा कहा जाता है की कृष्ण नगरी के ये सारे अवशेष आज भी पानी के गहराइयों में मौजूद हैं भगवन कृष्ण का हृदय लोहे के एक मुलायम पिंड में बदल चुका है.

अवंतिकापुरी के महाराज इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के बहुत ही बड़े भक्त थे औ इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु उनके दर्शन पाना चाहते थे तभी एक रात उन्होंने अपने सपने में देखा कि स्वयं भगवान विष्णु उन्हें नीले माधव यानि कृष्ण भगवन के रूप में दर्शन देंगे महाराज इंद्रद्युम्न अगली ही भोर नीले माधव की खोज में चल पड़े जब उन्हें नीले माधव यानि कृष्ण भगवन मिले तो वे इसे अपने साथ ले आए और एक नए मंदिर भगवान जगनाथ मंदिर का निर्माण किया

एक बार एक नदी में स्नान करते हुए महाराज इंद्रद्युम्न को लोहे का एक बहुत मुलायम पिंड मिला तो उस लोहे के नरम पिंड को पानी में तैरता देख महाराज इंद्रद्युम्न बहुत आश्चार्य में पड़ गए, इस पिंड को हाथ लगाते ही महाराज इंद्रद्युम्न के कानो में कानों में भगवान विष्णु की आवाज सुनाई दी स्वयं भगवान विष्णु ने महाराज इंद्रद्युम्न से कहा, 'यह मेरा यानि कृष्ण भगवन का हृदय है, जो लोहे के एक मुलायम पिंड से बना हुआ है और ये हमेशा धड़कता रहेगा, महाराज इंद्रद्युम्न तुरंत भगवन कृष्ण के ह्दय को भगवान जगन्नाथ मंदिर ले गए और भगवान कृष्ण के हदय को बहुत ही सावधानी के साथ उसे मूर्ति के पास रख दिया

कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ में लिया तो वह खरगोश की तरह उछल रहा था। एक आँख पर पट्टी थी। हाथ में ग्लव्स होने पर ही हम महसूस कर पाते थे। आज भी

जगन्नाथ यात्रा के अवसर पर पुरी के राजा स्वयं सोने की झाडू लेकर झाड़ू लगाने आते हैं।
आज भी धड़क रहा श्रीकृष्ण का दिल

भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार से अंदर पहला कदम रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर नहीं सुनाई देती, जबकि आश्चर्य की बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर निकलते हैं तो आवाज आती है सागर सुना जाएगा। आपने अधिकतर मंदिरों के शिखर पर पक्षियों को बैठे और उड़ते देखा होगा, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से आज भी कोई भी पक्षी नहीं गुजरता है।

झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में फहराता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर पर दिन के किसी भी समय छाया नहीं पड़ती है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की 45 मंजिला चोटी पर स्थित ध्वज को प्रतिदिन बदला जाता है, ऐसा माना जाता है कि यदि ध्वज को एक दिन के लिए भी नहीं बदला गया तो मंदिर 18 साल के लिए बंद हो जाएगा। इसी तरह,

भगवान जगन्नाथ मंदिर के सबसे शीर्ष पर एक सुदर्शन चक्र भी लगा हुआ है, जिसे किसी भी दिशा से देखने पर ऐसा लगया है जैसे वो आपकी ओर है।

भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए एक दूसरे के ऊपर 7 मिट्टी के बर्तन रखे जाते हैं, जिन्हें लकड़ी की आग से पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान सबसे पहले पकाया जाता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं होता, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि मंदिर के कपाट बंद होते ही प्रसाद भी समाप्त हो जाता है। ये सब हैरान करने वाले फैक्ट हैं।