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| On 3 years ago

Pure Drinking Water: Our need and base for future development.

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स्वच्छ पेयजल- हमारी पहली आवश्यकता व भावी विकास का आधार।

विभिन्न स्तरों पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि अगला विश्वयुद्ध पानी पर अधिकार को लेकर हो सकता है एवम चौथा विश्वयुद्ध पत्थरो से लड़ा जाएगा। आज पानी की उपलब्धि एवम स्वच्छ पेय जल की व्यवस्था किसी भी राज्य एवम सरकार के लिए एक चुनोती है।

आज तमाम राजकीय दावों के बावजूद हम जानते है कि तीसरी दुनिया की तमाम कच्ची बस्तियां एवम अर्द्ध-विकसित शहरी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धि एक बहुत बड़ी समस्या है एवम इसी कारण यहाँ एक साक्षात नरक दिखता है।

अधिकांश नगरों का अंसतुलित व बेढब विकास होने के कारण जल पाइप लाइन व सीवरेज लाइन एक दूसरे से बेहद करीब से गुजरती है एवम उनके परस्पर लीकेज ने स्तिथि को और भी मुश्किल बना दिया है।

अधिकांश देशों में घरों में पाइप लाइन से जल आपूर्ति की जाती है एवम यह जल पेयजल व साधारण जल की श्रेणी में विभक्त नही किया जा रहा है। प्रत्येक नगर में घरों में जल की आपूर्ति से पूर्व उसका ट्रीटमेंट किया जाता है। इस जल शुद्धिकरण में राज्य को बड़ी राशि का विनियोग करना पड़ता है लेकिन इस पीने योग्य जल का अधिकांश हिस्सा स्वच्छता एवम अन्य कार्यों हेतु प्रयोग में लाया जाता है।

राहगीरों व पशुओं हेतु पहले सामुदायिक सहयोग से पेयजल व्यवस्था की जाती थी लेकिन अब पीने का पानी प्लास्टिक की बोतलों में बंद करके बेचा जा रहा है। अब सर्वत्र व्यापार है एवम इस व्यापार ने प्रत्येक नैतिक मूल्य को निगल लिया है। इन प्लास्टिक की बोतलों में सार्वजनिक नलों से अशुद्ध जल भरकर उसे मनमाने मूल्यों पर यात्रियों को बेचा जाता है। पशुओं हेतु साफ पीने हेतु पानी की व्यवस्था के बारे में सोचने की कोई मजाल तक नही कर सकता।

जब तक हम लुभावनी व्यवस्थाओं में विनियोग को नही रोकेंगे तब तक आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सुधार नही आ सकेगा। हम सभी को एक बार पुनः इस दिशा में सोचना ही पड़ेगा।

जब बहुत सारे क्षेत्रो में सुधार अपेक्षित हो एवम संसाधन न्यून हो तब भी विकास सम्भव है। ऐसी स्तिथि हेतु हमे अर्थशास्त्र के बेसिक्स को अपनाना पड़ेगा जिसमे यह कहा गया कि किसी सबसे अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्र का चयन करके उसको त्वरित गति से सुधारने के लिए सम्पूर्ण शक्ति का पूर्ण ऊर्जा से विनियोग कर देना चाहिए।

किसी एक क्षेत्र में जब व्यापक सुधार जनता के सामने प्रत्यक्ष होता है तो समाज मे आपसी विश्वास का विकास होता है। जनता में सकारात्मकता विकसीत होती है एवम वे नव ऊर्जा से अन्य समस्याओं के निवारण के मार्ग को ढूंढने लगते है क्योंकि विकास किसी कागज के टुकड़ों पर बनने वाली योजनाओं से नही बल्कि सभी नागरिकों के ह्रदय में विश्वास भाव से ही सम्भव है।