Pulwama Terror Attack: National and International Opinion after Terror Attack

पुलवामा आतंकी हमला: आतँकवादी हमले के बाद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जनमानस।

पसरा हुआ सन्नाटा

जम्मु कश्मीर के पुलवामा में दोपहर सवा तीन बजे हुए आतंकवादी हमले की गूंज 10 किलोमीटर परिक्षेत्र में सुनी गई लेकिन सन्नाटा पूरे देश मे पसर गया। जिसने सुना वह स्तब्ध रह गया मानो यह यकीन करना ही नामुमकिन है कि अहिंसा के इस देश मे इस कदर खुरेंज हादसा भी हो सकता है जब सेना के काफिले से आरडीएक्स से भरी कार टकराई और उसने देश के 44 घरों के दीपक बुझा दिए।

आतंक के खेत मे लाल रंग की फसलें

आतंकवाद की बुनियाद चाहे किसी भी फलसफे पर आधारित हो लेकिन उसके कंगूरे पर बस सड़ती लाशों के अलावा कुछ भी नही मिलेगा। आतंक के खेत का रंग कोई भी हो लेकिन फसल लाल रंग की ही कटेगी। आप के आदर्श कितने भी उच्च हो लेकिन अगर उनमें राष्ट्रीयता, इंसानियत और मूलभूत सिद्धान्तों के प्रति आदर नही हो तो आपके आदर्शो को बलिवेदी पर चढ़ना ही होगा।

अहिंसा कमजोरी नही।

किसी की भलमनसाहत, किसी की उदारता व किसी की वचनबद्धता उसकी ताकत होती है कमजोरी नही। जिस देश में अपने बच्चे को बचाने के लिए एक भेड़ भी शेर से टकरा सकती है एवम उसी स्थान पर जब भारत के एक शहर बीकानेर की स्थापना हो सकती है, उस देश के 42 लालों को निगलने वाले कि यह हरकत आतंक को उसके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त है।

एकजुट भारत

आम भारतीय जनमानस ना केवल आहत है बल्कि एकजुट भी है कि इस कायराना व नापाक हरकत का अतिशीघ्र मुहँतोड़ जबाब दिया जाना चाहिए। पुलवामा अटैक ने भारतीय जनमानस में अनेक पुराने आतँकवादी हमलों को कुरेद दिया है एवं भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति को रोके जाने के लिए पुख्ता तैयारी हेतु भी आमजन में विषय बन रहा है।

कठोरता अब आवश्यकता

यह सही है कि भारत एक विशाल राष्ट्र है एवम अपनी हजारों किलोमीटर लंबी सीमाओं के कारण कुछ खतरे सदैव विद्यमान रहते है लेकिन हमारे विशाल राष्ट्र के पास संसाधनों की भी प्रचुरता है अतः अब आतँकवादी गतिविधियों के अंकुश हेतु “कठोर नीति” की आवश्यकता शिद्दत से महसूस की जा रही है।

दिया है कठोर सन्देश

हमले के तुरंत बाद राष्ट्र द्वारा कठोर मैसेज दिया गया है। पाक सरकार को कठोर डिमार्श देने के साथ ही पाक से आयातित होने वाले उत्पादों पर 200% आयात शुल्क लगा दिया गया है। अत्यंत महत्वपूर्ण शंघाई समूह की बैठक को भी गहन विचार के साथ स्थगित कर दिया गया है। सीआरपीएफ ने भी “ना भूलेंगे, ना ही माफ करेंगे” जैसा कठोर सन्देश दिया है। पोकरण के युद्धाभ्यास में गरजती वायु शक्ति ने देश की ताकत को दर्शा दिया है।

अंतराष्ट्रीय बिरादरी साथ में

अंतरराष्ट्रीय जगत में इस आतँकवादी हमले को लेकर कठोर प्रतिक्रिया की है। अमेरिका, रूस, इजरायल सहित अनेकों राष्ट्रों ने इस हमले की कठोर भर्त्सना करते हुए भारतीय रुख को समर्थन दिया है एवम भारतीय पक्ष के प्रति अपनी स्पष्ट प्रतिबद्धता जाहिर की है। इसी क्रम में भारतीय विपक्षी दलों ने आतंकवाद के मुद्दे पर राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए कंधे से कंधा मिलाकर आतंक के विरुद्ध राष्ट्र के हर कदम से सहमति व सलग्नता दिखाई है।

सम्पूर्ण विश्व में इस घटना को लेकर स्तब्धता है क्योंकि भारत जैसे शांतिप्रिय लेकिन शक्तिशाली राष्ट्र पर हुए इस कायराना आतंकी हमले को बहुत गम्भीरता से लेने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अब समय आ गया है कि इस दिशा में नियोजित कार्यवाही हो ताकि दुबारा ऐसे हमले निर्दोष जीवन लील नही सकें।

डिमार्श- Demarche किसी राष्ट्र द्वारा जताई जाने वाली लिखीत आपत्ति।

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