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| On 2 years ago

Poem by Shree Harivansh Rai Bachchan

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एक श्रेष्ठ कविता: श्री हरिवंशराय बच्चन द्वारा लिखित।

श्री हरिवंशराय बच्चन हिंदी भाषा के मूर्धन्य कवि है। आपके द्वारा रचित साहित्य एक अनमोल धाती है। आपके द्वारा लिखित विशाल साहित्य कोष से एक रचना विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन हेतु प्रस्तुत है।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

उपरोक्त कविता के माध्यम से कविश्रेष्ठ ने एक आम आदमी में संघर्ष करने की भावना को प्रोत्साहित किया है।

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