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Paltan Film (2018): Review, Recommendation and Dialogues

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फ़िल्म "पलटन": एक नायाब "वार मूवी"।

जेपी दत्ता स्वयम में एक फ़िल्म स्कूल है। उनके द्वारा निर्देशित फिल्मों का एक विशेष स्थान है, उनकी नवीनतम फ़िल्म "पलटन" भारत-चीन बॉर्डर पर घटित एक घटना की रजतपट पर साकार प्रस्तुति है।

राजपूत बटालियन पर 1962 में हुए हमले में कुल 1383 सैनिक शहीद हुए थे। शहीदों के घरों में तार से सूचना मिलने पर कोहराम मच गया था। घरों में पहुँचे इस "शहीदी समाचार" के तारों ने देश को हिला दिया था।

नाथुला दर्रे पर भारतीय सीमा पर नियंत्रण कायम रखने के भारतीय आर्मी के प्रयासों की बेजोड़ कहानी है "पलटन" । इस फ़िल्म को हर स्कूल, कॉलेज व विश्विद्यालय में निःशुल्क व अनिवार्य रूप से दिखाना चाहिए।

फ़िल्म के मजबूत पक्ष।

फ़िल्म के लिए चुनी गई लोकेशन ने फ़िल्म के प्रस्तुतिकरण को वास्तविक बना दिया है। पटकथा लेखन की कुशलता के कारण फ़िल्म की गति तेज है। दर्शक स्वयम को फ़िल्म का एक हिस्सा मानने लगते है।

संगीत

जेपी दत्ता की हर फिल्म के गाने देशभक्ति गीतों में वृद्धि दर्ज करते है। इस बार भी "पर्वत रास्ता छोड़े, चले जब अपनी पलटन" ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।"रात कितनी दास्ताने कह रही है, एक नदी यादों की है जो बह रही है" को बेस्ट सांग ऑफ ईयर मान सकते है।

अभिनय स्तर

फ़िल्म में उच्च कोटि के कलाकारों ने पूर्ण समर्पण से अभिनय किया है। जैकी श्रॉफ, अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, हर्षवर्धन राणे आदि ने अपने जीवंत अभिनय से अपनी भूमिका को वास्तविक रूप प्रदान किया है। कम स्कोप के बावजूद ईशा गुप्ता व सोनल चौहान ध्यानाकर्षण में सफल रही है।

विशेष उल्लेखनीय।

सेना में देश पर शहीद होने वाले जवानों का सामान उनके घर भेजने की परंपरा है। इसे फ़िल्म में बेहद सावधानी से प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म में अत्यंत संवेदनशील ऐतिहासिक तथ्यों को बहुत जिम्मेदारी से गम्भीरतापूर्वक दर्शकों के सामने रखा गया है।

रिकमंडेशन।

फ़िल्म "मस्ट वॉच" केटेगरी में शुमार है। इस वॉर मूवी को आप सपरिवार देखने जा सकते है। फ़िल्म को फाइव स्टार प्रदान किये जाते है।

फ़िल्म के कुछ सम्वाद

1. Do and die and don't ask Why?
2. हथियार फौजी के शरीर का हिस्सा होते है।
3. एक फौजी जंग इसलिए करता है क्योंकि वो उनसे बहुत प्यार करता है जिनको पीछे छोड़ आया है।
4. जवान और किसान में यही बात कॉमन है कि दोनों मिट्टी के लिए जान दे सकते है।
5. एक ने कही दूजे ने मानी, नानक कहे दोनो ज्ञानी।
6. ये मिठाई तो 1962 में ही कड़वी और बासी हो गई थी।
7. दिमागी दबाब बनाना व उकसाना इनके हथकण्डे है।
8. फौजियों को दो चीजों का ही इन्तेजार रहता है- दुश्मन की गोली ओर घर की चिट्ठी।
9. देखिए मैडम। आप अपनी तुलना माँ से कर रही है। माँ है तो हम है, आप है।
10. सामने वाले में डर पैदा करना है तो पहले खुद के अंदर का डर निकालना पड़ता है।
11. जब वो कमजोर होते है तो ताकतवर दिखाने का ढोंग करते है।
12. तुम्हारी नियत ओर ज्योग्राफी दोनो खराब है।
13. मजबूत दीवारे पत्थरों से नही जवानों से बनती है।
14. Heros does not choose destiny, destiny choose hero's.
15. हमारे दुश्मन हमें नही हमारी परम्पराओ और मान्यताओं को नष्ट करना चाहते थे।