Pulwama Terror Attack: Complete report on Pulwama, All you need to know.

पुलवामा अटैक: “लोन वुल्फ अटैक” टाइप आतँकवादी हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर लेथपोरा के पास चरमपंथियों ने आईईडी धमाका कर सीआरपीएफ़ के काफिले को निशाना बनाया। इस काफ़िले में 2547 जवान थे। कश्मीर में अब तक के सबसे बड़े इस आतंकी हमले में 44 जवान मारे गए और कई घायल हैं। हमला दोपहर में सवा तीन बजे कारित हुआ था।

इस आतँकवादी हमले को अफगानिस्तान- सीरिया में होने वाले हमले की तर्ज पर किया गया है। इसमें 350 किलो विस्फोटक से भरी कार से सेना के काफिले पर आत्मघाती टक्कर मारी गई है। “लोन वुल्फ अटैक” नामक इस आतँकवादी तरीके से हुआ विस्फोट इस कदर खतरनाक था कि आठ-दस किलोमीटर परिक्षेत्र में धमाके को सुना गया। धमाके के बाद आस-पास के क्षेत्रों में शटर गिरा कर दुकानें बंद कर दी गई व चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस अत्यंत गम्भीर हमले की आतँकवादी हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम सामने आ रहा है। इस क्रम में एनएसए ने आपात बैठक आहूत करके जांच का जिम्मा 12 सदस्यों की टीम को दिया है। आतँकवादी सगठन ने इस हमले की बहुत पहले से तैयारी कर रखी थी एवम उनको यह जानकारी थी कि घाटी में बर्फबारी के बाद सेना के काफिले का मूवमेंट होगा।

इस हमले में शहीद हुए जवानों में राजस्थान के हेमराज, भगीरथ व रोहिताश सम्मिलित थे। इस हमले में सीआरपीएफ के वाहन के परखच्चे उड़ गए थे। इस हमले में आत्मघाती आतँकवादी की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में की गई है। यह आतँकवादी 2018 में सुरक्षा बलों की घेराबंदी से भाग निकला था।

पुलवामा : “चावल का कटोरा” अब आतंक का क्षेत्र।

पुलवामा कश्मीर के मध्य में स्तिथ जिला है एवम 1974 में इस जिले की स्थापना बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण हेतु की गई थी। इस जिले की जनसंख्या लगभग साढ़े छः लाख है। यहां की साक्षरता दर 47% है। चावल के भरपूर उत्पादन के कारण यह क्षेत्र “चावल का कटोरा” कहलाता है लेकिन अब इसकी पहचान दुर्भाग्यपूर्ण रूप से एक आतंक क्षेत्र के रूप में हो गई है।

लोन वुल्फ अटैक क्या है?

लोन वुल्फ अटैक हमले का वो तरीका है जिसमें आतंकी रोजमर्रा या साधारण चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इस हमले में एक अकेला शख्स ही पूरे अटैक को अंजाम देता है। लोन वुल्फ अटैक का मकसद अकेले दम पर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने का होता है। इस अटैक में छोटे हथियारों, चाकुओं, आदि इस्‍तेमाल किया जाता है।

जैश-ए-मोहम्मद

जैश-ए-मोहम्मद एक जिहादी संगठन है जिसे भारत व पश्चिमी देशों के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में भी शामिल समझा जाता हैं। इसकी स्थापना मसूद अज़हर ने मार्च 2k में की थी। आरम्भिक रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले के तार इस सगंठन से जुड़े बताए जाते है।

निंदा व भर्त्सना

कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी समेत तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने निंदा की।

गृह मंत्री ने कहा- पुलवामा में सीआरपीएफ पर हमला बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली घटना है। हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। जैश के आतंकियों का हाथ है। मैं जनता को ये आश्वासन देता हूं कि हम इसका जवाब देंगे। पूरा देश एकजुट है। हम किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

अंतराष्ट्रीय परिदृश्य

पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले की अमेरिका, रूस, फ्रांस व यूएन ने कडी निंदा की है दूसरी तरफ पाकिस्तान ने चिंता अभिव्यक्ति के साथ ही इस आतँकवादी हमले से पल्ला झाड़ लिया है।

सोशल मीडिया पर शोक संतप्त सन्देश

सोशल मीडिया पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही रोष अभिव्यक्त करने का सिलसिला जारी है। आम जनता में इस हमले को लेकर बहुत रोष है एवम सरकार से बदले की कार्यवाही तथा सेना को अधिक अधिकार देने की मांग बलवती हो रही है।

सम्पूर्ण राष्ट्र एकजुट होकर इस हमले का विरोध कर रहा है एवम सभी का एक ही सन्देश है कि अब आतँकवादीयो व उनके आकाओं को सबक सिखाना ही होगा। देश के विभिन्न संगठनों व राजनीतिक पार्टियों ने तीव्र व त्वरित एक्शन की मांग की है।

इसी क्रम में निजी टीवी चैनल को राष्ट्रीय एकता व सुरक्षा के क्रम में सरकार द्वारा एडवाईजरी जारी की गई है जिसमे अपुष्ट समाचार नही देने के लिए निर्देशित किया गया है।

देश के लिए शहादत देने वाले 42 जवान

1. जयमाल सिंह- 76 बटालियन
2. नसीर अहमद- 76 बटालियन
3. सुखविंदर सिंह- 76 बटालियन
4. रोहिताश लांबा- 76 बटालियन
5. तिकल राज- 76 बटालियन
6. भागीरथ सिंह- 45 बटालियन
7. बीरेंद्र सिंह- 45 बटालियन
8. अवधेष कुमार यादव- 45 बटालियन
9. नितिन सिंह राठौर- 3 बटालियन
10. रतन कुमार ठाकुर- 45 बटालियन
11. सुरेंद्र यादव- 45 बटालियन
12. संजय कुमार सिंह- 176 बटालियन
13. रामवकील- 176 बटालियन
14. धरमचंद्रा- 176 बटालियन
15. बेलकर ठाका- 176 बटालियन
16. श्याम बाबू- 115 बटालियन
17. अजीत कुमार आजाद- 115 बटालियन
18. प्रदीप सिंह- 115 बटालियन
19. संजय राजपूत- 115 बटालियन
20. कौशल कुमार रावत- 115 बटालियन
21. जीत राम- 92 बटालियन
22. अमित कुमार- 92 बटालियन
23. विजय कुमार मौर्या- 92 बटालियन
24. कुलविंदर सिंह- 92 बटालियन
25. विजय सोरंग- 82 बटालियन
26. वसंत कुमार वीवी- 82 बटालियन
27. गुरु एच- 82 बटालियन
28. सुभम अनिरंग जी- 82 बटालियन
29. अमर कुमार- 75 बटालियन
30. अजय कुमार- 75 बटालियन
31. मनिंदर सिंह- 75 बटालियन
32. रमेश यादव- 61 बटालियन
33. परशाना कुमार साहू- 61 बटालियन
34. हेम राज मीना- 61 बटालियन
35. बबला शंत्रा- 35 बटालियन
36. अश्वनी कुमार कोची- 35 बटालियन
37. प्रदीप कुमार- 21 बटालियन
38. सुधीर कुमार बंशल- 21 बटालियन
39. रविंदर सिंह- 98 बटालियन
40. एम बाशुमातारे- 98 बटालियन
41. महेश कुमार- 118 बटालियन
42. एलएल गुलजार- 118 बटालियन

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